दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर: व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसरों का द्वार
सारांश
Key Takeaways
- दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारा 213 किलोमीटर लंबा है।
- इसकी लागत 12,000 करोड़ रुपए है।
- यात्रा का समय छह घंटे से घटकर ढाई घंटे होगा।
- यह परियोजना उत्तराखंड के लिए रोजगार और पर्यटन में वृद्धि करेगी।
- कॉरिडोर में उन्नत यातायात प्रबंधन प्रणाली है।
देहरादून, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को देहरादून में दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे का उद्घाटन किया। यह एक्सप्रेसवे लगभग 213 किलोमीटर लंबा है, जिसे 12,000 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से तैयार किया गया है। यह कॉरिडोर दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से होकर गुजरेगा, और इसके चालू होने के बाद दिल्ली से देहरादून की यात्रा का समय करीब छह घंटे से घटकर केवल ढाई घंटे रह जाएगा।
उद्घाटन समारोह में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस परियोजना के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि देश के आर्थिक विकास को तेज करने का एक महत्वपूर्ण साधन है। उन्होंने बताया कि इस कॉरिडोर से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसरों में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
गडकरी ने कहा कि इस दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर से प्रमुख पर्यटन स्थलों और आर्थिक केंद्रों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी स्थापित होगी, जिससे व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे। विशेषकर उत्तराखंड जैसे पर्यटन-प्रधान राज्य के लिए यह परियोजना एक बड़ी सौगात साबित होगी।
गडकरी ने बताया कि इस एक्सप्रेसवे के निर्माण से उत्तराखंड में आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक विकास के नए द्वार खुलेंगे। बेहतर कनेक्टिविटी के माध्यम से निवेश बढ़ेगा, उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा और स्थानीय निवासियों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। यह परियोजना उन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी होगी जो नियमित रूप से दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा करते हैं।
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि इस एक्सप्रेसवे से देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश जैसे प्रमुख शहरों तक पहुंच आसान होगी, जिससे राज्य में पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है। यह 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से प्रारंभ होकर अक्षरधाम, शास्त्री पार्क, खजूरी खास, बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर होते हुए देहरादून तक जाता है, जिससे पूरे क्षेत्र का विकास नई रफ्तार पकड़ेगा।
इसके अतिरिक्त, मंत्री ने बताया कि सहारनपुर बाईपास से हरिद्वार तक 51 किलोमीटर लंबे 6-लेन सुपररोड का उद्घाटन भी जून में किया जाएगा, जिससे क्षेत्र की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी।
मंत्री ने कहा, "नीति, अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी, ये तीनों हमारे समाज के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। हमें विकास करना है और साथ ही पारिस्थितिकी और पर्यावरण का संरक्षण भी करना है।"
केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया पर कहा कि यह तेज मल्टी-लेन कॉरिडोर दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड राज्यों से होकर गुजरता है। इस परियोजना के कार्यान्वयन में निर्बाध हाई स्पीड कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए 10 इंटरचेंज, तीन रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी), चार प्रमुख पुल और सड़क किनारे 12 जन सुविधाओं का निर्माण भी शामिल है। यात्रियों के लिए सुरक्षित और अधिक कुशल यात्रा अनुभव प्रदान करने के लिए यह कॉरिडोर उन्नत यातायात प्रबंधन प्रणाली (एटीएम) से सुसज्जित है।
आगे कहा गया है कि इस परियोजना में क्षेत्र की पारिस्थितिक संवेदनशीलता, समृद्ध जैव विविधता और वन्यजीवों का ध्यान रखते हुए कई विशेषताएँ शामिल की गई हैं, जिनका उद्देश्य मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी लाना है। जंगली जानवरों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए, परियोजना में वन्यजीव संरक्षण की कई विशेष सुविधाएं बनी हैं, जिसमें 12 किलोमीटर लंबा वन्यजीव एलिवेटेड कॉरिडोर शामिल है। यह एशिया के सबसे लंबे कॉरिडोर में से एक है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास संभव होगा। कॉरिडोर में आठ पशु मार्ग, 200 मीटर लंबे दो हाथी अंडरपास और दात काली मंदिर के पास 370 मीटर लंबी सुरंग भी शामिल है।