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दिल्ली सरकार ने प्लास्टिक प्रदूषण से लड़ने के लिए डीआरएस मॉडल का अध्ययन करने का निर्णय लिया

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दिल्ली सरकार ने प्लास्टिक प्रदूषण से लड़ने के लिए डीआरएस मॉडल का अध्ययन करने का निर्णय लिया

सारांश

दिल्ली सरकार ने नॉन-बायोडिग्रेडेबल कचरे की समस्या का समाधान करने के लिए डिपॉजिट रिटर्न स्कीम (डीआरएस) का अध्ययन करने का निर्देश दिया है। यह पहल दिल्ली को स्वच्छ और हरित बनाने में मदद करेगी।

मुख्य बातें

डीआरएस का कार्यान्वयन नॉन-बायोडिग्रेडेबल कचरे से निपटने में मदद करेगा।
यह स्कीम स्वच्छता और पर्यावरण सुरक्षा को बढ़ावा देगी।
नागरिकों, व्यवसायों और रीसाइक्लर्स की भागीदारी आवश्यक है।
अन्य राज्यों के सफल अनुभवों से प्रेरणा ली जाएगी।
इनिशिएटिव का उद्देश्य दिल्ली को हरित और स्वच्छ बनाना है।

नई दिल्ली, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने पर्यावरण विभाग को नॉन-बायोडिग्रेडेबल कचरे की समस्या पर काबू पाने के लिए डिपॉजिट रिटर्न स्कीम (डीआरएस) के कार्यान्वयन की संभावनाओं का गहन अध्ययन करने के निर्देश दिए हैं।

सिरसा की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्च-स्तरीय बैठक में संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्लास्टिक और अन्य कचरे से उत्पन्न गंभीर समस्याओं पर चर्चा हुई। यह कचरा नालियों को अवरुद्ध कर रहा है, जल स्रोतों को प्रदूषित कर रहा है, मिट्टी को हानि पहुंचा रहा है और खुले में जलने से वायु प्रदूषण में वृद्धि कर रहा है।

बैठक के दौरान सिरसा ने कहा, "यह स्कीम अन्य राज्यों में सफल रही है और दिल्ली को भी अपनी शहरी चुनौतियों के अनुसार इसे अपनाने पर विचार करना चाहिए, ताकि जल्दी और ठोस परिणाम मिल सकें।"

उन्होंने इस संदर्भ में स्टैंडिंग ऑर्डर जारी करते हुए पर्यावरण विभाग को निर्देश दिए हैं कि वे इन मॉडलों का विस्तृत अध्ययन करें, दिल्ली के लिए उपयुक्त डीआरएस ढांचा तैयार करें और वित्तीय तंत्र, संस्थागत व्यवस्था, हितधारकों की जिम्मेदारियां और कार्यान्वयन की रणनीति को शामिल करते हुए एक व्यापक प्रस्ताव एक महीने के भीतर तैयार करें।

सिरसा ने इस पहल के जनहित पहलू पर जोर देते हुए कहा, "नागरिकों, व्यवसायों और रीसाइक्लर्स को साथ लेकर डीआरएस न केवल प्रदूषण को कम करेगा, बल्कि दिल्ली को स्वच्छ और हरित बनाने में मदद करेगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के विजन के तहत हम दिल्ली को स्वच्छ सांस लेने और सस्टेनेबल बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।"

यह पहल प्रदूषण-मुक्त भविष्य के लिए दिल्ली सरकार की नवाचारी और जन-केंद्रित सोच को दर्शाती है।

डिपॉजिट रिटर्न स्कीम (डीआरएस) एक इंसेंटिव आधारित प्रणाली है, जिसमें प्लास्टिक बोतल या पैकेजिंग जैसी वस्तुओं पर खरीद के समय एक छोटा रिफंडेबल डिपॉज़िट लिया जाता है। जब उपभोक्ता इन खाली वस्तुओं को निर्धारित कलेक्शन पॉइंट्स जैसे दुकानों या रीसाइक्लिंग सेंटर पर वापस करते हैं, तो उन्हें यह राशि वापस मिल जाती है।

इससे कचरे का सही तरीके से अलग-अलग संग्रह और रीसाइक्लिंग बढ़ती है और इधर-उधर फेंका जाने वाला कचरा कम होता है। गोवा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में डीआरएस लागू किया गया है, जहां इसके अच्छे परिणाम सामने आए हैं।

दुनिया के 40 से अधिक देशों में डीआरएस लागू है, जहां कई रिपोर्ट्स के अनुसार 90 प्रतिशत से अधिक रिटर्न रेट हासिल होता है। जर्मनी और स्वीडन जैसे देशों में यह दर लगभग 96 प्रतिशत तक बताई गई है।

डीआरएस से सरकार को कचरा प्रबंधन की लागत कम करने में मदद मिलती है, साथ ही लोगों में जिम्मेदारी से कचरा निपटान की आदत भी विकसित होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह योजना एक जन-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है और नागरिकों की भागीदारी पर जोर देती है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डिपॉजिट रिटर्न स्कीम (डीआरएस) क्या है?
यह एक इंसेंटिव आधारित प्रणाली है, जिसमें उपभोक्ता प्लास्टिक बोतलें या पैकेजिंग खरीदते समय एक छोटा रिफंडेबल डिपॉजिट देते हैं। जब वे इन खाली वस्तुओं को वापस करते हैं, तो उन्हें यह राशि वापस मिलती है।
डीआरएस का लाभ क्या है?
डीआरएस से कचरे का सही तरीके से संग्रह और रीसाइक्लिंग बढ़ती है, जिससे प्रदूषण कम होता है और पर्यावरण की रक्षा होती है।
क्या अन्य राज्यों में भी डीआरएस लागू है?
हाँ, गोवा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में डीआरएस लागू किया गया है और इसके अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं।
दिल्ली सरकार का इस पहल के प्रति क्या दृष्टिकोण है?
दिल्ली सरकार का इस पहल के प्रति जनहित और स्वच्छता को बढ़ावा देने का दृष्टिकोण है, जो नागरिकों की भागीदारी पर आधारित है।
क्या अन्य देशों में भी डीआरएस का प्रयोग हो रहा है?
जी हाँ, दुनिया के 40 से अधिक देशों में डीआरएस लागू है, जिसमें जर्मनी और स्वीडन जैसे देशों में रिटर्न रेट 96 प्रतिशत तक है।
राष्ट्र प्रेस
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