मार्च में भारत में यात्री वाहनों की बिक्री में 16%25 की वृद्धि: नई रिपोर्ट
सारांश
Key Takeaways
- भारत में यात्री वाहनों की बिक्री में 16%25 की वृद्धि हुई है।
- इससे पहले, पिछले साल मार्च में 3,81,358 यूनिट्स की बिक्री हुई थी।
- दोपहिया वाहनों की बिक्री में 19.3%25 की वृद्धि हुई है।
- तिपहिया वाहनों की बिक्री 21.4%25 बढ़ी है।
- बाजार में सकारात्मक माहौल बना हुआ है।
नई दिल्ली, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत में यात्री वाहनों की बिक्री ने सालाना आधार पर 16 प्रतिशत की वृद्धि दिखाते हुए 4,42,460 यूनिट्स का आंकड़ा पार कर लिया है। यह वृद्धि मांग में सुधार और डीलरशीप के पास अधिक इन्वेंट्री की उपलब्धता के कारण हुई है। यह जानकारी सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चर्स (सियाम) द्वारा मंगलवार को साझा की गई।
पिछले साल मार्च में यात्री वाहनों की थोक बिक्री 3,81,358 यूनिट्स थी।
मार्च में दोपहिया वाहनों की थोक बिक्री में भी वृद्धि हुई, जो सालाना आधार पर 19.3 प्रतिशत बढ़कर 19,76,128 यूनिट्स हो गई, जबकि पिछले वर्ष समान अवधि में यह 16,56,939 यूनिट्स थी।
तिपहिया वाहनों की थोक बिक्री भी 21.4 प्रतिशत बढ़कर 76,273 यूनिट्स तक पहुँच गई, जो मार्च 2026 में 62,813 यूनिट्स थी।
इसके अतिरिक्त, सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में कंपनियों द्वारा डीलरों को भेजे गए घरेलू यात्री वाहनों की संख्या में पिछले वर्ष की तुलना में 10.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो कि 4,17,705 यूनिट्स तक पहुँच गई। यह बाजार में लगातार सकारात्मक माहौल को दर्शाता है।
यात्री वाहन सेगमेंट का समग्र दृष्टिकोण भी सकारात्मक बना हुआ है, हालांकि भविष्य में वृद्धि दर में कुछ कमी की संभावना है।
एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि त्योहारी मांग में मजबूती, हाल ही में जीएसटी दरों में कटौती, और नए मॉडलों के लगातार लॉन्च के कारण वित्त वर्ष 2026 में थोक बिक्री में लगभग 7-9 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है।
हालांकि, उच्च आधार और बदलती आर्थिक परिस्थितियों के कारण वित्त वर्ष 2027 में वृद्धि दर घटकर 4-6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस क्षेत्र में संरचनात्मक परिवर्तन जारी हैं, जिसमें यात्री वाहनों की कुल बिक्री में यूटिलिटी वाहनों की हिस्सेदारी लगभग 67 प्रतिशत है, जो प्रीमियम उत्पादों की ओर बढ़ते रुझान को दर्शाता है। इसके अलावा, सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे वैकल्पिक ईंधन विकल्पों को अपनाने में वृद्धि से मांग में विविधता आ रही है।