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जेएसएससी-सीजीएल पेपर लीक: वेबेल एजेंसी के दो कर्मचारी गिरफ्तार, डिजिटल साक्ष्य खंगाल रही SIT

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जेएसएससी-सीजीएल पेपर लीक: वेबेल एजेंसी के दो कर्मचारी गिरफ्तार, डिजिटल साक्ष्य खंगाल रही SIT

सारांश

जेएसएससी-सीजीएल पेपर लीक की जड़ें अब तकनीकी एजेंसी तक पहुंच गई हैं। वेबेल से जुड़े दो कर्मचारियों की गिरफ्तारी यह संकेत देती है कि लीक नेटवर्क परीक्षा के भीतरी ढांचे में पैठ बनाए हुए था — और SIT की जांच अभी और गहरी होनी बाकी है।

मुख्य बातें

एसआईटी ने 27 अगस्त को सोमेश प्रकाश और राहुल को गिरफ्तार किया, दोनों वेबेल एजेंसी से जुड़े बताए जा रहे हैं।
दोनों आरोपियों की परीक्षा की संवेदनशील प्रक्रियाओं तक सीधी पहुंच थी, जिसका कथित तौर पर दुरुपयोग हुआ।
जांच में मोबाइल फोन, कॉल डिटेल और डिजिटल संपर्कों को खंगाला जा रहा है।
पूछताछ में आर्थिक लेन-देन , लीक का दायरा और नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा रही है।
जांच एजेंसी के अनुसार, प्रश्नपत्र तैयार होने से लेकर अभ्यर्थियों तक पहुंचने की पूरी श्रृंखला जांच के दायरे में है।

झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (सीजीएल) परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले में सीआईडी की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने 27 अगस्त को दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सोमेश प्रकाश और राहुल के रूप में हुई है, जो कथित तौर पर परीक्षा संचालन की तकनीकी और प्रबंधकीय जिम्मेदारी संभालने वाली एजेंसी 'वेबेल' से जुड़े बताए जा रहे हैं।

गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि

एसआईटी सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान जुटाए गए डिजिटल साक्ष्यों और आरोपियों की गतिविधियों की पड़ताल में सोमेश प्रकाश और राहुल की भूमिका संदिग्ध पाई गई। जांच में सामने आया कि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े संवेदनशील कार्यों तक दोनों की पहुंच थी। इसी पहुंच का कथित तौर पर दुरुपयोग कर प्रश्नपत्र लीक करने में सहायता पहुंचाने का आरोप दोनों पर लगाया गया है।

जांच का दायरा

सीआईडी की जांच में पेपर लीक के पूरे नेटवर्क को कई स्तरों पर खंगाला जा रहा है। इसमें प्रश्नपत्र तैयार होने से लेकर उसके सुरक्षित रखे जाने, परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने और अभ्यर्थियों के बीच प्रसारित होने तक की समूची प्रक्रिया जांच के दायरे में है। गौरतलब है कि यह मामला उन हजारों अभ्यर्थियों की मेहनत पर सवाल खड़ा करता है जिन्होंने परीक्षा की तैयारी में महीनों लगाए।

पूछताछ में क्या पता लगाया जा रहा है

गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी गई है। जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि प्रश्नपत्र लीक की योजना कब बनाई गई, इसमें कौन-कौन शामिल थे, लीक प्रश्नपत्र कितने अभ्यर्थियों तक पहुंचा और क्या प्रश्नपत्र के बदले आर्थिक लेन-देन भी हुआ। एसआईटी अब यह भी जानना चाहती है कि दोनों आरोपियों ने किस स्तर पर गोपनीय जानकारी हासिल की और उसे किसके माध्यम से आगे पहुंचाया।

डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका

एसआईटी मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, कॉल डिटेल और डिजिटल संपर्कों के जरिए आरोपियों के संपर्क में रहे लोगों की पहचान कर रही है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि प्रश्नपत्र लीक होने के बाद उसे किस माध्यम से अलग-अलग अभ्यर्थियों तक पहुंचाया गया। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं।

आगे की कार्रवाई

एसआईटी की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों से इनकार नहीं किया जा सकता। जांचकर्ताओं का ध्यान अब उन कड़ियों पर है जो लीक नेटवर्क के बड़े सरगनाओं तक पहुंचा सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

राजस्थान और उत्तर प्रदेश में भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। असली सवाल यह है कि परीक्षा एजेंसियों के चयन, निगरानी और ऑडिट के लिए कोई केंद्रीय मानक क्यों नहीं है। जब तक आउटसोर्सिंग पारदर्शिता और दंड-प्रावधान के बिना जारी रहेगी, पेपर लीक की यह श्रृंखला टूटने वाली नहीं।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेएसएससी-सीजीएल पेपर लीक मामले में किसे गिरफ्तार किया गया है?
एसआईटी ने सोमेश प्रकाश और राहुल को गिरफ्तार किया है, जो परीक्षा संचालन से जुड़ी तकनीकी एजेंसी वेबेल से कथित तौर पर जुड़े हैं। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने अपनी संवेदनशील पहुंच का दुरुपयोग कर प्रश्नपत्र लीक करने में मदद की।
वेबेल एजेंसी का जेएसएससी परीक्षा में क्या रोल था?
वेबेल परीक्षा संचालन की तकनीकी और प्रबंधकीय जिम्मेदारी संभालने वाली एजेंसी बताई जा रही है। जांच के अनुसार, इस एजेंसी के कर्मचारियों की परीक्षा की गोपनीय प्रक्रियाओं तक सीधी पहुंच थी।
एसआईटी जांच में अब तक क्या सामने आया है?
जांच में पेपर लीक के पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है — प्रश्नपत्र तैयार होने से लेकर अभ्यर्थियों तक पहुंचने तक। डिजिटल साक्ष्यों, मोबाइल फोन और कॉल डिटेल के आधार पर आरोपियों के संपर्क में रहे अन्य लोगों की पहचान की जा रही है।
क्या प्रश्नपत्र के बदले पैसों का लेन-देन हुआ था?
जांचकर्ताओं के अनुसार, यह पता लगाया जा रहा है कि प्रश्नपत्र के बदले किसी तरह का आर्थिक लेन-देन हुआ या नहीं। अभी तक इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
एसआईटी की जांच जारी है और पूछताछ के आधार पर और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। जांच एजेंसी लीक नेटवर्क के बड़े सरगनाओं तक पहुंचने की कोशिश में है।
राष्ट्र प्रेस
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