बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं पर सरकार सख्त: CM सम्राट चौधरी के निर्देश पर आयोगों को पारदर्शिता के कड़े आदेश
सारांश
मुख्य बातें
बिहार सरकार ने राज्य में आयोजित होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर अपर मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग, डॉ. बी. राजेंद्र ने 26 मई को राज्य के विभिन्न नियुक्ति एवं चयन आयोगों के अध्यक्षों, सचिवों और सदस्य सचिवों के साथ एक अहम समीक्षा बैठक की। इस बैठक में परीक्षा प्रणाली को और अधिक तकनीक-सक्षम, विश्वसनीय एवं अभ्यर्थी-हितैषी बनाने पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में कौन-कौन शामिल हुए
समीक्षा बैठक में बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC), बिहार तकनीकी सेवा आयोग तथा बिहार कर्मचारी चयन आयोग सहित अन्य नियुक्ति आयोगों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक का उद्देश्य आगामी परीक्षाओं की तैयारियों का जायज़ा लेना और संस्थागत कमज़ोरियों को दूर करने के लिए ठोस सुझाव जुटाना था।
आयोगों को क्या निर्देश दिए गए
डॉ. बी. राजेंद्र ने सभी आयोगों को स्पष्ट निर्देश दिए कि परीक्षाओं के संचालन में उच्चतम स्तर की पारदर्शिता, समयबद्धता एवं विश्वसनीयता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासनिक एवं तकनीकी तंत्र को और मज़बूत किया जाए ताकि अभ्यर्थियों को निष्पक्ष एवं सुचारु परीक्षा व्यवस्था मिल सके और उन्हें किसी प्रकार की परेशानी न हो।
तकनीक और सुधार पर ज़ोर
बैठक में आयोगों से महत्वपूर्ण सुझाव भी प्राप्त किए गए, जिन्हें आगामी परीक्षाओं में लागू करने की कोशिश की जाएगी। परीक्षा प्रक्रिया को तकनीक-सक्षम बनाने पर विशेष बल दिया गया। बैठक में प्राप्त सुझावों के आधार पर आवश्यक सुधारात्मक एवं संस्थागत कदम उठाए जाने पर सहमति बनी।
पृष्ठभूमि: पेपर लीक और विपक्ष का दबाव
गौरतलब है कि बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक सहित कई खामियाँ सामने आती रही हैं, जिन्हें लेकर विपक्ष सरकार को लगातार कटघरे में खड़ा करता रहा है। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर अभ्यर्थियों में भी असंतोष देखा गया है। सरकार का यह कदम उन्हीं आलोचनाओं के जवाब में उठाया गया प्रशासनिक प्रयास माना जा रहा है।
आगे क्या होगा
बैठक में तय हुए सुधारों को आगामी परीक्षाओं में लागू किया जाएगा। सरकार की मंशा है कि परीक्षा तंत्र को इस हद तक मज़बूत किया जाए कि अभ्यर्थियों का भरोसा बहाल हो और भविष्य में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।