8 जुलाई 2026
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नीट-यूजी 2026 पेपर लीक: सीबीआई ने 11वें आरोपी मनीषा हवलदार को पुणे से किया गिरफ्तार

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नीट-यूजी 2026 पेपर लीक: सीबीआई ने 11वें आरोपी मनीषा हवलदार को पुणे से किया गिरफ्तार

सारांश

नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई की जाँच का दायरा बढ़ता जा रहा है। पुणे की NTA-नियुक्त विशेषज्ञ मनीषा हवलदार की गिरफ्तारी के साथ आरोपियों की संख्या 11 पहुँची। दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र तक फैले इस नेटवर्क ने लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों के भविष्य को दाँव पर लगाया।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 22 मई 2026 को मनीषा संजय हवलदार को गिरफ्तार किया; नीट-यूजी 2026 लीक मामले में कुल गिरफ्तारियाँ 11 हुईं।
हवलदार पुणे के सेठ हिरालाल सराफ प्रशाला में कार्यरत थीं और NTA-नियुक्त विशेषज्ञ के रूप में फिजिक्स प्रश्न पत्रों तक उनकी पहुँच थी।
अप्रैल 2026 में उन्होंने कथित तौर पर फिजिक्स के प्रश्न सह-आरोपी मनीषा मंडारे को साझा किए, जो वास्तविक प्रश्न पत्र से मेल खाते पाए गए।
जाँच में दिल्ली, जयपुर, गुरुग्राम, नासिक, पुणे, लातूर और अहिल्यानगर से जुड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ।
सीबीआई ने मामला 12 मई 2026 को शिक्षा मंत्रालय की शिकायत पर दर्ज किया था।
बिचौलिए लाखों रुपये लेकर छात्रों को कथित 'विशेष कोचिंग' में शामिल करते थे जहाँ परीक्षा प्रश्न उपलब्ध कराए जाते थे।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने नीट-यूजी 2026 प्रश्न पत्र लीक मामले में 22 मई 2026 को एक और मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया, जिससे इस मामले में कुल गिरफ्तारियों की संख्या 11 हो गई है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान मनीषा संजय हवलदार के रूप में हुई है, जो पुणे, महाराष्ट्र स्थित सेठ हिरालाल सराफ प्रशाला में कार्यरत थीं।

आरोपी की भूमिका क्या थी

मनीषा हवलदार नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा नियुक्त विशेषज्ञ के रूप में परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी हुई थीं और उनकी फिजिक्स के प्रश्न पत्रों तक सीधी पहुँच थी। सीबीआई के अनुसार, अप्रैल 2026 में उन्होंने फिजिक्स विषय के कुछ प्रश्न सह-आरोपी मनीषा मंडारे को साझा किए थे, जिन्हें 16 मई को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। जाँच एजेंसी का दावा है कि साझा किए गए प्रश्न परीक्षा के वास्तविक प्रश्न पत्र से मेल खाते पाए गए हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

सीबीआई ने यह मामला 12 मई 2026 को शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की शिकायत के आधार पर दर्ज किया था, जिसमें नीट परीक्षा में पेपर लीक के गंभीर आरोप लगाए गए थे। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर के लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों की भविष्य की उम्मीदें इस परीक्षा से जुड़ी हैं।

देशव्यापी नेटवर्क का खुलासा

प्रारंभिक जाँच के बाद सीबीआई ने देशभर में कई स्थानों पर छापेमारी की, जिसमें लैपटॉप, मोबाइल फोन, बैंक दस्तावेज और अन्य सामग्री बरामद की गई। जब्त किए गए डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों की जाँच अभी जारी है। जाँच में दिल्ली, जयपुर, गुरुग्राम, नासिक, पुणे, लातूर और अहिल्यानगर से जुड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है।

बिचौलियों की भूमिका

सीबीआई के अनुसार, जाँच में यह भी सामने आया है कि कुछ बिचौलिए ऐसे छात्रों को जोड़ते थे जो लाखों रुपये देकर विशेष कोचिंग कक्षाओं में शामिल होते थे, जहाँ कथित तौर पर परीक्षा में आने वाले प्रश्न उपलब्ध कराए जाते थे। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब नीट परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हों — 2024 में भी इसी तरह के पेपर लीक विवाद ने देशव्यापी आंदोलन को जन्म दिया था।

जाँच की स्थिति और आगे की राह

सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि मामले की जाँच पूरी तरह निष्पक्ष और पेशेवर तरीके से आगे बढ़ाई जा रही है तथा पेपर लीक नेटवर्क के सभी स्तरों की पहचान की जा रही है। आलोचकों का कहना है कि NTA की परीक्षा प्रक्रिया में संरचनात्मक सुधारों के बिना केवल गिरफ्तारियाँ पर्याप्त नहीं होंगी। आने वाले हफ्तों में और गिरफ्तारियाँ और चार्जशीट दाखिल होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 2026 में फिर वही कहानी दोहराई गई। असली सवाल यह है कि परीक्षा प्रक्रिया में 'विशेषज्ञ' नियुक्ति की जाँच और जवाबदेही का तंत्र कहाँ था। केवल गिरफ्तारियाँ पर्याप्त नहीं हैं — जब तक NTA की संरचना में पारदर्शिता नहीं आती, देश के लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों का भरोसा बहाल नहीं होगा।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?
22 मई 2026 तक सीबीआई इस मामले में कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। ताज़ा गिरफ्तारी पुणे की NTA-नियुक्त विशेषज्ञ मनीषा संजय हवलदार की है।
मनीषा हवलदार कौन हैं और उन पर क्या आरोप है?
मनीषा हवलदार पुणे के सेठ हिरालाल सराफ प्रशाला में कार्यरत थीं और NTA द्वारा नियुक्त विशेषज्ञ के रूप में फिजिक्स प्रश्न पत्रों तक उनकी पहुँच थी। सीबीआई का आरोप है कि उन्होंने अप्रैल 2026 में सह-आरोपी मनीषा मंडारे को फिजिक्स के प्रश्न साझा किए, जो वास्तविक परीक्षा प्रश्न पत्र से मेल खाते पाए गए।
सीबीआई ने नीट पेपर लीक की जाँच कब और क्यों शुरू की?
सीबीआई ने 12 मई 2026 को शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की शिकायत के आधार पर यह मामला दर्ज किया। शिकायत में नीट-यूजी 2026 परीक्षा में पेपर लीक के गंभीर आरोप लगाए गए थे।
इस पेपर लीक नेटवर्क में कौन-कौन से शहर शामिल हैं?
सीबीआई की जाँच में दिल्ली, जयपुर, गुरुग्राम, नासिक, पुणे, लातूर और अहिल्यानगर से जुड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। बिचौलिए लाखों रुपये लेकर छात्रों को विशेष कोचिंग कक्षाओं में शामिल करते थे जहाँ कथित तौर पर परीक्षा प्रश्न उपलब्ध कराए जाते थे।
नीट 2026 पेपर लीक मामले में आगे क्या होगा?
सीबीआई ने कहा है कि जाँच निष्पक्ष और पेशेवर तरीके से जारी है और नेटवर्क के सभी स्तरों की पहचान की जा रही है। जब्त डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों की जाँच चल रही है और आने वाले हफ्तों में और गिरफ्तारियाँ तथा चार्जशीट दाखिल होने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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