12 अक्टूबर 2026
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एमपीएससी गड़बड़ियों की जांच को महाराष्ट्र सरकार ने बनाई 5 सदस्यीय समिति, तुकाराम मुंडे सचिव नियुक्त

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एमपीएससी गड़बड़ियों की जांच को महाराष्ट्र सरकार ने बनाई 5 सदस्यीय समिति, तुकाराम मुंडे सचिव नियुक्त

सारांश

पुणे में 10 दिनों से चल रहे एमपीएससी आंदोलन के बाद महाराष्ट्र सरकार हरकत में आई — सेवानिवृत्त न्यायाधीश दिलीप भोसले की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय जाँच समिति बनाई गई और तुकाराम मुंडे को सचिव नियुक्त किया गया। अध्यक्ष विवेक भीमनवार के भविष्य पर अनिश्चितता बरकरार है।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र सरकार ने 12 अक्टूबर 2026 को एमपीएससी गड़बड़ियों की जांच के लिए 5 सदस्यीय समिति गठित की।
समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायाधीश दिलीप भोसले करेंगे; वरिष्ठ आईएएस तुकाराम मुंडे सचिव नियुक्त।
उम्मीदवार पुणे के एसएम जोशी पुल पर 10 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों की माँगों में अगले 3 वर्षों में 70 हजार पदों पर भर्ती और अध्यक्ष विवेक भीमनवार को हटाना शामिल है।
एनसीपी (शरदचंद्र पवार) विधायक रोहित पाटील ने समिति में मुंडे की नियुक्ति का स्वागत किया।
भीमनवार के जाँच पूरी होने तक छुट्टी पर जाने की खबर है, लेकिन आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।

महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) में गड़बड़ियों और भर्ती प्रक्रिया सुधार की माँग को लेकर पिछले 10 दिनों से पुणे के एसएम जोशी पुल पर प्रदर्शन कर रहे उम्मीदवारों के आंदोलन के बीच महाराष्ट्र राज्य सरकार ने 12 अक्टूबर 2026 को एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने आयोग की कार्यप्रणाली की जांच और सुधार के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश दिलीप भोसले की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति गठित की है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंडे को इस समिति का सचिव नियुक्त किया गया है।

समिति की संरचना और जिम्मेदारी

गठित समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायाधीश दिलीप भोसले करेंगे। सचिव के रूप में तुकाराम मुंडे के अलावा, सदस्यों में लक्ष्मी गौतम, गणेश पाटील और सेवानिवृत्त न्यायाधीश पी. डी. नाइक को शामिल किया गया है। समिति से एमपीएससी की कार्यप्रणाली में अपेक्षित सुधारों और भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतों का विश्लेषण कर अनुशंसाएँ देने की उम्मीद है।

गौरतलब है कि समिति के गठन की जानकारी राज्य मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने रविवार को एसएम जोशी पुल पर प्रदर्शनकारी उम्मीदवारों से मुलाकात के दौरान दी। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि आंदोलनकारियों की अन्य माँगों पर भी ध्यान दिया जाएगा।

आंदोलनकारियों की प्रमुख माँगें

प्रदर्शनकारी उम्मीदवारों की माँगें केवल एमपीएससी की कार्यप्रणाली में सुधार तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने आंदोलन में शामिल कुछ प्रतिनिधियों के विरुद्ध दर्ज मामले वापस लेने की माँग रखी है। इसके अतिरिक्त, अगले तीन वर्षों में 70 हजार पदों पर भर्ती करने और जनवरी में प्रस्तावित ग्रुप-सी परीक्षा में पदों की संख्या बढ़ाने की भी माँग उठाई गई है।

उम्मीदवारों ने यह भी माँग की है कि एमपीएससी के अध्यक्ष और सचिव की नियुक्ति से पहले उनकी पृष्ठभूमि की जाँच सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियों की पुनरावृत्ति न हो।

अध्यक्ष भीमनवार पर अनिश्चितता बरकरार

आंदोलनकारी उम्मीदवारों की एक प्रमुख माँग एमपीएससी अध्यक्ष विवेक भीमनवार को पद से हटाने की रही है। हालाँकि, इस माँग पर सरकार का रुख अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार, समिति के गठन के बाद विवेक भीमनवार जाँच पूरी होने तक छुट्टी पर जा सकते हैं, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

एमपीएससी उम्मीदवारों के आंदोलन का समर्थन कर रहे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पाटील ने समिति में तुकाराम मुंडे को शामिल किए जाने का स्वागत किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि समिति को स्वतंत्र रूप से कार्य करने का पर्याप्त अवसर मिलेगा, ताकि जाँच निष्पक्ष और प्रभावी हो सके।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब सरकारी भर्ती पारदर्शिता को लेकर महाराष्ट्र ही नहीं, पूरे देश में युवाओं का असंतोष बढ़ रहा है। पाँच सदस्यीय समिति की अनुशंसाओं के आधार पर एमपीएससी की संरचना और प्रक्रियाओं में बदलाव की उम्मीद है। सरकार ने प्रदर्शनकारियों की शेष माँगों पर भी विचार का आश्वासन दिया है, जिससे आंदोलन की आगे की दिशा काफी हद तक समिति की कार्यवाही पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा समिति की स्वायत्तता और समयसीमा में होगी। अध्यक्ष भीमनवार को पद से न हटाने की अस्पष्टता यह संदेश देती है कि सरकार आंदोलन को शांत करना चाहती है, उसकी जड़ों को नहीं। देश में पिछले कुछ वर्षों में एमपीएससी जैसी कई राज्य लोक सेवा समितियाँ पेपर लीक और भर्ती घोटालों के आरोपों से जूझ रही हैं — ऐसे में महज एक जाँच समिति बना देना काफी नहीं होगा, जब तक कि इसकी अनुशंसाओं को बाध्यकारी और समयबद्ध क्रियान्वयन से न जोड़ा जाए।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमपीएससी जांच समिति में कौन-कौन शामिल हैं?
सेवानिवृत्त न्यायाधीश दिलीप भोसले समिति के अध्यक्ष हैं। इसके अन्य सदस्यों में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंडे (सचिव), लक्ष्मी गौतम, गणेश पाटील और सेवानिवृत्त न्यायाधीश पी. डी. नाइक शामिल हैं।
पुणे में एमपीएससी उम्मीदवार क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं?
उम्मीदवार महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार, अगले 3 वर्षों में 70 हजार पदों पर भर्ती, अध्यक्ष विवेक भीमनवार को हटाने और आंदोलनकारियों पर दर्ज मामले वापस लेने की माँग को लेकर पिछले 10 दिनों से पुणे के एसएम जोशी पुल पर धरना दे रहे हैं।
एमपीएससी अध्यक्ष विवेक भीमनवार को हटाया जाएगा?
सरकार ने अभी तक इस माँग पर कोई आधिकारिक निर्णय स्पष्ट नहीं किया है। रिपोर्टों के अनुसार भीमनवार जाँच पूरी होने तक छुट्टी पर जा सकते हैं, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
समिति का गठन एमपीएससी आंदोलन के लिए कितना महत्वपूर्ण है?
सरकार के इस फैसले को आंदोलनकारियों की माँगों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालाँकि, उम्मीदवारों की सभी माँगें अभी पूरी नहीं हुई हैं और समिति की अनुशंसाओं के क्रियान्वयन पर आंदोलन की आगे की दिशा निर्भर करेगी।
एनसीपी (शरदचंद्र पवार) का इस मामले में क्या रुख है?
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पाटील उम्मीदवारों के आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने समिति में तुकाराम मुंडे की नियुक्ति का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि समिति को स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर दिया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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