एमपीएससी आंदोलन: सचिव हरपलकर हटाए गए, एकनाथ शिंदे बोले — अध्यक्ष पर भी होगा फैसला
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) की परीक्षाओं में पारदर्शिता और मेरिट की माँग को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज़ होने के बाद महाराष्ट्र सरकार ने 5 अक्टूबर 2026 को कड़ा रुख अपनाते हुए एमपीएससी सचिव हरपलकर को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने स्पष्ट किया कि छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जो भी गड़बड़ी हुई है, उसे सुधारा जाएगा।
मुख्य घटनाक्रम
पत्रकारों से बातचीत में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा, 'हमारे विधायक और सांसद खुद जाकर आंदोलन कर रहे छात्रों से मिले हैं और उनका ज्ञापन लिया है। ओमराजे के क्षेत्र के भी कुछ छात्र उनसे मिले थे। यह छात्रों का आंदोलन है और सरकार इस मामले को सकारात्मकता से देख रही है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सचिव को पद से अलग कर दिया है।
एमपीएससी सचिव के पद पर तैनात हरपलकर को हटाना सरकार की पहली ठोस प्रतिक्रिया है। गौरतलब है कि छात्रों का आंदोलन कई दिनों से जारी था और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की माँग लगातार उठाई जा रही थी।
सरकार की प्रतिक्रिया
शिंदे ने कहा, 'मैं तो कह रहा हूँ कि इसमें पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए। परीक्षा में आखिर विद्यार्थियों के भविष्य का सवाल है। मेरिट होना चाहिए। इसमें कोई भी गैर-व्यवहार नहीं होना चाहिए। विद्यार्थियों के जीवन के साथ किसी को भी खेलने का अधिकार नहीं है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अध्यक्ष पर फैसले की तैयारी
छात्र संगठनों की एमपीएससी अध्यक्ष को हटाने की माँग पर भी सरकार सक्रिय है। उपमुख्यमंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री ने इस माँग को गंभीरता से लिया है और राज्यपाल से इस संबंध में चर्चा जारी है। शिंदे ने कहा, 'ये संवैधानिक पद होने की वजह से इस बारे में जो भी प्रक्रिया है, वो मुख्यमंत्री ने भी गंभीरता से ली है, इसलिए उस पर भी सही निर्णय होगा।' यह ऐसे समय में आया है जब एमपीएससी परीक्षाओं पर छात्रों का विश्वास डगमगाया हुआ है।
आम छात्रों पर असर
एमपीएससी परीक्षाएँ महाराष्ट्र में राज्य सेवा में प्रवेश का प्रमुख द्वार हैं और लाखों युवा इनकी तैयारी में वर्षों लगाते हैं। पारदर्शिता की कमी के आरोपों ने न केवल परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि उन छात्रों की मेहनत पर भी सवाल उठाए हैं जो वर्षों से इन परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।
क्या होगा आगे
सरकार का स्पष्ट संकेत है कि एमपीएससी में संरचनात्मक बदलाव की दिशा में कदम उठाए जाएँगे। अध्यक्ष के पद पर फैसला संवैधानिक प्रक्रिया के तहत राज्यपाल के साथ विचार-विमर्श के बाद लिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया में ठोस सुधार नहीं हुए, तो छात्र आंदोलन और तेज़ हो सकता है।