एमपीएससी सचिव हरपालकर की प्रतिनियुक्ति समाप्त, CM फडणवीस के आश्वासन के बाद महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने 2 अक्टूबर 2026 को एमपीएससी सचिव महेंद्र उत्तमराव हरपालकर की प्रतिनियुक्ति समय से पहले समाप्त करने का आधिकारिक आदेश जारी किया। यह कदम मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और विरोध प्रदर्शन कर रहे एमपीएससी उम्मीदवारों के प्रतिनिधिमंडल के बीच उच्च स्तरीय बैठक के दो दिन बाद उठाया गया है। पुणे में परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों पर उम्मीदवार लंबे समय से आंदोलनरत हैं।
आदेश की मुख्य बातें
जीएडी द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि हरपालकर की प्रतिनियुक्ति 'प्रशासनिक कारणों' से तत्काल प्रभाव से समाप्त की जा रही है। हरपालकर संयुक्त सचिव कैडर के अधिकारी हैं, जिन्हें मूल रूप से दिसंबर 2025 में दो साल के लिए एमपीएससी में प्रतिनियुक्त किया गया था। उनका कार्यकाल अब निर्धारित अवधि से पहले काट दिया गया है।
आदेश के अनुसार, हरपालकर को एमपीएससी अध्यक्ष की सहमति से तत्काल एक नामित अधिकारी को कार्यभार सौंपना होगा। राज्य सरकार की ओर से उनके अगले कार्यभार के संबंध में अलग से प्रशासनिक आदेश शीघ्र जारी किए जाने की बात कही गई है।
विरोध प्रदर्शन की पृष्ठभूमि
एमपीएससी उम्मीदवार पुणे में कथित परीक्षा पेपर लीक और परिचालन अनियमितताओं को लेकर महीनों से सड़कों पर हैं। उनकी मुख्य माँग एमपीएससी अध्यक्ष विवेक भीमनवार का तत्काल इस्तीफा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई रही है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान एमपीएससी सचिव का तत्काल तबादला कर पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया था।
हालाँकि, फडणवीस ने यह भी स्पष्ट किया कि एमपीएससी अध्यक्ष के इस्तीफे की माँग न तो कानूनी रूप से उचित है और न ही न्यायसंगत — यह विरोधियों के लिए एक राजनीतिक फाँसुला बना हुआ है।
सरकार के अतिरिक्त उपाय
सचिव के तबादले के साथ-साथ राज्य सरकार ने कई अन्य कदम उठाने की घोषणा की। एमपीएससी पदाधिकारियों और सदस्यों के कामकाज की न्यायिक जाँच का आदेश दिया गया है। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि भर्ती परीक्षाएँ परंपरागत ऑफलाइन प्रारूप में ही जारी रहेंगी — ऑनलाइन परीक्षा की किसी भी संभावना को खारिज करते हुए। इन घोषणाओं के बाद छात्र संगठनों ने अपना नियोजित आंदोलन अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया।
विपक्ष की प्रतिक्रिया और आंदोलन की स्थिति
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार (एनसीपी-एसपी) के विधायक रोहित पवार पुणे में उम्मीदवारों के साथ सत्याग्रह पर बैठे हैं। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि 'एमपीएससी सचिव महेंद्र हरपालकर का बहुप्रतीक्षित तबादला आखिरकार हो गया है — इसके लिए सरकार का आभार! अब सिर्फ एक ही मुख्य मुद्दा बचा है, और वो है भ्रष्ट अध्यक्षों को हटाना..! सरकार को अपना अहंकार छोड़कर छात्रों की वास्तविक भावनाओं को समझना चाहिए और अध्यक्ष भीमनवार को तुरंत पद से हटाना चाहिए।'
भीड़ को संबोधित करते हुए रोहित पवार ने घोषणा की — 'हमने छात्रों के साथ मिलकर यह सत्याग्रह शुरू किया है और हम उनका इस्तीफा हासिल किए बिना पीछे नहीं हटेंगे।' एनसीपी-एसपी सांसद सुप्रिया सुले ने भी विरोध स्थल का दौरा किया और उम्मीदवारों से संवाद किया। शिवसेना-यूबीटी सांसद संजय राउत के भी शुक्रवार शाम विरोध स्थल पर पहुँचने की खबर थी।
आगे क्या होगा
राज्य सरकार ने न्यायिक जाँच का आदेश दे दिया है, लेकिन एमपीएससी अध्यक्ष भीमनवार अभी भी पद पर बने हुए हैं। उम्मीदवारों और विपक्ष का सत्याग्रह जारी है, जो आंदोलन को तब तक न रोकने पर अड़े हैं जब तक अध्यक्ष का इस्तीफा नहीं हो जाता। यह देखना बाकी है कि न्यायिक जाँच की समयसीमा और दायरा क्या होगा — और क्या सरकार उम्मीदवारों की शेष माँगों को स्वीकार करेगी।