2 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

एमपीएससी सचिव हरपालकर की प्रतिनियुक्ति समाप्त, CM फडणवीस के आश्वासन के बाद महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
एमपीएससी सचिव हरपालकर की प्रतिनियुक्ति समाप्त, CM फडणवीस के आश्वासन के बाद महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला

सारांश

परीक्षा अनियमितताओं पर उम्मीदवारों के तीखे विरोध के बाद महाराष्ट्र सरकार ने एमपीएससी सचिव हरपालकर को हटाया और न्यायिक जाँच का आदेश दिया। लेकिन अध्यक्ष भीमनवार का पद बचा रहा — और रोहित पवार के नेतृत्व में आंदोलन जारी है।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र जीएडी ने 2 अक्टूबर 2026 को एमपीएससी सचिव महेंद्र हरपालकर की प्रतिनियुक्ति प्रशासनिक कारणों से तत्काल प्रभाव से समाप्त की।
हरपालकर को दिसंबर 2025 में दो साल के लिए प्रतिनियुक्त किया गया था, लेकिन उनका कार्यकाल समय से पहले काटा गया।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने उम्मीदवारों को एमपीएससी पदाधिकारियों के कामकाज की न्यायिक जाँच और ऑफलाइन परीक्षा जारी रखने का आश्वासन दिया।
एमपीएससी अध्यक्ष विवेक भीमनवार का इस्तीफा नहीं हुआ; सरकार ने इसे कानूनी रूप से अनुचित बताया।
एनसीपी-एसपी विधायक रोहित पवार पुणे में सत्याग्रह पर बैठे, सुप्रिया सुले व संजय राउत ने भी विरोध स्थल का दौरा किया।
छात्र संगठनों ने नियोजित आंदोलन अस्थायी रूप से स्थगित किया, लेकिन अध्यक्ष के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी।

महाराष्ट्र सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने 2 अक्टूबर 2026 को एमपीएससी सचिव महेंद्र उत्तमराव हरपालकर की प्रतिनियुक्ति समय से पहले समाप्त करने का आधिकारिक आदेश जारी किया। यह कदम मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और विरोध प्रदर्शन कर रहे एमपीएससी उम्मीदवारों के प्रतिनिधिमंडल के बीच उच्च स्तरीय बैठक के दो दिन बाद उठाया गया है। पुणे में परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों पर उम्मीदवार लंबे समय से आंदोलनरत हैं।

आदेश की मुख्य बातें

जीएडी द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि हरपालकर की प्रतिनियुक्ति 'प्रशासनिक कारणों' से तत्काल प्रभाव से समाप्त की जा रही है। हरपालकर संयुक्त सचिव कैडर के अधिकारी हैं, जिन्हें मूल रूप से दिसंबर 2025 में दो साल के लिए एमपीएससी में प्रतिनियुक्त किया गया था। उनका कार्यकाल अब निर्धारित अवधि से पहले काट दिया गया है।

आदेश के अनुसार, हरपालकर को एमपीएससी अध्यक्ष की सहमति से तत्काल एक नामित अधिकारी को कार्यभार सौंपना होगा। राज्य सरकार की ओर से उनके अगले कार्यभार के संबंध में अलग से प्रशासनिक आदेश शीघ्र जारी किए जाने की बात कही गई है।

विरोध प्रदर्शन की पृष्ठभूमि

एमपीएससी उम्मीदवार पुणे में कथित परीक्षा पेपर लीक और परिचालन अनियमितताओं को लेकर महीनों से सड़कों पर हैं। उनकी मुख्य माँग एमपीएससी अध्यक्ष विवेक भीमनवार का तत्काल इस्तीफा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई रही है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान एमपीएससी सचिव का तत्काल तबादला कर पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया था।

हालाँकि, फडणवीस ने यह भी स्पष्ट किया कि एमपीएससी अध्यक्ष के इस्तीफे की माँग न तो कानूनी रूप से उचित है और न ही न्यायसंगत — यह विरोधियों के लिए एक राजनीतिक फाँसुला बना हुआ है।

सरकार के अतिरिक्त उपाय

सचिव के तबादले के साथ-साथ राज्य सरकार ने कई अन्य कदम उठाने की घोषणा की। एमपीएससी पदाधिकारियों और सदस्यों के कामकाज की न्यायिक जाँच का आदेश दिया गया है। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि भर्ती परीक्षाएँ परंपरागत ऑफलाइन प्रारूप में ही जारी रहेंगी — ऑनलाइन परीक्षा की किसी भी संभावना को खारिज करते हुए। इन घोषणाओं के बाद छात्र संगठनों ने अपना नियोजित आंदोलन अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया।

विपक्ष की प्रतिक्रिया और आंदोलन की स्थिति

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार (एनसीपी-एसपी) के विधायक रोहित पवार पुणे में उम्मीदवारों के साथ सत्याग्रह पर बैठे हैं। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि 'एमपीएससी सचिव महेंद्र हरपालकर का बहुप्रतीक्षित तबादला आखिरकार हो गया है — इसके लिए सरकार का आभार! अब सिर्फ एक ही मुख्य मुद्दा बचा है, और वो है भ्रष्ट अध्यक्षों को हटाना..! सरकार को अपना अहंकार छोड़कर छात्रों की वास्तविक भावनाओं को समझना चाहिए और अध्यक्ष भीमनवार को तुरंत पद से हटाना चाहिए।'

भीड़ को संबोधित करते हुए रोहित पवार ने घोषणा की — 'हमने छात्रों के साथ मिलकर यह सत्याग्रह शुरू किया है और हम उनका इस्तीफा हासिल किए बिना पीछे नहीं हटेंगे।' एनसीपी-एसपी सांसद सुप्रिया सुले ने भी विरोध स्थल का दौरा किया और उम्मीदवारों से संवाद किया। शिवसेना-यूबीटी सांसद संजय राउत के भी शुक्रवार शाम विरोध स्थल पर पहुँचने की खबर थी।

आगे क्या होगा

राज्य सरकार ने न्यायिक जाँच का आदेश दे दिया है, लेकिन एमपीएससी अध्यक्ष भीमनवार अभी भी पद पर बने हुए हैं। उम्मीदवारों और विपक्ष का सत्याग्रह जारी है, जो आंदोलन को तब तक न रोकने पर अड़े हैं जब तक अध्यक्ष का इस्तीफा नहीं हो जाता। यह देखना बाकी है कि न्यायिक जाँच की समयसीमा और दायरा क्या होगा — और क्या सरकार उम्मीदवारों की शेष माँगों को स्वीकार करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मूल माँग पूरी करने के लिए नहीं। अध्यक्ष भीमनवार का बने रहना बताता है कि सरकार विरोधियों को नैतिक जीत नहीं देना चाहती, भले ही संस्थागत भरोसे का सवाल अनुत्तरित रहे। न्यायिक जाँच का आदेश एक परिचित सरकारी औजार है — इसकी विश्वसनीयता जाँचकर्ता की स्वतंत्रता और समयसीमा पर टिकी होगी, जो अभी अस्पष्ट है। गहरा सवाल यह है: क्या एमपीएससी की संरचनात्मक कमज़ोरियाँ — जो बार-बार पेपर लीक के आरोपों में सामने आती हैं — एक सचिव के तबादले से दूर होंगी?
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमपीएससी सचिव महेंद्र हरपालकर की प्रतिनियुक्ति क्यों समाप्त की गई?
महाराष्ट्र जीएडी ने 2 अक्टूबर 2026 को 'प्रशासनिक कारणों' का हवाला देते हुए उनकी प्रतिनियुक्ति समाप्त की। यह कदम मुख्यमंत्री फडणवीस द्वारा विरोध कर रहे एमपीएससी उम्मीदवारों को पारदर्शी जाँच का आश्वासन देने के बाद उठाया गया।
एमपीएससी उम्मीदवार किस बात का विरोध कर रहे हैं?
उम्मीदवार कथित परीक्षा पेपर लीक और परिचालन अनियमितताओं के लिए जवाबदेही की माँग कर रहे हैं। उनकी मुख्य माँग एमपीएससी अध्यक्ष विवेक भीमनवार का तत्काल इस्तीफा है।
क्या एमपीएससी अध्यक्ष विवेक भीमनवार ने इस्तीफा दिया?
नहीं। मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि एमपीएससी अध्यक्ष के इस्तीफे की माँग न तो कानूनी रूप से उचित है और न ही न्यायसंगत। भीमनवार 2 अक्टूबर 2026 तक अपने पद पर बने हुए हैं।
महाराष्ट्र सरकार ने एमपीएससी उम्मीदवारों की चिंताओं को दूर करने के लिए और क्या उपाय किए?
सरकार ने एमपीएससी पदाधिकारियों और सदस्यों के कामकाज की न्यायिक जाँच का आदेश दिया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि भर्ती परीक्षाएँ परंपरागत ऑफलाइन प्रारूप में जारी रहेंगी।
एनसीपी-एसपी विधायक रोहित पवार इस मुद्दे पर क्या कह रहे हैं?
रोहित पवार पुणे में एमपीएससी उम्मीदवारों के साथ सत्याग्रह पर बैठे हैं और अध्यक्ष भीमनवार का इस्तीफा हासिल किए बिना आंदोलन न रोकने की घोषणा कर चुके हैं। उन्होंने हरपालकर के तबादले का स्वागत किया, लेकिन कहा कि अध्यक्ष को हटाना अभी भी सबसे बड़ी लंबित माँग है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 दिन पहले
  2. 4 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 2 महीने पहले