5 अक्टूबर 2026
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एमपीएससी आंदोलन: रोहित पवार का 48 घंटे का अल्टीमेटम, मांगें नहीं मानी तो पुणे बंद या मंत्रालय मार्च

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एमपीएससी आंदोलन: रोहित पवार का 48 घंटे का अल्टीमेटम, मांगें नहीं मानी तो पुणे बंद या मंत्रालय मार्च

सारांश

पाँच दिन से उबल रहे एमपीएससी आंदोलन में रोहित पवार ने महाराष्ट्र सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम दे दिया है — चेयरमैन भीमन्वार की बर्खास्तगी हो या फिर 1,00,000 छात्र पुणे को ठप कर देंगे। राहुल गांधी के 7-8 अक्टूबर को पुणे आने की संभावना ने इस आंदोलन को राष्ट्रीय राजनीतिक रंग दे दिया है।

मुख्य बातें

एमपीएससी अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन 5 अक्टूबर 2026 को लगातार पाँचवें दिन पुणे में जारी रहा।
विधायक रोहित पवार ने महाराष्ट्र सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया — माँगें नहीं मानी तो पुणे बंद या मंत्रालय मार्च ।
प्रमुख माँग: एमपीएससी चेयरमैन विवेक भीमन्वार की तत्काल बर्खास्तगी और आयोग की भर्ती प्रक्रियाओं की पूर्ण ऑडिट।
रोहित पवार के अनुसार 1,00,000 से अधिक छात्र पुणे की सड़कों पर उतरने को तैयार हैं।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 7 या 8 अक्टूबर को प्रदर्शनकारियों से मिलने की संभावना।
भाजपा मंत्री नितेश राणे की बातचीत की अपील को रोहित पवार ने राजनीतिक ध्यान भटकाने की कोशिश बताकर खारिज किया।

महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) परीक्षा अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन 5 अक्टूबर 2026, सोमवार को लगातार पाँचवें दिन भी पुणे में जारी रहा। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने महाराष्ट्र सरकार को 48 घंटे का कड़ा अल्टीमेटम दिया है — या तो मांगें मानो, या 1,00,000 से अधिक छात्र सड़कों पर उतरकर पुणे बंद करवाएंगे अथवा सीधे मुंबई के मंत्रालय तक मार्च निकालेंगे। एमपीएससी के हालिया पेपर लीक और पारदर्शिता की कमी ने इस आंदोलन को भड़काया है।

मुख्य माँगें और अल्टीमेटम

रोहित पवार ने सरकार के सामने सबसे अहम माँग रखी है कि एमपीएससी के चेयरमैन विवेक भीमन्वार को तत्काल पद से हटाया जाए। इसके अलावा आयोग की भर्ती प्रक्रियाओं की पूरी तरह से ऑडिट और सफाई की माँग भी की गई है। पवार ने कहा कि इस आंदोलन की जड़ में परीक्षा बोर्ड में फैला व्यवस्थित भ्रष्टाचार है, जो लाखों युवाओं के भविष्य को दाँव पर लगा रहा है।

रोहित पवार ने स्पष्ट किया, 'हम सरकार को दो दिन का अल्टीमेटम दे रहे हैं। हमारा अनुमान है कि उस दिन पुणे की सड़कों पर लगभग 1,00,000 छात्र होंगे। ये छात्र या तो पुणे बंद का आह्वान करेंगे या सीधे मुंबई में मंत्रालय तक मार्च करेंगे।'

राहुल गांधी के दौरे की संभावना

रोहित पवार ने यह भी जानकारी दी कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 7 या 8 अक्टूबर को प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों से मिलने की संभावना है। उन्होंने कहा कि उस दिन पुणे की सड़कों पर छात्रों की भारी उपस्थिति अपनी ताकत का प्रदर्शन करेगी। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल इस मुद्दे को राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाने की कोशिश में हैं।

पवार ने सीजेपी के अभिजीत दिपके की अपील का हवाला देते हुए कहा कि पुणे के नागरिकों को इन छात्रों का समर्थन करना चाहिए और निर्णय अभ्यर्थी व उनके माता-पिता मिलकर लेंगे।

भाजपा मंत्री की प्रतिक्रिया और रोहित पवार का पलटवार

भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता और राज्य मंत्री नितेश राणे ने रोहित पवार से अपील की कि वे छात्रों के मुद्दों को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल न करें। राणे ने कहा, 'यह कोई राजनीतिक मंच नहीं है, यह छात्रों के भविष्य का सवाल है। रोहित पवार मेरे दोस्त हैं। कल, वे सरकार में मेरे साथ कैबिनेट मंत्री भी हो सकते हैं।'

राणे ने दोनों पक्षों से मिलकर रचनात्मक रूप से काम करने की अपील की और कहा कि विरोध जारी रह सकता है, लेकिन छात्रों को बंधक नहीं बनाया जाना चाहिए।

हालाँकि रोहित पवार ने राणे की इस पेशकश को राजनीतिक ध्यान भटकाने की कोशिश बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया। पवार ने कहा, 'मुझे कैबिनेट में जगह देने के बजाय, उन्हें छात्रों के साथ बैठकर उनके मुद्दों का समाधान करना चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन के खिलाफ बढ़ते जन-आक्रोश से मंत्री घबराए हुए लग रहे हैं।

आम जनता और अभ्यर्थियों पर असर

एमपीएससी की तैयारी करने वाले लाखों युवाओं के लिए यह आंदोलन सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि अपने भविष्य की लड़ाई है। पेपर लीक की घटनाओं ने परीक्षा की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। गौरतलब है कि एमपीएससी महाराष्ट्र में राज्य सेवाओं के लिए अधिकारियों की भर्ती का प्रमुख माध्यम है और इसकी परीक्षा में हर साल लाखों अभ्यर्थी बैठते हैं।

यदि पुणे बंद का आह्वान किया जाता है, तो इसका असर व्यापारिक प्रतिष्ठानों, परिवहन और आम नागरिकों की दिनचर्या पर पड़ सकता है। आने वाले 48 घंटे इस आंदोलन की दिशा तय करने में निर्णायक साबित होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

या केवल चेयरमैन की कुर्बानी देकर मूल समस्या से बच निकलेगी। महाराष्ट्र में प्रतियोगी परीक्षाओं में भ्रष्टाचार के आरोप नए नहीं हैं, लेकिन हर बार जाँच की घोषणा के बाद जवाबदेही अधूरी रह जाती है — यही पैटर्न इस आंदोलन की असली ताकत है।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमपीएससी आंदोलन क्या है और यह क्यों शुरू हुआ?
एमपीएससी आंदोलन महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की परीक्षा तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन है, जो पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी के कारण शुरू हुआ। यह प्रदर्शन 5 अक्टूबर 2026 को पाँचवें दिन भी पुणे में जारी रहा।
रोहित पवार ने सरकार को क्या अल्टीमेटम दिया है?
विधायक रोहित पवार ने महाराष्ट्र सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है कि वह एमपीएससी चेयरमैन विवेक भीमन्वार को तत्काल हटाए और भर्ती प्रक्रियाओं की पूर्ण ऑडिट कराए। माँगें पूरी न होने पर 1,00,000 से अधिक छात्र पुणे बंद या मुंबई मंत्रालय मार्च करेंगे।
एमपीएससी के चेयरमैन विवेक भीमन्वार को हटाने की माँग क्यों हो रही है?
रोहित पवार के अनुसार हाल ही में हुए पेपर लीक और परीक्षा बोर्ड में व्यवस्थित भ्रष्टाचार के लिए चेयरमैन विवेक भीमन्वार को जिम्मेदार माना जा रहा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि पारदर्शिता की कमी से लाखों युवाओं का भविष्य खतरे में पड़ गया है।
राहुल गांधी के पुणे दौरे की क्या संभावना है?
रोहित पवार ने जानकारी दी कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 7 या 8 अक्टूबर 2026 को प्रदर्शनकारी एमपीएससी अभ्यर्थियों से मिलने की संभावना है। उस दिन पुणे की सड़कों पर बड़ी संख्या में छात्रों के जुटने का अनुमान है।
भाजपा मंत्री नितेश राणे ने इस मुद्दे पर क्या कहा?
भाजपा नेता और राज्य मंत्री नितेश राणे ने रोहित पवार से अपील की कि वे छात्रों को राजनीतिक बंधक न बनाएं और दोनों पक्ष मिलकर रचनात्मक समाधान निकालें। हालाँकि रोहित पवार ने इस अपील को राजनीतिक ध्यान भटकाने की कोशिश बताकर खारिज कर दिया।
राष्ट्र प्रेस
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