6 अक्टूबर 2026
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MPSC पारदर्शिता आंदोलन: मनोज जरांगे पाटिल की चेतावनी — 'मांगें नहीं मानी तो महाराष्ट्र बंद'

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MPSC पारदर्शिता आंदोलन: मनोज जरांगे पाटिल की चेतावनी — 'मांगें नहीं मानी तो महाराष्ट्र बंद'

सारांश

पुणे में MPSC पारदर्शिता को लेकर छात्रों का आंदोलन अब नया मोड़ ले चुका है — मराठा आरक्षण आंदोलनकारी मनोज जरांगे पाटिल मैदान में उतरे और सरकार को सीधी चेतावनी दी कि माँगें नहीं मानी गईं तो पूरा महाराष्ट्र बंद होगा। जाति से परे न्याय की यह आवाज़ राजनीतिक दलों को भी आईना दिखा रही है।

मुख्य बातें

मनोज जरांगे पाटिल ने 6 अक्टूबर 2026 को पुणे के छात्र आंदोलन में शामिल होकर सरकार को महाराष्ट्र बंद की चेतावनी दी।
MPSC अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की माँग को लेकर पुणे में छात्र आंदोलन जारी है।
आंदोलन का नेतृत्व NCP-शरदचंद्र पवार के विधायक रोहित पवार कर रहे हैं; छात्रों का एक हिस्सा अनशन पर है।
जरांगे पाटिल ने आंदोलन को 'जाति से परे' बताया और कहा कि किसानों के बच्चों के साथ हुए अन्याय के खिलाफ वे खड़े हैं।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से तत्काल हस्तक्षेप और सभी आंदोलन स्थलों पर सरकारी प्रतिनिधिमंडल भेजने की माँग की गई।

मराठा आरक्षण आंदोलनकारी मनोज जरांगे पाटिल ने 6 अक्टूबर 2026 को पुणे में चल रहे छात्र आंदोलन में शिरकत करते हुए महाराष्ट्र सरकार को कड़ी चेतावनी दी कि यदि विद्यार्थियों की मांगें नहीं मानी गईं तो वे पूरे महाराष्ट्र बंद का आह्वान करेंगे। महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (MPSC) के अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की माँग को लेकर यह आंदोलन पुणे में कई दिनों से जारी है।

मुख्य घटनाक्रम

आंदोलन का जमीनी नेतृत्व राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार कर रहे हैं। जरांगे पाटिल उन छात्रों के बीच पहुँचे जो अनशन पर बैठे हैं और उन्होंने सरकार पर घमंड में रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'बच्चों, अगर इन लोगों ने आपकी बात नहीं सुनी तो यहाँ बैठे सभी नेताओं से भी कहता हूँ और आपसे भी कहता हूँ, आपके लिए पूरा महाराष्ट्र बंद कर देंगे। इन्हें क्या हो गया है, इन्हें घमंड हो गया है।'

जरांगे पाटिल का संदेश: जाति से परे है यह लड़ाई

जरांगे पाटिल ने स्पष्ट किया कि उनका इस आंदोलन में शामिल होना जातिगत राजनीति से नहीं, बल्कि किसान परिवारों के सपनों से जुड़ा है। उन्होंने कहा, 'आपके साथ हुआ अन्याय जाति से परे है। अगर मैं जातिवादी होता तो यहाँ नहीं आता। यहाँ महाराष्ट्र के किसानों के बच्चे बैठे हैं और मैं किसान का बेटा बनकर आया हूँ, जाति के नाम पर नहीं।' उन्होंने जोर देकर कहा कि मराठा आरक्षण की माँग और छात्रों की लड़ाई दोनों एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब मराठा आरक्षण आंदोलन को लेकर सरकार और जरांगे पाटिल के बीच पहले से तनाव बना हुआ है। छात्र आंदोलन में शामिल होकर वे अपनी जनाधार को व्यापक करने की कोशिश कर रहे हैं।

सरकार पर सवाल: 'राजनीतिक रंग क्यों दे रहे हो?'

छात्र आंदोलन को राजनीतिक बताने की सरकारी कोशिशों पर जरांगे पाटिल ने पलटवार किया। उन्होंने कहा, 'रोहित दादा राजनीतिक नेतृत्व करते हैं, इस पर किसी को संदेह है तो राज्य सरकार मुझे इसका जवाब दे। इससे पहले MPSC में दो साल की अवधि बढ़ाने की माँग को लेकर आंदोलन हुआ था — क्या वह राजनीतिक था? फिर यह आंदोलन राजनीतिक कैसे हुआ? आज बच्चे अनशन पर बैठे हैं — उनकी जान का क्या? उनके सवालों का क्या?'

गौरतलब है कि सरकार के मंत्री और विधायक एक आंदोलन स्थल की ओर तो गए, लेकिन दूसरे आंदोलन की ओर सरकारी प्रतिनिधिमंडल नहीं पहुँचा — इस विरोधाभास को जरांगे पाटिल ने भी उठाया।

मुख्यमंत्री फडणवीस पर निशाना

पत्रकारों से बातचीत में जरांगे पाटिल ने कहा कि छात्रों को न्याय मिलना चाहिए और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को इस मसले पर जवाब देना होगा। उन्होंने कहा, 'गृहमंत्री के तौर पर उन्हें विद्यार्थियों का दिल जीतने का काम करना चाहिए।' उन्होंने मुख्यमंत्री से सभी आंदोलन स्थलों पर तुरंत ध्यान देने और माँगें पूरी करने की अपील की।

छात्रों से एकजुटता की अपील

आंदोलन तीन अलग-अलग गुटों में बँटा होने के सवाल पर जरांगे पाटिल ने कहा, 'न कांग्रेस आपकी है, न राष्ट्रवादी आपकी है, न भाजपा आपकी है, न शिवसेना आपकी है — हमारे असली हीरो हमारे माता-पिता हैं, जो मेहनत करके हमें पढ़ाते हैं।' उन्होंने छात्रों से एकजुट होकर आंदोलन जारी रखने की अपील की और कहा कि चाहे आंदोलन एक जगह हो या तीन, न्याय छात्रों को ही मिलना चाहिए।

अब सभी की नज़रें मुख्यमंत्री फडणवीस की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं — क्या सरकार MPSC अध्यक्ष के इस्तीफे और पारदर्शिता की माँगों पर कोई ठोस कदम उठाएगी, या फिर आंदोलन और उग्र होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

यानी छात्र मुद्दों पर यह उनकी पहली दखलंदाज़ी नहीं। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक रही है वह यह है कि सरकार का एक आंदोलन पर जाना और दूसरे को नज़रअंदाज़ करना — यह विरोधाभास आंदोलन को और धार दे रहा है और फडणवीस सरकार के लिए प्रबंधन की चुनौती बढ़ा रहा है। महाराष्ट्र बंद की धमकी सिर्फ दबाव की रणनीति नहीं, बल्कि यह संकेत भी है कि अगर छात्र मुद्दे अनसुने रहे तो आगामी राजनीतिक समीकरण और पेचीदा हो सकते हैं।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

MPSC छात्र आंदोलन में मनोज जरांगे पाटिल की क्या भूमिका है?
मनोज जरांगे पाटिल मराठा आरक्षण आंदोलनकारी हैं, जो 6 अक्टूबर 2026 को पुणे में MPSC पारदर्शिता की माँग कर रहे छात्रों के बीच पहुँचे और सरकार को महाराष्ट्र बंद की चेतावनी दी। उन्होंने इस आंदोलन को जाति से परे किसानों के बच्चों की लड़ाई बताया।
MPSC आंदोलन में छात्र क्या माँग कर रहे हैं?
छात्र महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (MPSC) के अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की माँग कर रहे हैं। कुछ छात्र अनशन पर भी बैठे हैं।
महाराष्ट्र बंद की चेतावनी कब और किसने दी?
6 अक्टूबर 2026 को पुणे में जरांगे पाटिल ने सरकार को यह चेतावनी दी कि यदि छात्रों की माँगें नहीं मानी गईं तो वे पूरे महाराष्ट्र बंद का आह्वान करेंगे। उन्होंने यह बात छात्रों और नेताओं दोनों के सामने कही।
इस आंदोलन का नेतृत्व कौन कर रहा है?
आंदोलन का जमीनी नेतृत्व NCP-शरदचंद्र पवार के विधायक रोहित पवार कर रहे हैं। मनोज जरांगे पाटिल ने भी आंदोलन में शामिल होकर समर्थन दिया है। आंदोलन तीन अलग-अलग गुटों में चल रहा है।
मुख्यमंत्री फडणवीस से क्या माँग की गई है?
जरांगे पाटिल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से माँग की है कि वे सभी आंदोलन स्थलों पर तत्काल ध्यान दें, छात्रों की माँगें पूरी करें और सरकारी प्रतिनिधिमंडल सभी जगह भेजें। उन्होंने कहा कि फडणवीस को गृहमंत्री की भूमिका में विद्यार्थियों का विश्वास जीतना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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