पुणे में MPSC छात्र आंदोलन तेज: रोहित पवार का दावा — सोमवार तक 70 हज़ार छात्र जुटेंगे, राहुल गांधी आ सकते हैं
सारांश
मुख्य बातें
पुणे में एमपीएससी (MPSC) परीक्षार्थियों का अनशन और सत्याग्रह 4 अक्टूबर 2026 को दूसरे दिन भी जारी रहा और इसकी तीव्रता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने दावा किया कि 1 अक्टूबर को महज 3,500 छात्रों से शुरू हुआ यह आंदोलन सोमवार तक 70 हज़ार प्रतिभागियों तक पहुँच सकता है। सरकार पर दबाव बनाने के लिए विपक्षी नेताओं ने अपनी पूरी ताकत आंदोलन के पीछे झोंक दी है।
भूख हड़ताल का विस्तार
रोहित पवार ने बताया कि शनिवार को 5 छात्रों ने भूख हड़ताल शुरू की थी, लेकिन रविवार सुबह 2 और छात्राओं — एक मराठवाड़ा से और दूसरी पुणे से — ने स्वेच्छा से इसमें भाग लिया, जिससे भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की संख्या बढ़कर 7 हो गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संख्या लगातार बढ़ रही है और सरकार की चुप्पी ने छात्रों में आक्रोश और गहरा किया है।
विपक्षी नेताओं का समर्थन
रोहित पवार के अनुसार रविवार शाम आंदोलन स्थल पर शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के सांसद संजय राउत, उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे, अमित ठाकरे तथा मनसे प्रमुख राज ठाकरे और सतेज पाटिल के पहुँचने की संभावना है। इसके अलावा, मंगलवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार के भी पुणे आने की संभावना जताई गई है।
राहुल गांधी के समर्थन पर रोहित पवार का बयान
रोहित पवार ने कहा कि लोकसभा नेता प्रतिपक्ष ने अपने एक्स पोस्ट के ज़रिये छात्रों के आंदोलन को समर्थन दिया है, जिसके लिए उन्होंने आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपील की, "शाम तक सरकार की तरफ से कोई फैसला नहीं लिया जाता तो आप इन बच्चों के लिए समय निकालें।" उनका कहना था कि नेता प्रतिपक्ष के समर्थन से महाराष्ट्र सरकार पर दबाव बढ़ेगा।
MPSC में भ्रष्टाचार का आरोप
रोहित पवार ने आंदोलन की मूल माँग को रेखांकित करते हुए कहा कि महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) — जो राज्य को योग्य अधिकारी देने के लिए स्थापित किया गया था — में भ्रष्टाचार घर कर चुका है। उनके अनुसार इस भ्रष्टाचार को समाप्त कर राज्य के नागरिकों को ईमानदार और कुशल अधिकारी सुनिश्चित करने के लिए यह लड़ाई लड़ी जा रही है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह आंदोलन उस समय आया है जब महाराष्ट्र में विपक्ष पहले से ही सरकार के खिलाफ कई मोर्चों पर सक्रिय है। रोहित पवार ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने जल्द से जल्द कोई ठोस रास्ता नहीं निकाला, तो आंदोलन और बड़ा होगा। नेताओं की बढ़ती उपस्थिति और छात्रों की संख्या में वृद्धि को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार के समक्ष जवाबदेही का दबाव तेज़ हो गया है।