एमपीएससी आंदोलन पर मनीषा कायंदे का पलटवार: 'विपक्ष छात्रों की आड़ में अपना करियर बना रहा है'
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र में एमपीएससी परीक्षाओं के बार-बार रद्द होने और पेपर लीक के आरोपों को लेकर पुणे में अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। इस आंदोलन को विपक्षी दलों का समर्थन मिलने पर शिवसेना एमएलसी मनीषा कायंदे ने 8 अक्टूबर 2026 को तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता छात्रों की पीड़ा को अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने का माध्यम बना रहे हैं।
मनीषा कायंदे का आरोप
शिवसेना एमएलसी मनीषा कायंदे ने कहा, 'सरकार पूरी तरह कोशिश कर रही है कि छात्रों को उनका हक मिले। उनके सामने किसी तरह की बाधा नहीं आए। छात्रों के करियर को लेकर सरकार बहुत ज्यादा गंभीर है।' उन्होंने आगे कहा, 'एमपीएससी की गाइडलाइन और उसके कामकाज का पता होने के बावजूद विपक्षी दल के नेता अपने करियर को खड़ा करना चाह रहे हैं। ऐसे लोग जिनका करियर डूब गया है, वे बच्चों की आड़ में अपना करियर बना रहे हैं।'
विपक्ष के आंदोलन और हिरासत पर तीखा हमला
इंडी गठबंधन के नेताओं को हिरासत में लिए जाने और कांग्रेस द्वारा इसे भारतीय लोकतंत्र के लिए 'काला दिन' बताए जाने पर कायंदे ने पलटवार किया। उन्होंने कहा, 'आए दिन आंदोलन करना, निर्धारित स्थान के बजाय कहीं भी धरना शुरू कर देना, संविधान की प्रति हाथ में लेकर सड़क पर लेट जाना — यह सब उचित नहीं है।' शिवसेना नेता ने सीधे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का नाम लेते हुए कहा, 'वे लोकसभा सदस्य हैं, लेकिन उन्हें अपने पद की भी गरिमा नहीं है।'
कपिल सिब्बल और एसआईआर मुद्दे पर निशाना
एसआईआर के मुद्दे पर कपिल सिब्बल के बयान को लेकर कायंदे ने कहा कि उन्होंने खुद सिब्बल का वह बयान सुना जिसमें उन्होंने एसआईआर को जरूरी बताया। कायंदे ने सवाल उठाया, 'सिब्बल 2024 में उन्हीं मतदाताओं के आधार पर जीते हैं, तो क्या वे अपने पद से इस्तीफा देंगे?' उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष इस मुद्दे को 2029 तक खींचना चाहता है और पश्चिम बंगाल हाथ से फिसलने के बाद से वे बौखला गए हैं।
अभिनेता नाना पाटेकर के निधन पर शोक
शिवसेना एमएलसी ने दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा, 'नाना पाटेकर एक बेहतरीन और बहुमुखी प्रतिभा वाले अभिनेता थे, जिन्होंने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के साथ-साथ मराठी सिनेमा और थिएटर में भी अपनी अमिट छाप छोड़ी।' कायंदे ने बताया कि एकनाथ शिंदे और नाना पाटेकर का रिश्ता बहुत गहरा था और शिंदे उन्हें अपना बड़ा भाई मानते थे। 'नाम फाउंडेशन' के जरिए किसानों की मदद में उनके योगदान को उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया।
आगे क्या होगा
पुणे में एमपीएससी अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन जारी है और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच सरकार पर छात्रों की माँगें पूरी करने का दबाव बढ़ता जा रहा है। कायंदे के बयान से महाराष्ट्र की राजनीति में आंदोलन को लेकर नई बहस छिड़ गई है, जो आने वाले दिनों में और तीखी हो सकती है।