एमपीएससी पेपर लीक: चेयरमैन विवेक भीमनवार छुट्टी पर, पुणे में 11 दिन का आंदोलन समाप्त
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) के कथित पेपर लीक विवाद में 12 अक्टूबर 2026 को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब आयोग के चेयरमैन विवेक भीमनवार ने घोषणा की कि जब तक राज्य सरकार द्वारा गठित न्यायिक जाँच पूरी नहीं होती, वे पद पर काम करने के बजाय छुट्टी पर रहेंगे। इस घोषणा के बाद पुणे में प्रतियोगी परीक्षा उम्मीदवारों ने अपना 11 दिन लंबा सड़क आंदोलन वापस ले लिया।
मध्यरात्रि की मैराथन बैठक से निकला समाधान
यह फैसला राज्य के लोक निर्माण मंत्री शिवेंद्र राजे भोसले, राजनीतिक नेताओं और प्रदर्शनकारी छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल के बीच आधी रात तक चली मैराथन बैठक के बाद आया। बैठक में विधायक रोहित पवार और विश्वजीत कदम जैसे नेता भी शामिल रहे, जिन्होंने छात्रों को भरोसा दिलाया कि राज्य उनके साथ है।
सोमवार सुबह 1:24 बजे चेयरमैन भीमनवार ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर पोस्ट कर अपने फैसले की जानकारी दी। उन्होंने लिखा, 'राज्य सरकार ने एमपीएससी पेपर लीक मामले की न्यायिक जाँच की घोषणा की है। अपनी पूरी ज़िंदगी में, मैंने हमेशा नैतिकता को प्राथमिकता दी है। इसलिए, मैंने इस जाँच के पूरा होने तक पद पर काम करते रहने के बजाय इस समय छुट्टी पर जाने का फैसला किया है। एमपीएससी के विद्यार्थियों की स्वायत्तता, विश्वसनीयता और हित हमेशा मेरी प्राथमिकता रहे हैं, और वे भविष्य में भी रहेंगे। जय हिंद! जय महाराष्ट्र।'
न्यायिक जाँच समिति और प्रशासनिक सुधार
महाराष्ट्र सरकार ने रविवार देर रात एक जाँच पैनल का गठन किया था। एमपीएससी की परीक्षा प्रक्रिया में व्यापक बदलाव करने और पेपर लीक तथा प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोपों की जाँच के लिए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे को आयोग का सचिव नियुक्त किया गया है।
इसके अलावा, एमपीएससी की संरचनागत कमियों की पहचान कर बड़े प्रशासनिक सुधारों की सिफारिश करने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दिलीप भोसले की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय जाँच एवं समीक्षा समिति बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। यह ऐसे समय में आया है जब एमपीएससी की विश्वसनीयता को लेकर राज्यभर में छात्रों में गहरी नाराज़गी थी।
आंदोलन वापस लेने की घोषणा
दोनों घोषणाओं — चेयरमैन का छुट्टी पर जाना और न्यायिक जाँच का गठन — के बाद प्रदर्शनकारी उम्मीदवारों ने पुणे में 11 दिन से जारी अपना सड़क आंदोलन समाप्त कर दिया। आंदोलन समाप्त होने के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों ने मौके पर तैनात पुलिस अधिकारियों की प्रशंसा करते हुए उनका आभार व्यक्त किया।
विपक्षी नेता की प्रतिक्रिया
पत्रकारों से बात करते हुए विधायक रोहित पवार ने कहा, 'हालाँकि इसमें देर हुई, लेकिन सरकार ने छात्रों की माँगें मान ली हैं। हमारी मुख्य माँग इस्तीफा थी, लेकिन छात्रों की परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए हमने आंदोलन रोकने का फैसला किया। यह जीत छात्रों की एकता की है।' पवार ने यह भी माना कि सरकार ने तत्काल इस्तीफा नहीं लिया, किंतु छात्रों की शिकायतें दूर करने के लिए काफी लचीलापन दिखाया। उन्होंने कहा, 'बच्चे एक कदम पीछे हटे, लेकिन सरकार दस कदम पीछे हटी।' उन्होंने यह भी घोषणा की कि वे अब विदर्भ के सूखा प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगे।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि न्यायमूर्ति दिलीप भोसले की समिति की सिफारिशें एमपीएससी की परीक्षा प्रणाली को नए सिरे से गठित करने की दिशा तय करेंगी। आयोग में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे की नियुक्ति यह संकेत देती है कि सरकार प्रशासनिक सुधारों को गंभीरता से आगे बढ़ाने का इरादा रखती है। छात्र संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि जाँच के नतीजे पारदर्शी नहीं रहे तो आंदोलन फिर शुरू हो सकता है।