12 अक्टूबर 2026
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एमपीएससी पेपर लीक: चेयरमैन विवेक भीमनवार छुट्टी पर, पुणे में 11 दिन का आंदोलन समाप्त

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एमपीएससी पेपर लीक: चेयरमैन विवेक भीमनवार छुट्टी पर, पुणे में 11 दिन का आंदोलन समाप्त

सारांश

एमपीएससी पेपर लीक विवाद में चेयरमैन विवेक भीमनवार मध्यरात्रि न्यायिक जाँच की घोषणा के बाद छुट्टी पर चले गए। पुणे में 11 दिन से जारी छात्र आंदोलन समाप्त हुआ, लेकिन छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है — पारदर्शी नतीजे न मिले तो संघर्ष फिर शुरू होगा।

मुख्य बातें

एमपीएससी चेयरमैन विवेक भीमनवार ने 12 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि वे न्यायिक जाँच पूरी होने तक छुट्टी पर रहेंगे।
राज्य सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे को एमपीएससी का नया सचिव नियुक्त किया।
बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दिलीप भोसले की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा समिति का प्रस्ताव।
पुणे में प्रतियोगी परीक्षा उम्मीदवारों ने 11 दिन लंबा सड़क आंदोलन वापस लिया।
विधायक रोहित पवार ने कहा — 'बच्चे एक कदम पीछे हटे, लेकिन सरकार दस कदम पीछे हटी।' छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि जाँच पारदर्शी नहीं रही तो आंदोलन फिर शुरू हो सकता है।

महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) के कथित पेपर लीक विवाद में 12 अक्टूबर 2026 को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब आयोग के चेयरमैन विवेक भीमनवार ने घोषणा की कि जब तक राज्य सरकार द्वारा गठित न्यायिक जाँच पूरी नहीं होती, वे पद पर काम करने के बजाय छुट्टी पर रहेंगे। इस घोषणा के बाद पुणे में प्रतियोगी परीक्षा उम्मीदवारों ने अपना 11 दिन लंबा सड़क आंदोलन वापस ले लिया।

मध्यरात्रि की मैराथन बैठक से निकला समाधान

यह फैसला राज्य के लोक निर्माण मंत्री शिवेंद्र राजे भोसले, राजनीतिक नेताओं और प्रदर्शनकारी छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल के बीच आधी रात तक चली मैराथन बैठक के बाद आया। बैठक में विधायक रोहित पवार और विश्वजीत कदम जैसे नेता भी शामिल रहे, जिन्होंने छात्रों को भरोसा दिलाया कि राज्य उनके साथ है।

सोमवार सुबह 1:24 बजे चेयरमैन भीमनवार ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर पोस्ट कर अपने फैसले की जानकारी दी। उन्होंने लिखा, 'राज्य सरकार ने एमपीएससी पेपर लीक मामले की न्यायिक जाँच की घोषणा की है। अपनी पूरी ज़िंदगी में, मैंने हमेशा नैतिकता को प्राथमिकता दी है। इसलिए, मैंने इस जाँच के पूरा होने तक पद पर काम करते रहने के बजाय इस समय छुट्टी पर जाने का फैसला किया है। एमपीएससी के विद्यार्थियों की स्वायत्तता, विश्वसनीयता और हित हमेशा मेरी प्राथमिकता रहे हैं, और वे भविष्य में भी रहेंगे। जय हिंद! जय महाराष्ट्र।'

न्यायिक जाँच समिति और प्रशासनिक सुधार

महाराष्ट्र सरकार ने रविवार देर रात एक जाँच पैनल का गठन किया था। एमपीएससी की परीक्षा प्रक्रिया में व्यापक बदलाव करने और पेपर लीक तथा प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोपों की जाँच के लिए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे को आयोग का सचिव नियुक्त किया गया है।

इसके अलावा, एमपीएससी की संरचनागत कमियों की पहचान कर बड़े प्रशासनिक सुधारों की सिफारिश करने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दिलीप भोसले की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय जाँच एवं समीक्षा समिति बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। यह ऐसे समय में आया है जब एमपीएससी की विश्वसनीयता को लेकर राज्यभर में छात्रों में गहरी नाराज़गी थी।

आंदोलन वापस लेने की घोषणा

दोनों घोषणाओं — चेयरमैन का छुट्टी पर जाना और न्यायिक जाँच का गठन — के बाद प्रदर्शनकारी उम्मीदवारों ने पुणे में 11 दिन से जारी अपना सड़क आंदोलन समाप्त कर दिया। आंदोलन समाप्त होने के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों ने मौके पर तैनात पुलिस अधिकारियों की प्रशंसा करते हुए उनका आभार व्यक्त किया।

विपक्षी नेता की प्रतिक्रिया

पत्रकारों से बात करते हुए विधायक रोहित पवार ने कहा, 'हालाँकि इसमें देर हुई, लेकिन सरकार ने छात्रों की माँगें मान ली हैं। हमारी मुख्य माँग इस्तीफा थी, लेकिन छात्रों की परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए हमने आंदोलन रोकने का फैसला किया। यह जीत छात्रों की एकता की है।' पवार ने यह भी माना कि सरकार ने तत्काल इस्तीफा नहीं लिया, किंतु छात्रों की शिकायतें दूर करने के लिए काफी लचीलापन दिखाया। उन्होंने कहा, 'बच्चे एक कदम पीछे हटे, लेकिन सरकार दस कदम पीछे हटी।' उन्होंने यह भी घोषणा की कि वे अब विदर्भ के सूखा प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगे।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि न्यायमूर्ति दिलीप भोसले की समिति की सिफारिशें एमपीएससी की परीक्षा प्रणाली को नए सिरे से गठित करने की दिशा तय करेंगी। आयोग में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे की नियुक्ति यह संकेत देती है कि सरकार प्रशासनिक सुधारों को गंभीरता से आगे बढ़ाने का इरादा रखती है। छात्र संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि जाँच के नतीजे पारदर्शी नहीं रहे तो आंदोलन फिर शुरू हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन छात्रों को 'नैतिक जीत' का अहसास दिला दिया गया। असली सवाल यह है कि न्यायमूर्ति दिलीप भोसले की समिति की सिफारिशें कितने समय में आएंगी और उन्हें कितनी गंभीरता से लागू किया जाएगा — क्योंकि महाराष्ट्र में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर यह पहला संकट नहीं है। छात्र संगठनों की 'एक कदम पीछे हटने' की स्वीकृति रणनीतिक है, लेकिन यदि जाँच की रिपोर्ट में ठोस जवाबदेही नहीं आई, तो यह सुलह अल्पकालिक साबित होगी।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमपीएससी चेयरमैन विवेक भीमनवार छुट्टी पर क्यों गए?
विवेक भीमनवार ने कथित पेपर लीक मामले में राज्य सरकार द्वारा गठित न्यायिक जाँच पूरी होने तक पद पर काम करने के बजाय छुट्टी पर जाने का फैसला किया। उन्होंने एक्स पर पोस्ट में कहा कि नैतिकता उनकी प्राथमिकता रही है और जाँच के दौरान वे पद पर नहीं रहना चाहते।
पुणे का एमपीएससी छात्र आंदोलन किस कारण शुरू हुआ था?
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोपों के विरोध में पुणे के प्रतियोगी परीक्षा उम्मीदवारों ने सड़क पर आंदोलन शुरू किया था। यह प्रदर्शन 11 दिनों तक जारी रहा।
एमपीएससी मामले में कौन-सी जाँच समितियाँ बनाई गई हैं?
राज्य सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे को एमपीएससी का सचिव नियुक्त किया है। इसके अलावा, बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दिलीप भोसले की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय जाँच एवं समीक्षा समिति बनाने का प्रस्ताव है।
आंदोलन वापस लेने के बाद भी छात्रों की क्या माँगें बची हैं?
छात्रों की मूल माँग चेयरमैन का इस्तीफा थी, जो पूरी नहीं हुई — उन्हें केवल छुट्टी पर भेजा गया है। छात्र संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि जाँच के नतीजे पारदर्शी नहीं रहे तो आंदोलन फिर से शुरू किया जाएगा।
रोहित पवार ने एमपीएससी विवाद पर क्या कहा?
विधायक रोहित पवार ने कहा कि सरकार ने देर से ही सही, लेकिन छात्रों की माँगें मान ली हैं। उन्होंने कहा, 'बच्चे एक कदम पीछे हटे, लेकिन सरकार दस कदम पीछे हटी।' उन्होंने यह भी घोषणा की कि वे अब विदर्भ के सूखा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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