5 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

एमपीएससी पेपर लीक: CM फडणवीस ने गवर्नर से माँगी न्यायिक जाँच की मंज़ूरी, 3 माह में रिपोर्ट का प्रस्ताव

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
एमपीएससी पेपर लीक: CM फडणवीस ने गवर्नर से माँगी न्यायिक जाँच की मंज़ूरी, 3 माह में रिपोर्ट का प्रस्ताव

सारांश

महाराष्ट्र में एमपीएससी पेपर लीक कांड ने राजनीतिक-प्रशासनिक संकट का रूप ले लिया है। CM फडणवीस ने अनुच्छेद 317 के तहत न्यायिक जाँच का रास्ता चुना है, लेकिन पुणे की सड़कों पर अभ्यर्थियों का आक्रोश और सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर से ही उठती असहमति यह बताती है कि असली परीक्षा अभी बाकी है।

मुख्य बातें

CM देवेंद्र फडणवीस ने 5 अक्टूबर 2026 को राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत न्यायिक जाँच समिति गठित करने की औपचारिक सिफारिश भेजी।
प्रस्तावित समिति की अध्यक्षता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे; तीन महीने में रिपोर्ट सौंपने का लक्ष्य।
FDA ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा में पेपर लीक की पुष्टि; 3 उम्मीदवार सीधे लाभार्थी, कई गिरफ्तार।
एमपीएससी सचिव महेंद्र हरपालकर को छात्र प्रतिनिधियों से बातचीत के बाद पद से हटाया गया।
विधायक रोहित पवार के नेतृत्व में पुणे में प्रदर्शन जारी; अध्यक्ष विवेक भीमन्वार के इस्तीफे की माँग।
शिवसेना विधायक संजय गायकवाड़ ने सार्वजनिक रूप से अपनी ही सरकार की आलोचना करते हुए एमपीएससी बोर्ड भंग करने की माँग की।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एमपीएससी पेपर लीक मामले में 5 अक्टूबर 2026 को राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को औपचारिक सिफारिश भेजी, जिसमें महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) के मौजूदा और पूर्व सदस्यों तथा अध्यक्षों के खिलाफ संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत उच्चस्तरीय न्यायिक जाँच समिति गठित करने की माँग की गई। यह कदम पुणे में प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों के बढ़ते विरोध प्रदर्शन के बीच उठाया गया है, जहाँ फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के लिए आयोजित ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा में पेपर लीक की पुष्टि हो चुकी है।

जाँच समिति की संरचना और समय-सीमा

मुख्यमंत्री फडणवीस ने प्रस्ताव दिया है कि इस जाँच समिति की अध्यक्षता हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश करें। समिति को तीन महीने के भीतर एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का लक्ष्य दिया जाएगा, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि संवैधानिक पदों पर बैठे एमपीएससी अधिकारियों को हटाने के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।

अनुच्छेद 317 के तहत इन अधिकारियों को तभी पद से हटाया जा सकता है जब औपचारिक जाँच हो और उसके बाद भारत के राष्ट्रपति तथा सर्वोच्च न्यायालय की भागीदारी वाली प्रक्रिया पूरी की जाए। यह कानूनी जटिलता ही उस सीधी बर्खास्तगी के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा है, जिसकी माँग प्रदर्शनकारी कर रहे हैं।

पेपर लीक का विवरण और गिरफ्तारियाँ

जाँच में सामने आया कि तीन उम्मीदवारों को पेपर लीक से सीधे तौर पर लाभ मिला था। इन तीनों के साथ-साथ कई अन्य साथियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। इस कांड के उजागर होने के बाद एमपीएससी के सचिव महेंद्र हरपालकर को आधिकारिक तौर पर उनके पद से हटा दिया गया, जो मुख्यमंत्री और छात्र प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक में दिए गए आश्वासन का परिणाम था।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब एमपीएससी पर धाँधली के आरोप लगे हों — आलोचकों का कहना है कि आयोग की विश्वसनीयता पहले भी कई बार सवालों के घेरे में आ चुकी है, और हर बार प्रशासनिक जवाबदेही अधूरी रही है।

पुणे में विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक दबाव

विधायक रोहित पवार के नेतृत्व में अभ्यर्थी पुणे में कई स्थानों पर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी प्रमुख माँग एमपीएससी अध्यक्ष विवेक भीमन्वार — जिन्होंने 2026 की शुरुआत में कार्यभार सँभाला था — का तत्काल इस्तीफा है। प्रदर्शनकारियों की चिंताएँ केवल पेपर लीक तक सीमित नहीं हैं; वे परीक्षा के स्वरूप — विशेष रूप से मल्टीपल-चॉइस और डिस्क्रिप्टिव प्रारूप — पर भी सवाल उठा रहे हैं।

विपक्षी दलों ने इस विरोध को खुला समर्थन दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर से भी असंतोष उभर रहा है — शिवसेना विधायक संजय गायकवाड़ ने रविवार को सार्वजनिक रूप से अपनी ही सरकार की आलोचना की और एमपीएससी बोर्ड को भंग करने की माँग की। उन्होंने कहा कि वे अपने सबूत और एक औपचारिक पत्र सीधे मुख्यमंत्री को सौंपेंगे।

सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की राह

राज्य सरकार के इन हालिया कदमों का उद्देश्य एमपीएससी के प्रशासनिक कामकाज की स्वतंत्र न्यायिक जाँच करवाकर अभ्यर्थियों का भरोसा फिर से बहाल करना है। हरपालकर की बर्खास्तगी एक त्वरित प्रशासनिक कदम ज़रूर है, लेकिन छात्र आंदोलन का मानना है कि यह पर्याप्त नहीं है।

राज्यपाल की स्वीकृति मिलने के बाद जाँच समिति के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी। समिति की रिपोर्ट आने तक यह विवाद महाराष्ट्र की राजनीति में केंद्रबिंदु बना रहेगा, और इसका असर आगामी भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर भी पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह जानबूझकर धीमा भी है — और छात्र यह भाँप चुके हैं। राज्यपाल की स्वीकृति, समिति का गठन, जाँच, रिपोर्ट और फिर राष्ट्रपति की भागीदारी — यह प्रक्रिया महीनों नहीं, सालों खींच सकती है। इस बीच जो सबसे बड़ा सवाल अनुत्तरित है, वह यह है कि क्या पेपर लीक एक व्यक्तिगत चूक थी या एमपीएससी के भर्ती तंत्र में संरचनागत सड़न है। शिवसेना विधायक गायकवाड़ का अपनी ही सरकार पर सार्वजनिक हमला बताता है कि सत्ता के गलियारों में भी असंतोष गहरा है — यह संकट केवल प्रशासनिक नहीं, राजनीतिक भी है।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमपीएससी पेपर लीक मामला क्या है?
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग द्वारा फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के लिए आयोजित ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा में पेपर लीक की पुष्टि हुई है, जिसमें तीन उम्मीदवारों को सीधे फायदा पहुँचा। इस खुलासे के बाद पुणे में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए और कई गिरफ्तारियाँ हुई हैं।
CM फडणवीस ने गवर्नर से क्यों संपर्क किया, सीधे कार्रवाई क्यों नहीं की?
एमपीएससी के अधिकारी संवैधानिक पदों पर हैं, इसलिए अनुच्छेद 317 के तहत उन्हें हटाने के लिए औपचारिक जाँच और राष्ट्रपति तथा सर्वोच्च न्यायालय की भागीदारी अनिवार्य है। मुख्यमंत्री सीधे इन्हें बर्खास्त नहीं कर सकते, इसलिए राज्यपाल के माध्यम से यह प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
न्यायिक जाँच समिति कब तक रिपोर्ट देगी?
मुख्यमंत्री फडणवीस के प्रस्ताव के अनुसार हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति को तीन महीने के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी। हालाँकि समिति का गठन राज्यपाल की मंज़ूरी के बाद ही होगा।
प्रदर्शनकारी छात्रों की मुख्य माँगें क्या हैं?
छात्र एमपीएससी अध्यक्ष विवेक भीमन्वार का तत्काल इस्तीफा और एमपीएससी बोर्ड के पुनर्गठन की माँग कर रहे हैं। इसके अलावा वे परीक्षा प्रारूप में सुधार और आयोग में पारदर्शी प्रशासनिक जवाबदेही भी चाहते हैं।
क्या सत्तारूढ़ गठबंधन में इस मुद्दे पर मतभेद हैं?
हाँ, शिवसेना विधायक संजय गायकवाड़ ने रविवार को सार्वजनिक रूप से अपनी ही सरकार की आलोचना करते हुए एमपीएससी बोर्ड को भंग करने की माँग की। उन्होंने कहा कि वे सबूत और औपचारिक पत्र सीधे मुख्यमंत्री को सौंपेंगे।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 3 दिन पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 2 महीने पहले