12 अक्टूबर 2026
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एमपीएससी आंदोलन: भाजपा का सवाल — छात्रों का हक था या रोहित पवार की राजनीतिक सीढ़ी?

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एमपीएससी आंदोलन: भाजपा का सवाल — छात्रों का हक था या रोहित पवार की राजनीतिक सीढ़ी?

सारांश

पुणे में एमपीएससी छात्रों का 11 दिन का धरना खत्म हुआ, चेयरमैन भीमन्वार छुट्टी पर गए — लेकिन असली लड़ाई अब राजनीतिक है। भाजपा का सवाल: क्या छात्रों का कंधा इस्तेमाल हुआ? रोहित पवार का जवाब: जीत छात्रों की है। असल कहानी इन दोनों दावों के बीच में छिपी है।

मुख्य बातें

भाजपा विधायक विक्रम पचपुते ने 12 अक्टूबर 2026 को आरोप लगाया कि एमपीएससी आंदोलन NCP SP विधायक रोहित पवार की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने का माध्यम था।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 30 सितंबर को छात्रों की अधिकांश मांगें स्वीकार की थीं और चौथी बार छात्र प्रतिनिधियों से संवाद किया था।
एमपीएससी चेयरमैन विवेक भीमन्वार ने सोमवार रात 1:24 बजे एक्स पर घोषणा की कि जांच पूरी होने तक वे छुट्टी पर जा रहे हैं।
राज्य सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति दिलीप भोसले की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की, जो दो महीने में रिपोर्ट देगी।
पचपुते ने संविधान के अनुच्छेद 317 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के पास एमपीएससी अध्यक्ष को सीधे हटाने का अधिकार नहीं है।
रोहित पवार ने आंदोलन को 'छात्रों की एकजुटता की जीत' बताया और कहा कि परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए धरना समाप्त किया गया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 12 अक्टूबर 2026 को मुंबई में एमपीएससी छात्रों के हालिया विरोध प्रदर्शनों पर तीखे सवाल उठाए और आरोप लगाया कि यह आंदोलन वास्तविक छात्र हितों के बजाय राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) [NCP SP] विधायक रोहित पवार की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने का माध्यम बना। यह प्रतिक्रिया उस वक्त सामने आई जब पुणे में एमपीएससी परीक्षार्थियों ने अपना 11 दिन का धरना समाप्त किया और जांच पड़ताल के बीच एमपीएससी चेयरमैन विवेक भीमन्वार छुट्टी पर चले गए।

मुख्य घटनाक्रम

भाजपा विधायक विक्रम पचपुते ने स्पष्ट किया कि एमपीएससी प्रदर्शनकारी छात्रों और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच बैठक कराने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने छात्र प्रतिनिधियों से चौथी बार संवाद किया और उनकी अधिकांश मांगें 30 सितंबर को ही मान ली गई थीं। पचपुते ने इस पर मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता की तारीफ की।

पचपुते ने रोहित पवार को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि वे बताएं कि इस विरोध प्रदर्शन से छात्रों को वास्तव में क्या हासिल हुआ और राजनीतिक लाभ किसे मिला।

संवैधानिक सीमाओं का हवाला

पचपुते ने एमपीएससी अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग पर कानूनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत राज्य सरकार के पास किसी संवैधानिक निकाय के प्रमुख को सीधे हटाने का अधिकार नहीं है। इसके लिए एक निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने संवैधानिक रास्ता अपनाया — न्यायिक जांच प्रक्रिया शुरू होते ही अध्यक्ष स्वयं छुट्टी पर चले गए। उनके अनुसार, यदि 30 सितंबर को ही इस दृष्टिकोण को स्वीकार किया गया होता, तो बाद की टकराव की स्थिति और हंगामे से बचा जा सकता था।

आंदोलन के राजनीतिकरण पर आरोप

पचपुते ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक हस्तियों ने प्रदर्शन मंच पर विभिन्न नेताओं, प्रभावशाली व्यक्तियों और कलाकारों को बुलाकर मुद्दे को सनसनीखेज बनाने की कोशिश की। उनका कहना था कि इस प्रक्रिया में ध्यान छात्रों की समस्याओं के समाधान से हटकर व्यक्तिगत प्रचार और राजनीतिक लाभ की ओर चला गया।

उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे अपने करियर और पढ़ाई की कीमत पर किसी भी राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा न बनें। उनके शब्दों में, छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं के ज़रिये अधिकारी बनने के लिए संघर्ष करते हैं — किसी नेता की राजनीतिक सीढ़ी बनने के लिए नहीं।

सरकार की प्रतिक्रिया और जांच समिति

राज्य सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति दिलीप भोसले की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने की घोषणा की, जो एमपीएससी के कामकाज में संरचनात्मक खामियों की जांच कर दो महीने के भीतर सुधारों पर विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी। इसके बाद सोमवार को रात 1 बजकर 24 मिनट पर एमपीएससी चेयरमैन विवेक भीमन्वार ने एक्स (X) पर घोषणा की कि जांच पूरी होने तक वे छुट्टी पर रहेंगे।

रोहित पवार का पक्ष

रोहित पवार ने स्वीकार किया कि देरी के बावजूद सरकार ने छात्रों की मांगें मान ली हैं। उन्होंने कहा कि उनकी मुख्य मांग इस्तीफे की थी, लेकिन छात्रों की परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए आंदोलन रोकने का निर्णय लिया गया। उन्होंने इसे "छात्रों की एकजुटता की जीत" करार दिया।

पवार ने यह भी कहा कि यद्यपि सरकार ने सीधा इस्तीफा नहीं लिया, फिर भी चेयरमैन को छुट्टी पर भेजकर और जांच प्रक्रिया शुरू कर सरकार "दस कदम पीछे" हटी। उन्होंने प्रमोद पाटिल सहित अन्य समर्थकों की सराहना की और प्रशासन को सुधार लागू करने की सख्त समय सीमा की याद दिलाई। आगे की जवाबदेही सुनिश्चित करने की चेतावनी भी दी।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर यह भी सच है कि जांच समिति की घोषणा और चेयरमैन की 'स्वैच्छिक' छुट्टी धरने के दबाव के बाद ही आई। छात्र आंदोलनों को राजनीतिक रंग देने की होड़ में असली मुद्दा — परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता — पीछे न छूट जाए, यही सबसे बड़ा खतरा है।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमपीएससी आंदोलन क्या था और इसकी मुख्य मांग क्या थी?
पुणे में एमपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों ने पेपर लीक मामले में एमपीएससी चेयरमैन विवेक भीमन्वार के इस्तीफे की मांग को लेकर 11 दिन का विरोध प्रदर्शन किया। सरकार द्वारा जांच समिति की घोषणा और चेयरमैन के छुट्टी पर जाने के बाद छात्रों ने धरना समाप्त किया।
एमपीएससी चेयरमैन विवेक भीमन्वार छुट्टी पर क्यों गए?
राज्य सरकार द्वारा न्यायमूर्ति दिलीप भोसले की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय जांच समिति गठित होने के बाद एमपीएससी चेयरमैन विवेक भीमन्वार ने सोमवार को रात 1 बजकर 24 मिनट पर एक्स पर घोषणा की कि जांच पूरी होने तक वे छुट्टी पर रहेंगे। यह इस्तीफा नहीं था, बल्कि जांच अवधि के दौरान की अस्थायी व्यवस्था थी।
भाजपा ने रोहित पवार पर क्या आरोप लगाए?
भाजपा विधायक विक्रम पचपुते ने आरोप लगाया कि रोहित पवार ने छात्रों के आंदोलन को अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के लिए इस्तेमाल किया। पचपुते का कहना था कि मुख्य मांगें पूरी होने के बाद भी आंदोलन जारी रखना और मंच पर राजनेताओं व कलाकारों को बुलाना छात्र हित नहीं, राजनीतिक प्रचार था।
राज्य सरकार एमपीएससी चेयरमैन को सीधे क्यों नहीं हटा सकती?
भाजपा विधायक पचपुते ने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत एमपीएससी जैसे संवैधानिक निकाय के अध्यक्ष को हटाने के लिए एक विशिष्ट प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है, जो सीधे राज्य सरकार के एकल अधिकार में नहीं आती।
जांच समिति क्या काम करेगी और कब रिपोर्ट देगी?
बॉम्बे हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति दिलीप भोसले की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति एमपीएससी के कामकाज में संरचनात्मक खामियों की जांच करेगी और दो महीने के भीतर सुधारों पर विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी।
राष्ट्र प्रेस
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