एमपीएससी आंदोलन: भाजपा का सवाल — छात्रों का हक था या रोहित पवार की राजनीतिक सीढ़ी?
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 12 अक्टूबर 2026 को मुंबई में एमपीएससी छात्रों के हालिया विरोध प्रदर्शनों पर तीखे सवाल उठाए और आरोप लगाया कि यह आंदोलन वास्तविक छात्र हितों के बजाय राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) [NCP SP] विधायक रोहित पवार की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने का माध्यम बना। यह प्रतिक्रिया उस वक्त सामने आई जब पुणे में एमपीएससी परीक्षार्थियों ने अपना 11 दिन का धरना समाप्त किया और जांच पड़ताल के बीच एमपीएससी चेयरमैन विवेक भीमन्वार छुट्टी पर चले गए।
मुख्य घटनाक्रम
भाजपा विधायक विक्रम पचपुते ने स्पष्ट किया कि एमपीएससी प्रदर्शनकारी छात्रों और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच बैठक कराने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने छात्र प्रतिनिधियों से चौथी बार संवाद किया और उनकी अधिकांश मांगें 30 सितंबर को ही मान ली गई थीं। पचपुते ने इस पर मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता की तारीफ की।
पचपुते ने रोहित पवार को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि वे बताएं कि इस विरोध प्रदर्शन से छात्रों को वास्तव में क्या हासिल हुआ और राजनीतिक लाभ किसे मिला।
संवैधानिक सीमाओं का हवाला
पचपुते ने एमपीएससी अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग पर कानूनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत राज्य सरकार के पास किसी संवैधानिक निकाय के प्रमुख को सीधे हटाने का अधिकार नहीं है। इसके लिए एक निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने संवैधानिक रास्ता अपनाया — न्यायिक जांच प्रक्रिया शुरू होते ही अध्यक्ष स्वयं छुट्टी पर चले गए। उनके अनुसार, यदि 30 सितंबर को ही इस दृष्टिकोण को स्वीकार किया गया होता, तो बाद की टकराव की स्थिति और हंगामे से बचा जा सकता था।
आंदोलन के राजनीतिकरण पर आरोप
पचपुते ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक हस्तियों ने प्रदर्शन मंच पर विभिन्न नेताओं, प्रभावशाली व्यक्तियों और कलाकारों को बुलाकर मुद्दे को सनसनीखेज बनाने की कोशिश की। उनका कहना था कि इस प्रक्रिया में ध्यान छात्रों की समस्याओं के समाधान से हटकर व्यक्तिगत प्रचार और राजनीतिक लाभ की ओर चला गया।
उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे अपने करियर और पढ़ाई की कीमत पर किसी भी राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा न बनें। उनके शब्दों में, छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं के ज़रिये अधिकारी बनने के लिए संघर्ष करते हैं — किसी नेता की राजनीतिक सीढ़ी बनने के लिए नहीं।
सरकार की प्रतिक्रिया और जांच समिति
राज्य सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति दिलीप भोसले की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने की घोषणा की, जो एमपीएससी के कामकाज में संरचनात्मक खामियों की जांच कर दो महीने के भीतर सुधारों पर विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी। इसके बाद सोमवार को रात 1 बजकर 24 मिनट पर एमपीएससी चेयरमैन विवेक भीमन्वार ने एक्स (X) पर घोषणा की कि जांच पूरी होने तक वे छुट्टी पर रहेंगे।
रोहित पवार का पक्ष
रोहित पवार ने स्वीकार किया कि देरी के बावजूद सरकार ने छात्रों की मांगें मान ली हैं। उन्होंने कहा कि उनकी मुख्य मांग इस्तीफे की थी, लेकिन छात्रों की परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए आंदोलन रोकने का निर्णय लिया गया। उन्होंने इसे "छात्रों की एकजुटता की जीत" करार दिया।
पवार ने यह भी कहा कि यद्यपि सरकार ने सीधा इस्तीफा नहीं लिया, फिर भी चेयरमैन को छुट्टी पर भेजकर और जांच प्रक्रिया शुरू कर सरकार "दस कदम पीछे" हटी। उन्होंने प्रमोद पाटिल सहित अन्य समर्थकों की सराहना की और प्रशासन को सुधार लागू करने की सख्त समय सीमा की याद दिलाई। आगे की जवाबदेही सुनिश्चित करने की चेतावनी भी दी।