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जेपीएससी-जेएसएससी अनियमितता: झारखंड विधानसभा मार्च में छात्रों का हुंकार, 'लॉलीपॉप देना बंद करो'

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जेपीएससी-जेएसएससी अनियमितता: झारखंड विधानसभा मार्च में छात्रों का हुंकार, 'लॉलीपॉप देना बंद करो'

सारांश

झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा घोटाले के खिलाफ छात्रों का गुस्सा विधानसभा की दहलीज तक पहुँच गया। 80% माँगें मानी गईं, फिर भी छात्र असंतुष्ट — क्योंकि कागज़ पर सहमति और ज़मीन पर अमल के बीच की खाई अभी भी बनी है।

मुख्य बातें

10 अगस्त 2026 को रांची में छात्रों ने झारखंड विधानसभा घेराव मार्च निकाला; छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो भी शामिल हुए।
जयपाल मुंडा स्टेडियम में अनशनरत प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर 'लॉलीपॉप' देकर गुमराह करने का आरोप लगाया।
दो दिनों की वार्ता में छात्रों की करीब 80% माँगों पर सहमति बनी, लेकिन कुछ अहम मुद्दों पर गतिरोध जारी है।
सरकार ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जाँच समिति और फास्ट ट्रैक कोर्ट से 90 दिनों में रिपोर्ट देने का प्रस्ताव रखा।
वित्तीय अनियमितता सिद्ध होने पर ईडी की सहायता लेने पर विचार किया जाएगा।
छात्र नेता चंदन कुमार ने स्पष्ट किया — 'लड़ाई सरकार के खिलाफ नहीं, सिस्टम के खिलाफ है।'

झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरुद्ध चल रहा छात्र आंदोलन 10 अगस्त 2026 को एक नए मोड़ पर पहुँच गया, जब बड़ी संख्या में छात्र रांची स्थित विधानसभा का घेराव करने के लिए सड़कों पर उतर आए। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो समेत तमाम प्रदर्शनकारी इस मार्च में शामिल हुए, जबकि जयपाल मुंडा स्टेडियम में अनशन पर बैठे प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर वादे करके छात्रों को बहलाने का आरोप लगाया।

मुख्य घटनाक्रम

छात्र नेता प्रेम नायक ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा, 'अगर छात्रों की बातें मान ली गई हैं तो आप इसे आधिकारिक तौर पर लागू क्यों नहीं कर रहे हैं? मुख्यमंत्री सामने आएं और मीडिया के सामने स्थिति स्पष्ट करें। आप बच्चों को लॉलीपॉप क्यों दे रहे हैं? झारखंड में लॉलीपॉप देना बंद करें। आपने पहले से ही बहुत लॉलीपॉप दे दिए हैं।' उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें अहंकार छोड़कर छात्रों से सीधी बातचीत करनी चाहिए।

नायक ने आगे कहा, 'छात्र शुरू से आपसे बात करना चाहते थे। यही जनता आपको बनाती है और यही जनता नीचे गिराती है।' उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि जैसे वे अपने बच्चों की बात सुनते हैं, वैसे ही इन छात्रों की भी सुनें।

सरकार-छात्र वार्ता की स्थिति

छात्र नेता चंदन कुमार ने बताया कि रविवार को मंत्रियों के साथ लगातार दो दिनों तक चली बातचीत में छात्रों की करीब 80 फीसदी माँगों पर सहमति बन गई है। हालाँकि, कुछ अहम मुद्दों पर अभी भी गतिरोध बना हुआ है।

सरकार ने आश्वासन दिया है कि मामले की जाँच जारी रहेगी और एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जाँच समिति गठित की जाएगी। यदि जाँच में वित्तीय लेनदेन के साक्ष्य मिलते हैं, तो प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की सहायता लेने पर भी विचार किया जाएगा।

परीक्षा सुधार पर सहमति

बातचीत में परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार पर सैद्धांतिक सहमति बनी है। छात्रों की माँग है कि जेपीएससी की परीक्षा प्रक्रिया में बुनियादी बदलाव किए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी गड़बड़ियाँ न हो सकें। इसके अलावा फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से 90 दिनों के भीतर जाँच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के प्रस्ताव पर भी दोनों पक्षों में सहमति बताई जा रही है।

आंदोलन का असली मकसद

चंदन कुमार ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी सरकार को अस्थिर करने या राजनीतिक एजेंडे के लिए नहीं है। उन्होंने कहा, 'हमारी लड़ाई सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि सिस्टम के खिलाफ है।' उनके अनुसार, हर मेहनती और आर्थिक रूप से कमजोर छात्र को सरकारी नौकरी का समान अवसर तभी मिलेगा, जब परीक्षाएँ पूर्णतः पारदर्शी तरीके से संपन्न कराई जाएँगी।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पहले से सवालों के घेरे में है। गौरतलब है कि जेपीएससी और जेएसएससी से जुड़े विवाद वर्षों से चले आ रहे हैं। शेष माँगों पर सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का रुख इस आंदोलन की अगली दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि बची हुई 20% माँगें कौन-सी हैं — और क्या वही माँगें आंदोलन की जड़ में हैं। झारखंड में जेपीएससी विवाद कोई नई घटना नहीं है; यह उस व्यापक संकट का हिस्सा है जिसमें राज्य की परीक्षा प्रणाली पर भरोसा बार-बार टूटा है। सेवानिवृत्त न्यायाधीश की समिति और फास्ट ट्रैक कोर्ट जैसे प्रस्ताव तब तक महज़ प्रशासनिक दिखावा रहेंगे, जब तक उनके पास स्वतंत्र जाँच का वास्तविक अधिकार और समयबद्ध जवाबदेही का ढाँचा न हो।
RashtraPress
9 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी छात्र आंदोलन किस बात के खिलाफ है?
यह आंदोलन जेपीएससी और जेएसएससी प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और धाँधली के विरुद्ध है। छात्रों की माँग है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शी सुधार किए जाएँ और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो।
सरकार और छात्रों के बीच वार्ता का क्या नतीजा निकला?
दो दिनों की बातचीत में छात्रों की करीब 80% माँगों पर सहमति बनी है। सरकार ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जाँच समिति और 90 दिनों में रिपोर्ट देने वाले फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रस्ताव रखा है, लेकिन कुछ अहम मुद्दों पर गतिरोध अभी भी बना हुआ है।
छात्र नेता प्रेम नायक ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से क्या माँग की?
प्रेम नायक ने माँग की कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मीडिया के सामने आकर स्थिति स्पष्ट करें और जो माँगें मानी गई हैं उन्हें आधिकारिक तौर पर लागू करें। उन्होंने सोरेन से अहंकार छोड़कर छात्रों से सीधी बातचीत करने की अपील की।
क्या इस आंदोलन का कोई राजनीतिक उद्देश्य है?
छात्र नेता चंदन कुमार ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन किसी सरकार को गिराने के लिए नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए है। उनके शब्दों में, 'हमारी लड़ाई सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि सिस्टम के खिलाफ है।'
वित्तीय अनियमितता सिद्ध होने पर क्या कदम उठाए जाएँगे?
सरकार ने संकेत दिया है कि यदि जाँच में पैसों के लेनदेन के साक्ष्य सामने आते हैं, तो प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की सहायता लेने पर विचार किया जाएगा। यह प्रस्ताव अभी विचाराधीन है और इस पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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