7 अक्टूबर 2026
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केरल में एम्स की स्थापना पर हाई कोर्ट सख्त, केंद्र से पूछा — बेहतर स्वास्थ्य सेवा बनी बाधा?

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केरल में एम्स की स्थापना पर हाई कोर्ट सख्त, केंद्र से पूछा — बेहतर स्वास्थ्य सेवा बनी बाधा?

सारांश

केरल हाई कोर्ट ने केंद्र से पूछा — क्या बेहतर स्वास्थ्य सेवा होना एम्स पाने में बाधा है? एक दशक से लंबित माँग पर अदालत ने केंद्र को समीक्षा का निर्देश दिया और छह सप्ताह में अगली सुनवाई तय की। राज्य ने उसी दिन नया स्वास्थ्य कार्य बल भी गठित किया।

मुख्य बातें

केरल हाई कोर्ट ने 7 अक्टूबर 2026 को केंद्र से पूछा कि राज्य की बेहतर स्वास्थ्य अवसंरचना को एम्स आवंटन में अयोग्यता क्यों माना जा रहा है।
मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति श्याम कुमार की पीठ ने केंद्र को मामले की समीक्षा कर आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया।
केरल ने अक्टूबर 2025 में कोझिकोड के किनालूर में एम्स के लिए ज्ञापन दिया था; केंद्र ने जुलाई 2026 में संसद को बताया कि अब तक कोई सैद्धांतिक मंजूरी नहीं दी गई।
मामले में यह प्रस्ताव लगभग एक दशक से लंबित है; अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद होगी।
केरल सरकार ने उसी दिन 'केरल समग्र स्वास्थ्य, कल्याण और दीर्घायु मॉडल कार्य बल' गठित किया, जो दो महीने में रिपोर्ट देगा।

केरल हाई कोर्ट ने 7 अक्टूबर 2026 को केंद्र सरकार से कड़े सवाल पूछे कि राज्य में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की स्थापना का प्रस्ताव लगभग एक दशक से लंबित क्यों है। अदालत ने विशेष रूप से यह जानना चाहा कि क्या केरल की अपेक्षाकृत उन्नत स्वास्थ्य अवसंरचना ही उसे इस प्रमुख राष्ट्रीय चिकित्सा संस्थान से वंचित रखने का आधार बन गई है।

मामले की पृष्ठभूमि

मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति श्याम कुमार की खंडपीठ प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PMSSY) के तहत केरल में एम्स की स्थापना की माँग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। केंद्र सरकार ने अपने रुख में स्पष्ट किया कि कमज़ोर स्वास्थ्य अवसंरचना वाले राज्यों को पहले प्राथमिकता दी जा रही है और केरल में पहले से ही पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने जुलाई 2026 में संसद को सूचित किया था कि केरल में एम्स के लिए अब तक कोई सैद्धांतिक मंजूरी नहीं दी गई है। राज्य ने अक्टूबर 2025 में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को एक ज्ञापन भेजकर कोझिकोड के किनालूर में एम्स स्थापित करने की अनुमति माँगी थी।

अदालत के तीखे सवाल

केंद्र के तर्क को सुनकर खंडपीठ संतुष्ट नहीं हुई। पीठ ने पूछा, 'यहाँ निजी अस्पताल अधिक हैं। क्या यह अयोग्यता है?' अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि केरल की उच्च जनसंख्या घनत्व को देखते हुए एम्स की आवश्यकता स्वयंसिद्ध है।

पीठ ने आगे कहा कि नई दिल्ली समेत देश के अन्य अपेक्षाकृत समृद्ध क्षेत्रों में एम्स संस्थान स्थापित किए जा चुके हैं, इसलिए केरल को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के आधार पर बाहर रखने का तर्क असंगत है। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि राज्य किन विशिष्ट मानदंडों को पूरा करने में विफल रहा।

केंद्र का रुख और अदालत का निर्देश

केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि राज्य द्वारा भूमि का चयन करना औपचारिक आवंटन या सरकारी मंजूरी के समकक्ष नहीं माना जा सकता। हालाँकि, अदालत इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हुई।

पीठ ने पाया कि केरल में एम्स स्थापित करने के पर्याप्त आधार विद्यमान हैं और केंद्र सरकार को इस मामले की समीक्षा कर आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।

केरल की स्वास्थ्य नीति में नई पहल

एम्स विवाद के बीच केरल सरकार ने उसी दिन एक उच्चस्तरीय कार्य बल का गठन किया — 'केरल समग्र स्वास्थ्य, कल्याण और दीर्घायु मॉडल कार्य बल'। यह कार्य बल मुख्यमंत्री की अध्यक्षता और स्वास्थ्य मंत्री की उपाध्यक्षता में स्वास्थ्य विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम करेगा।

यह कार्य बल रोग निवारण, शीघ्र निदान, गुणवत्तापूर्ण उपचार और स्वस्थ वृद्धावस्था जैसे क्षेत्रों में एक व्यापक मॉडल तैयार करेगा। इसमें आयुर्वेद जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को आधुनिक चिकित्सा के साथ एकीकृत करने और स्वास्थ्य डेटा को एक सुरक्षित डिजिटल मंच पर लाने की संभावनाएँ भी तलाशी जाएँगी।

कार्य बल से दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने की अपेक्षा है, जिसमें दो-तीन पायलट परियोजनाएँ, तीन साल की चरणबद्ध कार्य योजना, अनुमानित लागत, वित्तपोषण विकल्प और कार्यान्वयन की निगरानी के तंत्र शामिल होंगे।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब केरल पारंपरिक उपचार-केंद्रित व्यवस्था से आगे बढ़कर एक आधुनिक, एकीकृत स्वास्थ्य प्रणाली की ओर कदम बढ़ा रहा है। एम्स के लिए कानूनी लड़ाई और नए स्वास्थ्य कार्य बल का गठन — दोनों मिलकर यह संकेत देते हैं कि केरल स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में अपनी स्थिति को और मज़बूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। अदालत के निर्देश के बाद अब सभी की निगाहें केंद्र की अगली समीक्षा और उसके जवाब पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

मुंबई जैसे समृद्ध शहरों में एम्स की उपस्थिति यह सिद्ध करती है कि आवंटन का तर्क कभी भी पूरी तरह 'ज़रूरत-आधारित' नहीं रहा। असली सवाल यह है कि PMSSY के मानदंड पारदर्शी हैं या नहीं — और क्या राज्यों को यह स्पष्ट रूप से बताया जाता है कि किस आधार पर निर्णय होता है। जब तक मानदंड सार्वजनिक और सत्यापन-योग्य नहीं होंगे, ऐसे विवाद अदालतों में ही सुलझते रहेंगे।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल में एम्स की स्थापना का मामला अदालत में क्यों है?
केरल में एम्स स्थापित करने का प्रस्ताव लगभग एक दशक से लंबित है और केंद्र सरकार ने अब तक कोई सैद्धांतिक मंजूरी नहीं दी। इसी के विरोध में याचिकाकर्ताओं ने केरल हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया, जहाँ मामले की सुनवाई PMSSY के तहत हो रही है।
केरल हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को क्या निर्देश दिया?
7 अक्टूबर 2026 को मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति श्याम कुमार की खंडपीठ ने केंद्र सरकार को इस मामले की समीक्षा कर आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया। अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद होगी।
केंद्र सरकार केरल को एम्स देने से क्यों रोक रही है?
केंद्र का तर्क है कि PMSSY के तहत कमज़ोर स्वास्थ्य अवसंरचना वाले राज्यों को प्राथमिकता दी जाती है और केरल में पहले से ही पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएँ हैं। हालाँकि अदालत ने इस तर्क को असंतोषजनक पाया और कहा कि दिल्ली जैसे समृद्ध क्षेत्रों में भी एम्स हैं।
कोझिकोड के किनालूर में एम्स का क्या हुआ?
केरल सरकार ने अक्टूबर 2025 में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को ज्ञापन देकर कोझिकोड के किनालूर में एम्स के लिए मंजूरी माँगी थी। केंद्र ने कहा कि भूमि का चयन औपचारिक आवंटन नहीं है और जुलाई 2026 में संसद को बताया कि अभी तक कोई सैद्धांतिक मंजूरी नहीं दी गई।
केरल स्वास्थ्य कार्य बल क्या है और यह कब रिपोर्ट देगा?
7 अक्टूबर 2026 को केरल सरकार ने मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 'केरल समग्र स्वास्थ्य, कल्याण और दीर्घायु मॉडल कार्य बल' गठित किया। यह कार्य बल दो महीने के भीतर रिपोर्ट देगा, जिसमें तीन साल की कार्य योजना, पायलट परियोजनाएँ और डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली के सुझाव शामिल होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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