4 अगस्त 2026
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केरल आयुष विश्वविद्यालय की स्थापना: 4 सदस्यीय समिति गठित, 2 माह में मसौदा तैयार होगा

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केरल आयुष विश्वविद्यालय की स्थापना: 4 सदस्यीय समिति गठित, 2 माह में मसौदा तैयार होगा

सारांश

केरल ने आयुष शिक्षा के लिए एक समर्पित विश्वविद्यालय की स्थापना की ओर पहला ठोस कदम बढ़ाया है। स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने चार सदस्यीय समिति गठित की है, जो दो महीने में मसौदा देगी। यह कदम राज्य को आयुर्वेद के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में और मज़बूत करेगा।

मुख्य बातें

स्वास्थ्य मंत्री के.
मुरलीधरन ने 4 अगस्त 2026 को केरल आयुष विश्वविद्यालय के लिए चार सदस्यीय समिति गठन की घोषणा की।
समिति को दो महीने के भीतर विधायी मसौदा और संस्थागत ढाँचा प्रस्तुत करना होगा।
विश्वविद्यालय का मुख्यालय त्रिपुनिथुरा स्थित आयुर्वेद के मूलभूत अनुसंधान विद्यालय में होगा।
प्रस्तावित विश्वविद्यालय आयुर्वेद, होम्योपैथी, सिद्धा, यूनानी सहित सभी आयुष संस्थानों को एकीकृत करेगा, जो अभी केरल यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज़ से संबद्ध हैं।
समिति की अध्यक्षता आयुष विभाग के प्रधान सचिव करेंगे; राष्ट्रीय आयुष मिशन के राज्य मिशन निदेशक संयोजक होंगे।

केरल सरकार ने 4 अगस्त 2026 को एक स्वतंत्र केरल आयुष विश्वविद्यालय की स्थापना की दिशा में पहला ठोस प्रशासनिक कदम उठाया। स्वास्थ्य एवं देवस्वोम मंत्री के. मुरलीधरन ने मंगलवार को घोषणा की कि एक चार सदस्यीय समिति का गठन किया जाएगा, जो प्रस्तावित विश्वविद्यालय के लिए दो महीने के भीतर विधायी मसौदा और संस्थागत ढाँचा प्रस्तुत करेगी। यह विश्वविद्यालय आयुर्वेद, होम्योपैथी, सिद्धा, यूनानी और अन्य मान्यता प्राप्त आयुष धाराओं को एकीकृत शैक्षणिक मंच प्रदान करेगा।

समिति की संरचना और कार्यक्षेत्र

गठित समिति की अध्यक्षता आयुष विभाग के प्रधान सचिव करेंगे। राष्ट्रीय आयुष मिशन के राज्य मिशन निदेशक संयोजक के रूप में कार्य करेंगे। आयुर्वेदिक चिकित्सा शिक्षा के निदेशक और सरकारी होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के प्रधानाध्यापक एवं नियंत्रक अधिकारी अन्य दो सदस्य हैं।

समिति केवल कानून का मसौदा तैयार करने तक सीमित नहीं रहेगी — वह शासन संरचना, शैक्षणिक ढाँचा, अनुसंधान प्राथमिकताएँ और प्रशासनिक प्रणालियों की भी गहन जाँच करेगी।

विश्वविद्यालय की परिकल्पना और उद्देश्य

प्रस्तावित विश्वविद्यालय उन सभी आयुष शैक्षणिक संस्थानों को एक छत के नीचे लाएगा, जो वर्तमान में केरल यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज़ से संबद्ध हैं। इसकी परिकल्पना शैक्षणिक कार्यक्रमों, नैदानिक प्रशिक्षण, औषधि विकास और नीतिगत पहलों के समन्वय के लिए एक विशेष संस्थान के रूप में की गई है।

विश्वविद्यालय का मुख्यालय त्रिपुनिथुरा स्थित आयुर्वेद के मूलभूत अनुसंधान विद्यालय में स्थापित किया जाएगा — जो स्थान पहले से ही पारंपरिक चिकित्सा शोध का केंद्र माना जाता है।

केरल की आयुर्वेद में ऐतिहासिक भूमिका

गौरतलब है कि केरल को राष्ट्रीय स्तर पर आयुर्वेद का प्रमुख केंद्र माना जाता है। राज्य में पंचकर्म से लेकर शास्त्रीय आयुर्वेदिक उपचार तक की परंपरा सदियों पुरानी है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार भी आयुष क्षेत्र में निवेश और अनुसंधान को प्रोत्साहन दे रही है। एक समर्पित विश्वविद्यालय की अनुपस्थिति में, आयुष संस्थान अब तक स्वास्थ्य विज्ञान के सामान्य विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित होते रहे हैं, जिससे विशेष अनुसंधान और नीति-निर्माण में बाधाएँ आती थीं।

संभावित प्रभाव और आगे की राह

मंत्री मुरलीधरन ने इसे केरल की परंपरागत स्वास्थ्य प्रणाली को मज़बूत करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। उनके अनुसार, यह विश्वविद्यालय एकीकृत शैक्षणिक तंत्र तैयार करेगा, जो शिक्षण और शोध के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय ज़रूरतों की पूर्ति करने में सक्षम होगा।

विश्वविद्यालय से अंतर्विषयक अनुसंधान को बल मिलने, आयुष शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होने और नैदानिक अध्ययन तथा औषधीय नवाचार के अवसरों के विस्तार की उम्मीद है। समिति की रिपोर्ट आने के बाद विधानसभा में विधेयक पेश किए जाने की प्रक्रिया आरंभ होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन समिति के गठन और वास्तविक विश्वविद्यालय की स्थापना के बीच की राह लंबी और जटिल है — विधानसभा में विधेयक, केंद्र से मान्यता और संसाधन आवंटन जैसी बाधाएँ अभी बाकी हैं। गौरतलब है कि देश में पहले से ही राजस्थान और गुजरात में आयुर्वेद विश्वविद्यालय संचालित हैं, जिनके अनुभवों से केरल को सबक लेने की ज़रूरत होगी। आयुष शिक्षा की गुणवत्ता पर राष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठते रहे हैं — एक समर्पित विश्वविद्यालय तभी सार्थक होगा जब वह अनुसंधान उत्पादन और नैदानिक मानकों पर मापने योग्य लक्ष्य निर्धारित करे, न कि केवल प्रशासनिक पुनर्गठन तक सीमित रहे।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल आयुष विश्वविद्यालय क्या है और इसकी स्थापना क्यों की जा रही है?
केरल आयुष विश्वविद्यालय एक प्रस्तावित समर्पित संस्थान है जो आयुर्वेद, होम्योपैथी, सिद्धा, यूनानी और अन्य आयुष धाराओं के सभी शैक्षणिक संस्थानों को एकीकृत करेगा। वर्तमान में ये संस्थान केरल यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज़ से संबद्ध हैं, और एक विशेष विश्वविद्यालय से अनुसंधान व नीति-निर्माण को विशेष दिशा मिलेगी।
केरल आयुष विश्वविद्यालय कब तक स्थापित होगा?
गठित समिति को दो महीने के भीतर मसौदा प्रस्तुत करना है। इसके बाद विधानसभा में विधेयक पेश होगा और केंद्रीय मान्यता की प्रक्रिया पूरी होगी, इसलिए विश्वविद्यालय के पूर्ण संचालन की कोई निश्चित तिथि अभी घोषित नहीं की गई है।
इस विश्वविद्यालय का मुख्यालय कहाँ होगा?
विश्वविद्यालय का मुख्यालय त्रिपुनिथुरा स्थित आयुर्वेद के मूलभूत अनुसंधान विद्यालय में स्थापित किया जाएगा, जो पहले से ही पारंपरिक चिकित्सा अनुसंधान का एक स्थापित केंद्र है।
समिति में कौन-कौन से अधिकारी शामिल हैं?
चार सदस्यीय समिति की अध्यक्षता आयुष विभाग के प्रधान सचिव करेंगे। राष्ट्रीय आयुष मिशन के राज्य मिशन निदेशक संयोजक होंगे, जबकि आयुर्वेदिक चिकित्सा शिक्षा के निदेशक और सरकारी होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के प्रधानाध्यापक एवं नियंत्रक अधिकारी अन्य दो सदस्य हैं।
इस विश्वविद्यालय से छात्रों और शोधकर्ताओं को क्या लाभ होगा?
विश्वविद्यालय से अंतर्विषयक अनुसंधान को बल मिलेगा, आयुष शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और नैदानिक अध्ययन तथा औषधीय नवाचार के अवसर बढ़ेंगे। मंत्री के अनुसार, यह संस्थान अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक और शोध ज़रूरतों को पूरा करने में सक्षम होगा।
राष्ट्र प्रेस
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