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योगी सरकार का बड़ा फैसला: 5 मंडलों में बनेंगे एकीकृत आयुष चिकित्सालय एवं महाविद्यालय

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योगी सरकार का बड़ा फैसला: 5 मंडलों में बनेंगे एकीकृत आयुष चिकित्सालय एवं महाविद्यालय

सारांश

योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश के पाँच मंडलों में एकीकृत आयुष चिकित्सालय एवं महाविद्यालय स्थापित करने का फैसला किया है। गोंडा से बस्ती तक भूमि चिन्हित हो चुकी है। ये संस्थान शिक्षा के साथ-साथ शोध केंद्र भी बनेंगे — दूरदराज के छात्रों को अब बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

मुख्य बातें

योगी आदित्यनाथ सरकार ने 5 नए एकीकृत आयुष चिकित्सालय एवं महाविद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया।
संस्थान गोंडा, मीरजापुर, मेरठ, आगरा और बस्ती मंडल में बनाए जाएंगे।
कुल भूमि: गोंडा में 14.82 एकड़ , मीरजापुर में 13.83 एकड़ , मेरठ (गाजियाबाद) में 11 एकड़ , आगरा में 13.5 एकड़ , बस्ती में 15 एकड़ ।
चार मंडलों में भूमि आयुष विभाग के नाम दर्ज; बस्ती में हस्तांतरण प्रक्रिया अंतिम चरण में।
महाविद्यालय शिक्षा के साथ-साथ शोध और नवाचार केंद्र के रूप में भी विकसित होंगे।
आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध, होम्योपैथी और आधुनिक स्वास्थ्य विज्ञान — दोनों की शिक्षा एक ही परिसर में।

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 8 जून 2026 को प्रदेश में आयुष चिकित्सा शिक्षा को नई दिशा देने के लिए पाँच नए एकीकृत आयुष चिकित्सालय एवं महाविद्यालयों की स्थापना का निर्णय लिया है। ये संस्थान गोंडा, मीरजापुर, मेरठ, आगरा और बस्ती मंडल में स्थापित किए जाएंगे, जहाँ आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी के साथ-साथ आधुनिक स्वास्थ्य विज्ञान की शिक्षा भी दी जाएगी। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को मुख्यधारा की स्वास्थ्य प्रणाली में शामिल करने की कोशिशें तेज हो रही हैं।

कहाँ-कहाँ चिन्हित की गई भूमि

प्रमुख सचिव, आयुष रंजन कुमार ने बताया कि पाँचों मंडलों में महाविद्यालय की स्थापना के लिए भूमि चिन्हित कर ली गई है। देवीपाटन मंडल में गोंडा के विकास खंड वजीरगंज के ग्राम कोडर में लगभग 14.82 एकड़, मीरजापुर मंडल में सदर तहसील के ग्राम अकोढ़ी में 13.83 एकड़, मेरठ मंडल के लिए गाजियाबाद की मोदीनगर तहसील के ग्राम सैदपुर हुसैनपुर डलना में 11 एकड़, आगरा मंडल में किरावली तहसील के ग्राम अकबरा में 13.5 एकड़ और बस्ती मंडल में हर्रैया तहसील के ग्राम जोगापुर में 15 एकड़ भूमि आवंटित की गई है।

गौरतलब है कि इनमें से चार मंडलों में भूमि पहले ही आयुष विभाग के नाम दर्ज हो चुकी है, जबकि बस्ती में भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

शिक्षा और शोध का केंद्र बनेंगे नए महाविद्यालय

आयुष महानिदेशक एवं मिशन निदेशक चैत्रा वी. ने बताया कि वर्तमान में राजकीय एकीकृत आयुष महाविद्यालय एवं चिकित्सालय का नक्शा तैयार किया जा रहा है। उनके अनुसार नए महाविद्यालय केवल शिक्षण संस्थान नहीं होंगे, बल्कि शोध और नवाचार के केंद्र के रूप में भी विकसित किए जाएंगे। यहाँ आयुर्वेदिक औषधियों, योग चिकित्सा, जीवनशैली आधारित उपचार और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों पर अनुसंधान को प्रोत्साहित किया जाएगा।

महाविद्यालयों में आधुनिक प्रयोगशालाएँ, चिकित्सालय, अनुसंधान सुविधाएँ और प्रशिक्षण केंद्र विकसित किए जाएंगे। इससे भारतीय चिकित्सा परंपरा को वैज्ञानिक आधार पर और अधिक सशक्त बनाने में मदद मिलेगी।

दूरदराज के छात्रों को मिलेगा लाभ

चैत्रा वी. ने यह भी कहा कि नए आयुष महाविद्यालयों की स्थापना से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अपने ही मंडल में उच्च स्तरीय चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इससे दूर-दराज के छात्रों को बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और आयुष क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन की उपलब्धता भी बढ़ेगी।

सरकार की मंशा और व्यापक संदर्भ

रंजन कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ-साथ भारत की पारंपरिक चिकित्सा विरासत को भी सुदृढ़ करने की दिशा में कार्यरत हैं, ताकि प्रदेशवासियों को सुरक्षित, सस्ती और प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध हो सकें। यह पहल उत्तर प्रदेश में आयुष शिक्षा के बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आने वाले समय में जैसे-जैसे नक्शा स्वीकृति और निर्माण प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, इन संस्थानों के संचालन की समयसीमा स्पष्ट होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की गति और गुणवत्ता में है। उत्तर प्रदेश में पहले से स्वीकृत कई स्वास्थ्य अवसंरचना परियोजनाएँ निर्माण में देरी और नियामक अनुमोदन की बाधाओं से जूझती रही हैं। आयुष महाविद्यालयों के लिए राष्ट्रीय आयुष मिशन के मानकों के तहत मान्यता प्रक्रिया जटिल है — भूमि आवंटन से संचालन तक का सफर अक्सर वर्षों लंबा होता है। सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि इन संस्थानों के लिए समयबद्ध लक्ष्य, संकाय भर्ती योजना और मान्यता रोडमैप क्या है — अन्यथा यह घोषणा भी उन कई परियोजनाओं की सूची में जुड़ जाएगी जो कागज़ पर तो शुरू हुईं, लेकिन ज़मीन पर देर से उतरीं।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

योगी सरकार के नए एकीकृत आयुष महाविद्यालय कहाँ-कहाँ खुलेंगे?
ये पाँच महाविद्यालय गोंडा, मीरजापुर, मेरठ, आगरा और बस्ती मंडल में स्थापित किए जाएंगे। सभी पाँचों स्थानों पर भूमि चिन्हित की जा चुकी है और चार स्थानों पर भूमि आयुष विभाग के नाम दर्ज भी हो चुकी है।
इन आयुष महाविद्यालयों में कौन-सी चिकित्सा पद्धतियाँ पढ़ाई जाएंगी?
इन संस्थानों में आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी पारंपरिक पद्धतियों के साथ-साथ आधुनिक स्वास्थ्य विज्ञान की शिक्षा भी दी जाएगी। यह 'एकीकृत' दृष्टिकोण इन्हें परंपरागत आयुष कॉलेजों से अलग बनाता है।
क्या ये महाविद्यालय केवल पढ़ाई के केंद्र होंगे?
नहीं। आयुष महानिदेशक चैत्रा वी. के अनुसार ये संस्थान शिक्षा के साथ-साथ शोध और नवाचार के केंद्र के रूप में भी विकसित किए जाएंगे। यहाँ आयुर्वेदिक औषधियों, योग चिकित्सा और पारंपरिक उपचार पद्धतियों पर अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाएगा।
बस्ती मंडल में भूमि की स्थिति क्या है?
बस्ती मंडल में हर्रैया तहसील के ग्राम जोगापुर में 15 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है। हालाँकि अन्य चार मंडलों के विपरीत यहाँ भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया अभी अंतिम चरण में है।
इन महाविद्यालयों से आम जनता और छात्रों को क्या फायदा होगा?
दूरदराज के छात्रों को अब चिकित्सा शिक्षा के लिए बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, क्योंकि उन्हें अपने ही मंडल में उच्च स्तरीय शिक्षा मिलेगी। साथ ही स्थानीय स्तर पर बेहतर आयुष स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध होंगी और प्रशिक्षित मानव संसाधन की उपलब्धता भी बढ़ेगी।
राष्ट्र प्रेस
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