यूपी में आयुष सेवाओं को ₹613 करोड़ की कार्ययोजना मंजूर, मुख्य सचिव एसपी गोयल ने निर्माण देरी पर जताई कड़ी नाराजगी
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश में आयुष चिकित्सा सेवाओं के विस्तार को नई गति देते हुए मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में 30 जून 2026 को लखनऊ में नेशनल आयुष मिशन-उत्तर प्रदेश की 12वीं गवर्निंग बॉडी बैठक आयोजित की गई, जिसमें वर्ष 2026-27 के लिए ₹613.42 करोड़ की राज्य वार्षिक कार्ययोजना को मंजूरी दी गई। यह योजना अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार के आयुष मंत्रालय को भेजी जाएगी।
कार्ययोजना में क्या शामिल है
स्वीकृत ₹613.42 करोड़ के बजट में ₹458.99 करोड़ नई परियोजनाओं और ₹154.42 करोड़ चल रही योजनाओं पर व्यय किए जाएंगे। इस राशि का उपयोग आयुष चिकित्सा सेवाओं के विस्तार, शिक्षण संस्थानों के विकास, फ्लेक्सी पूल और प्रशासनिक व्यय में किया जाएगा।
कार्ययोजना के तहत प्रदेश में 23 नए आयुष मेडिकल यूनिट स्थापित किए जाएंगे। वाराणसी स्थित राजकीय आयुर्वेद कॉलेज में छात्राओं के लिए ₹1.78 करोड़ की लागत से छात्रावास का द्वितीय तल निर्मित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त प्रदेश के 17 आयुष कॉलेजों में 51 स्मार्ट क्लासरूम स्थापित होंगे, जिन पर लगभग ₹3.03 करोड़ खर्च होंगे। झांसी और शाहजहांपुर में होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों के निर्माण तथा नई आयुष डिस्पेंसरियों की स्थापना का भी प्रस्ताव है।
निर्माण देरी पर मुख्य सचिव सख्त
बैठक में मुख्य सचिव गोयल ने राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के निर्माण कार्यों की धीमी प्रगति पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने प्रमुख सचिव आयुष और मिशन निदेशक को प्रत्येक माह परियोजनाओं की समीक्षा करने तथा नियमित स्थलीय निरीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
गोयल ने स्पष्ट किया कि भवन निर्माण के साथ-साथ आवश्यक पदों के सृजन की प्रक्रिया भी समय रहते पूरी की जाए, ताकि संस्थानों का संचालन बिना किसी देरी के शुरू हो सके। उन्होंने प्रदेश में संचालित आयुष डिस्पेंसरियों, अस्पतालों और आरोग्य मंदिरों के उन्नयन पर विशेष जोर देते हुए स्वच्छता, हरित वातावरण, जनसुविधाओं और कार्यक्षमता में सुधार के निर्देश दिए।
जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों की उपलब्धियाँ
प्रमुख सचिव आयुष रंजन कुमार ने बैठक में मिशन के तहत संचालित जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि गैर-संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत वर्ष 2025-26 में लखीमपुर खीरी में 2.12 लाख से अधिक मरीजों को स्क्रीनिंग, परामर्श और रेफरल सेवाएं प्रदान की गईं।
आयुष मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से प्रदेश के नौ आकांक्षी जिलों के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुँचाई जा रही हैं, जिसके तहत वर्ष 2025-26 में लगभग 19,700 मरीजों का उपचार किया गया। वहीं, ऑस्टियोआर्थराइटिस एवं मस्कुलोस्केलेटल रोग प्रबंधन कार्यक्रम से आठ आयुर्वेद कॉलेजों के माध्यम से 37 हजार से अधिक मरीज लाभान्वित हुए।
कारुण्य कार्यक्रम और पैलिएटिव केयर
'कारुण्य' समेकित सहायक एवं पैलिएटिव केयर कार्यक्रम के तहत बुजुर्गों, दिव्यांगजनों, दीर्घकालिक बीमारियों और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मरीजों को घर-घर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। वर्ष 2025-26 में इस कार्यक्रम के माध्यम से 3,909 मरीजों को लाभ मिला।
यह कार्ययोजना ऐसे समय में आई है जब केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को मुख्यधारा स्वास्थ्य सेवाओं में एकीकृत करने पर जोर बढ़ रहा है। अब देखना होगा कि मंजूर बजट का क्रियान्वयन कितनी तेजी और पारदर्शिता से होता है।