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हैदराबाद में आयुष इको सिस्टम पर राष्ट्रीय कार्यशाला, 30 से अधिक राज्यों के अधिकारी एकजुट

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हैदराबाद में आयुष इको सिस्टम पर राष्ट्रीय कार्यशाला, 30 से अधिक राज्यों के अधिकारी एकजुट

सारांश

हैदराबाद के कान्हा शांति वनम में नीति आयोग की पहल पर 30 से अधिक राज्यों के अधिकारी आयुष इको सिस्टम को मजबूत करने के लिए एकजुट हुए। साथ ही ITRA और हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट के बीच 5 वर्षीय MOU ने आयुर्वेद और योग-ध्यान के संयुक्त अनुसंधान का नया अध्याय खोला।

मुख्य बातें

नीति आयोग द्वारा हैदराबाद के कान्हा शांति वनम में आयुष इको सिस्टम पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई।
30 से अधिक राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ कार्यशाला में सम्मिलित हुए।
केंद्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने सुलभ, जन-केंद्रित और गुणवत्तापूर्ण आयुष सेवाओं को सुदृढ़ करने का आह्वान किया।
ITRA (जामनगर) और हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट (हैदराबाद) के बीच 5 वर्षीय MOU पर अगस्त 2026 में हस्ताक्षर हुए।
MOU के तहत अनुसंधान, छात्र-संकाय विनिमय, ज्ञान साझाकरण और बौद्धिक संपदा विकास पर सहयोग होगा।
आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने जमीनी स्तर पर सेवा वितरण में राज्यों की भूमिका को अहम बताया।

केंद्रीय आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने हैदराबाद के कान्हा शांति वनम में आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यशाला में 30 से अधिक राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से आयुष सेवाओं को सुलभ, जन-केंद्रित और गुणवत्तापूर्ण बनाने का आह्वान किया। नीति आयोग द्वारा आयोजित इस कार्यशाला का विषय था — 'राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में आयुष इको सिस्टम को मजबूत करना'।

कार्यशाला का उद्देश्य और स्वरूप

इस राष्ट्रीय कार्यशाला में केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ 30 से अधिक राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों तथा विभिन्न संगठनों के विशेषज्ञों ने भाग लिया। इसका प्रमुख उद्देश्य साझा अनुभवों, सर्वोत्तम प्रथाओं और सहयोगात्मक कार्रवाई के माध्यम से आयुष पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करना था।

कार्यशाला ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को आयुष स्वास्थ्य सेवा वितरण, शिक्षा, अनुसंधान, क्षमता निर्माण और व्यापक स्वास्थ्य प्रणाली के साथ एकीकरण जैसे प्रमुख क्षेत्रों में नवीन दृष्टिकोण साझा करने का मंच प्रदान किया।

मंत्री और विशेषज्ञों के प्रमुख विचार

मंत्री प्रतापराव जाधव ने आयुष प्रणालियों की पहुँच और प्रभाव बढ़ाने के लिए केंद्र, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के बीच समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने जनसंख्या की बदलती स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए गुणवत्तापूर्ण और जन-केंद्रित आयुष सेवाओं पर अधिक ध्यान देने का आग्रह किया।

प्रोफेसर (डॉ.) एम. श्रीनिवास ने एकीकृत स्वास्थ्य सेवा के लिए प्रौद्योगिकी-एकीकृत और साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोणों के महत्व को रेखांकित किया, जिनमें भारत और उससे बाहर स्वास्थ्य परिणामों में सुधार की क्षमता है। आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने जमीनी स्तर पर आयुष सेवाओं के प्रभावी कार्यान्वयन में राज्यों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।

ITRA और हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट के बीच ऐतिहासिक MOU

कार्यशाला के दौरान एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, जामनगर स्थित राष्ट्रीय महत्व के संस्थान आयुर्वेद शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (ITRA) ने हैदराबाद के कान्हा शांति वनम स्थित हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट (HFI) के साथ पाँच वर्षीय समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए। यह MOU अगस्त 2026 में ITRA की निदेशक प्रो. तनुजा नेसारी और हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट के कुमार कन्नन द्वारा हस्ताक्षरित किया गया।

यह समझौता आयुर्वेद शिक्षा, नैदानिक अभ्यास और अनुसंधान में ITRA की विशेषज्ञता तथा ध्यान, योग, जीवनशैली प्रथाओं और पर्यावरण पहलों में HFI की क्षमताओं को एक साझा ढाँचे में जोड़ता है। इस साझेदारी का उद्देश्य एकीकृत दृष्टिकोण के साथ निवारक और समग्र स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा देना है।

सहयोग के प्रमुख क्षेत्र और आगे की राह

MOU के अंतर्गत सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोगात्मक अनुसंधान, छात्र एवं संकाय विनिमय कार्यक्रम, शैक्षणिक पहल, ज्ञान साझाकरण, क्षमता विकास, नवाचार और बौद्धिक संपदा विकास शामिल हैं। यह साझेदारी रोग निवारण और समग्र स्वास्थ्य से जुड़े क्षेत्रों में अनुसंधान एवं शैक्षणिक सहयोग को भी प्रोत्साहित करेगी।

गौरतलब है कि यह सहयोग आयुष मंत्रालय के साक्ष्य-आधारित अनुसंधान, निवारक स्वास्थ्य देखभाल, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आयुर्वेद के वैश्विक प्रचार-प्रसार के व्यापक लक्ष्यों के अनुरूप है। विशेषज्ञों के अनुसार, केंद्र-राज्य समन्वय और इस तरह की संस्थागत साझेदारियाँ भारत में आयुष को मुख्यधारा की स्वास्थ्य सेवा में एकीकृत करने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन भारत में आयुष बजट और अवसंरचना अभी भी एलोपैथी की तुलना में बेहद सीमित है। ITRA और हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट का MOU संस्थागत सहयोग की दिशा में सकारात्मक कदम है, पर असली परीक्षा यह होगी कि यह शोध साझेदारी जमीनी स्वास्थ्य परिणामों में कितना बदलाव ला पाती है। 30 से अधिक राज्यों की भागीदारी केंद्र-राज्य समन्वय का संकेत देती है, किंतु आलोचकों का कहना है कि बिना पर्याप्त वित्तपोषण और प्रशिक्षित जनशक्ति के, ऐसी कार्यशालाएँ नीतिगत इच्छाशक्ति से आगे नहीं बढ़ पातीं।
RashtraPress
9 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हैदराबाद में आयुष इको सिस्टम पर राष्ट्रीय कार्यशाला क्या थी?
यह नीति आयोग द्वारा हैदराबाद के कान्हा शांति वनम में आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यशाला थी, जिसमें 30 से अधिक राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल हुए। इसका उद्देश्य साझा अनुभवों और सर्वोत्तम प्रथाओं के माध्यम से देशभर में आयुष पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करना था।
ITRA और हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट के बीच MOU किस बारे में है?
जामनगर स्थित ITRA और हैदराबाद के हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट के बीच अगस्त 2026 में 5 वर्षीय MOU हस्ताक्षरित हुआ। यह समझौता आयुर्वेद शिक्षा, नैदानिक अभ्यास, ध्यान, योग और पर्यावरण पहलों में दोनों संस्थाओं की पूरक शक्तियों को एकजुट करता है, और निवारक व समग्र स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा देना इसका मुख्य लक्ष्य है।
इस कार्यशाला में केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने क्या कहा?
केंद्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से आयुष सेवाओं की गुणवत्ता, सुलभता और जन-केंद्रित वितरण पर ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने केंद्र और राज्यों के बीच समन्वित प्रयासों को आयुष प्रणालियों की पहुँच बढ़ाने के लिए अनिवार्य बताया।
ITRA और HFI के MOU के तहत सहयोग के कौन-से क्षेत्र शामिल हैं?
MOU के अंतर्गत राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोगात्मक अनुसंधान, छात्र एवं संकाय विनिमय कार्यक्रम, शैक्षणिक पहल, ज्ञान साझाकरण, क्षमता विकास, नवाचार और बौद्धिक संपदा विकास शामिल हैं। यह साझेदारी रोग निवारण और समग्र स्वास्थ्य से जुड़े क्षेत्रों में अनुसंधान को भी प्रोत्साहित करेगी।
आयुष इको सिस्टम को मजबूत करने में राज्यों की भूमिका क्या है?
आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा के अनुसार, जमीनी स्तर पर आयुष सेवाओं के प्रभावी कार्यान्वयन और वितरण में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की भूमिका केंद्रीय है। राज्य सरकारें स्थानीय स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुरूप आयुष सेवाओं को अनुकूलित कर सकती हैं और केंद्र-राज्य समन्वय से इसकी पहुँच व्यापक हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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