31 जुलाई 2026
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आयुष मंत्रालय और इंडियाएआई मिशन में MOU, एआई से पारंपरिक चिकित्सा को मिलेगी वैज्ञानिक मज़बूती

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आयुष मंत्रालय और इंडियाएआई मिशन में MOU, एआई से पारंपरिक चिकित्सा को मिलेगी वैज्ञानिक मज़बूती

सारांश

आयुष मंत्रालय और इंडियाएआई मिशन के बीच हुआ MOU भारत की सदियों पुरानी चिकित्सा परंपरा को एआई की आधुनिक ताकत से जोड़ने की पहल है। एआईकोष प्लेटफॉर्म, HPC सुविधाएँ और शोध डेटा साझेदारी से आयुर्वेद, योग और अन्य पद्धतियों को वैज्ञानिक वैधता और वैश्विक पहचान दिलाने की कोशिश है।

मुख्य बातें

आयुष मंत्रालय और इंडियाएआई मिशन के बीच 31 जुलाई 2026 को समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर।
कविता जैन (आयुष मंत्रालय) और सुदीप श्रीवास्तव (MeitY/इंडियाएआई) ने हस्ताक्षर किए।
आयुष मंत्रालय अपनी शोध सामग्री, स्वास्थ्य डेटा और एआई मॉडल एआईकोष प्लेटफॉर्म पर साझा करेगा।
हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और GPU सुविधाएँ इंडियाएआई पहल के ज़रिए आयुष शोधकर्ताओं को उपलब्ध होंगी।
औषधीय पौधों की पहचान, दवाओं के प्रभाव अध्ययन और प्रशिक्षण में एआई के उपयोग का विस्तार होगा।
आयुष ग्रिड के उभरती प्रौद्योगिकी कार्यक्रम के तहत एआई-आधारित प्लेटफॉर्म पहले से विकसित किए जा रहे हैं।

केंद्रीय आयुष मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के इंडियाएआई मिशन के बीच 31 जुलाई 2026 को एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए गए, जिसका उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की शक्ति को भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों — आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी — से जोड़ना है। यह साझेदारी आयुष क्षेत्र में डिजिटल शोध, स्वास्थ्य सेवाओं और तकनीकी विकास को नई दिशा देने की कोशिश है।

समझौते का ब्यौरा और हस्ताक्षरकर्ता

इस MOU पर आयुष मंत्रालय की ओर से संयुक्त सचिव एवं मुख्य सतर्कता अधिकारी डॉ. कविता जैन और इंडियाएआई मिशन की ओर से मुख्य परिचालन अधिकारी एवं MeitY के संयुक्त सचिव सुदीप श्रीवास्तव ने हस्ताक्षर किए। दोनों मंत्रालयों के कई वरिष्ठ अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

यह ऐसे समय में आया है जब सरकार भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक वैज्ञानिक मंच पर स्थापित करने के लिए लगातार प्रयासरत है। आयुष ग्रिड के उभरती प्रौद्योगिकी कार्यक्रम के तहत पहले से ही एआई-आधारित प्लेटफॉर्म विकसित किए जा रहे हैं।

एआईकोष प्लेटफॉर्म और डेटा साझेदारी

समझौते के अंतर्गत आयुष मंत्रालय अपनी योग्य शोध सामग्री — जिसमें स्वास्थ्य डेटा, एआई मॉडल, तकनीकी उपकरण और उपयोग के उदाहरण शामिल हैं — एआईकोष प्लेटफॉर्म पर साझा करेगा। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से वैज्ञानिकों, चिकित्सकों और शोधकर्ताओं को एआई-आधारित समाधान विकसित करने का एकीकृत मंच मिलेगा।

इंडियाएआई पहल के तहत हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (HPC) और GPU जैसी उन्नत कंप्यूटिंग सुविधाएँ भी उपलब्ध कराई जाएंगी, जिनसे बड़े पैमाने पर एआई-आधारित चिकित्सा शोध संभव हो सकेगा।

विशेषज्ञों की राय

डॉ. कविता जैन ने कहा कि एआई को आयुष से जोड़ने से पुराने चिकित्सा ज्ञान को बेहतर तरीके से समझा और सुरक्षित रखा जा सकेगा। उन्होंने बताया कि औषधीय पौधों, दवाओं के उपयोग, शोध कार्यों और प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा।

सुदीप श्रीवास्तव ने कहा कि भारत की पारंपरिक चिकित्सा और आधुनिक तकनीक का यह मेल एक महत्वपूर्ण कदम है। आयुष ग्रिड के अधिकारी नमन गोयल ने इसे आयुष क्षेत्र में डिजिटल बदलाव की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।

आम जनता और शोधकर्ताओं पर असर

भविष्य में एआई की सहायता से औषधीय पौधों की पहचान, दवाओं के प्रभाव का अध्ययन और शोध प्रक्रियाओं में तेज़ी लाई जा सकती है। इससे आयुष चिकित्सा को अधिक वैज्ञानिक आधार मिलेगा और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच आम नागरिकों तक व्यापक होगी।

गौरतलब है कि यह साझेदारी आयुष क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की उस दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें पारंपरिक ज्ञान को डिजिटल और डेटा-संचालित ढाँचे में ढालने की कोशिश की जा रही है।

आगे की राह

इस MOU के लागू होने के बाद दोनों पक्ष मिलकर एआई-आधारित शोध परियोजनाएँ शुरू करेंगे। शोधकर्ताओं को नई तकनीक के उपयोग का अवसर मिलेगा और आयुष से जुड़ी जानकारियों को अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय के सामने अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सकेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि एआईकोष पर साझा होने वाला आयुष डेटा कितना मानकीकृत और सत्यापन-योग्य होगा — क्योंकि पारंपरिक चिकित्सा का ज्ञान अक्सर असंरचित, बहुभाषी और व्यक्तिनिष्ठ होता है, जो एआई मॉडलों के लिए बड़ी चुनौती है। इससे पहले भी आयुष ग्रिड जैसी डिजिटल पहलें घोषणाओं के बाद क्रियान्वयन की गति में पिछड़ी हैं। यदि डेटा गुणवत्ता और अंतर-संचालनीयता पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह साझेदारी वैज्ञानिक मान्यता के बजाय केवल डिजिटलीकरण की कवायद बनकर रह सकती है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आयुष मंत्रालय और इंडियाएआई मिशन के बीच MOU क्या है?
यह 31 जुलाई 2026 को हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन है, जिसके तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से आयुष क्षेत्र में शोध, डिजिटल सेवाएँ और तकनीकी विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। इसमें एआईकोष प्लेटफॉर्म पर आयुष शोध डेटा साझा करना और HPC सुविधाएँ उपलब्ध कराना शामिल है।
एआईकोष प्लेटफॉर्म आयुष के लिए कैसे उपयोगी होगा?
एआईकोष एक राष्ट्रीय एआई डेटा प्लेटफॉर्म है जिस पर आयुष मंत्रालय अपनी शोध सामग्री, स्वास्थ्य डेटा और एआई मॉडल साझा करेगा। इससे वैज्ञानिक, चिकित्सक और शोधकर्ता एआई-आधारित नए समाधान विकसित कर सकेंगे और पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान को डिजिटल रूप में संरक्षित किया जा सकेगा।
इस साझेदारी से आम मरीज़ों को क्या फायदा होगा?
भविष्य में एआई की मदद से औषधीय पौधों की सटीक पहचान, दवाओं के प्रभाव का त्वरित अध्ययन और आयुष स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर पहुँच संभव हो सकती है। इससे आयुर्वेद, योग और अन्य पारंपरिक पद्धतियों को अधिक वैज्ञानिक आधार मिलेगा, जिससे उपचार की विश्वसनीयता बढ़ेगी।
MOU पर किसने हस्ताक्षर किए?
आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव एवं मुख्य सतर्कता अधिकारी डॉ. कविता जैन और इंडियाएआई मिशन के मुख्य परिचालन अधिकारी एवं MeitY के संयुक्त सचिव सुदीप श्रीवास्तव ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।
आयुष ग्रिड और इंडियाएआई मिशन में क्या संबंध है?
आयुष ग्रिड पहले से ही अपने उभरती प्रौद्योगिकी कार्यक्रम के तहत एआई-आधारित प्लेटफॉर्म विकसित कर रहा है। इंडियाएआई मिशन के साथ यह MOU उन प्रयासों को HPC, GPU और एआईकोष जैसी राष्ट्रीय डिजिटल अवसंरचना से जोड़कर और अधिक व्यापक बनाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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