29 अक्टूबर 2026
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लोक केरल सभा खत्म, मुख्यमंत्री सतीशन ने विधानसभा में बताया नया विकल्प

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लोक केरल सभा खत्म, मुख्यमंत्री सतीशन ने विधानसभा में बताया नया विकल्प

सारांश

लोक केरल सभा बंद — अब क्या? केरल सरकार ने 2018 में बनाए गए प्रवासी मंच को खत्म कर ग्लोबल नोरका कोऑर्डिनेशन काउंसिल का प्रस्ताव रखा है। लेकिन प्रवासी कल्याण बोर्ड पर ₹700 करोड़ का बकाया और हर महीने ₹18 करोड़ का घाटा बताता है कि चुनौती सिर्फ नाम बदलने से नहीं सुलझेगी।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने 29 अक्टूबर 2026 को केरल विधानसभा में लोक केरल सभा को समाप्त करने के फैसले का बचाव किया।
सरकार ने ग्लोबल नोरका कोऑर्डिनेशन काउंसिल बनाने का प्रस्ताव रखा है; मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में समिति नई व्यवस्था पर विचार कर रही है।
प्रवासी कल्याण बोर्ड की मासिक आय ₹16.7 करोड़ , जबकि खर्च ₹35 करोड़ — यानी हर माह भारी घाटा।
बोर्ड पर ₹700 करोड़ से अधिक का अंशदान बकाया; सरकार ने पाँच महीनों में पेंशन के लिए ₹32 करोड़ दिए।
लोक केरल सभा की स्थापना 2018 में पिनाराई विजयन सरकार ने की थी, जिसका UDF ने उस समय बहिष्कार किया था।

केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने 29 अक्टूबर 2026 को केरल विधानसभा में स्पष्ट किया कि लोक केरल सभा को उसके मौजूदा स्वरूप में बंद कर दिया गया है और सरकार जल्द ही दुनिया भर में बसे प्रवासी मलयालियों के लिए एक नई, अधिक प्रभावी संस्थागत व्यवस्था लाएगी। उन्होंने विधानसभा में प्रवासी कल्याण योजनाओं में देरी और लोक केरल सभा को समाप्त किए जाने से संबंधित स्थगन प्रस्ताव पर जवाब देते हुए यह बयान दिया।

लोक केरल सभा का इतिहास और समापन

लोक केरल सभा की स्थापना वर्ष 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली वाम सरकार ने की थी। इसका उद्देश्य दुनिया भर में बसे मलयाली समुदाय के प्रतिनिधियों और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को एक साझा मंच पर लाकर प्रवास, निवेश, कल्याण और अनिवासी केरलवासियों (NRK) से जुड़े मुद्दों पर संवाद कराना था। गौरतलब है कि उस दौर में विपक्ष में रही कांग्रेस नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) ने इस मंच की बैठकों का बहिष्कार किया था — उनका आरोप था कि इस पर अनावश्यक सार्वजनिक धन खर्च किया जाता है और इसकी सिफारिशों को व्यवहार में लागू नहीं किया जाता। अब जब UDF सत्ता में है, तो उसी सरकार ने इस मंच को बंद कर दिया है — जो एक राजनीतिक विडंबना के रूप में देखा जा रहा है।

प्रस्तावित नई व्यवस्था

मुख्यमंत्री सतीशन ने बताया कि सरकार एक ऐसी नई प्रणाली पर विचार कर रही है जिसके जरिए प्रवासी भारतीय अपनी समस्याएँ सीधे सरकार तक पहुँचा सकें, राज्य के विकास में सक्रिय योगदान दे सकें और अपने निवेश को उत्पादक क्षेत्रों में लगा सकें। सरकार ने प्रवासी समुदाय और उनके संगठनों के साथ नियमित संवाद सुनिश्चित करने के लिए ग्लोबल नोरका कोऑर्डिनेशन काउंसिल बनाने का प्रस्ताव रखा है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक समिति इस पर विचार कर रही है कि प्रवासियों के लिए कौन-सी संस्थागत व्यवस्था सबसे कारगर होगी।

प्रवासी कल्याण बोर्ड की आर्थिक स्थिति

विधानसभा में हुई चर्चा के दौरान प्रवासी कल्याण बोर्ड की वित्तीय स्थिति की गंभीर तस्वीर सामने आई। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2020-21 में बोर्ड के सदस्यों की संख्या 17,771 थी, जो अब बढ़कर 1,00,495 हो गई है। बोर्ड की औसत मासिक आय करीब ₹16.7 करोड़ है, जबकि मासिक खर्च लगभग ₹35 करोड़ तक पहुँच गया है — यानी हर महीने दोगुने से अधिक का घाटा। पिछले पाँच महीनों में राज्य सरकार ने पेंशन भुगतान के लिए ₹32 करोड़ दिए हैं, फिर भी बकाया भुगतान अभी शेष है।

₹700 करोड़ से अधिक का अंशदान बकाया

मुख्यमंत्री के अनुसार, बोर्ड के पास ₹700 करोड़ से अधिक का अंशदान बकाया है। उन्होंने प्रवासी संगठनों से इस राशि की वसूली में सहयोग का आग्रह किया। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि नोरका की बीमा योजनाओं के तहत दावों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है, जिससे इन योजनाओं का नवीनीकरण कठिन हो गया है। सरकार अब इन योजनाओं के लिए नई व्यवस्था पर काम कर रही है।

हवाई किराए और आम प्रवासी मज़दूरों की चिंता

मुख्यमंत्री सतीशन ने प्रवासी श्रमिकों की एक और बड़ी समस्या — बढ़ते हवाई किराए — का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने कई बार केंद्र सरकार से हवाई किरायों को नियंत्रित करने का अनुरोध किया है, क्योंकि घर आने-जाने का बढ़ता खर्च आम प्रवासी श्रमिकों की मेहनत की कमाई को तेज़ी से खत्म कर रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि नई सरकार की असली परीक्षा यही होगी कि प्रस्तावित व्यवस्था पुराने मंच की जगह केवल एक नया नाम बनकर न रह जाए, बल्कि प्रवासियों को ठोस लाभ पहुँचाए। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि लोक केरल सभा के विकल्प के रूप में नई व्यवस्था शीघ्र लाई जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

वही अब सत्ता में आकर उसे बंद कर रही है — लेकिन उसके बदले में एक और नई संस्था बनाने का प्रस्ताव रख रही है। असली सवाल संस्था के नाम का नहीं, उसकी क्रियाशीलता का है। प्रवासी कल्याण बोर्ड का वित्तीय संकट — हर माह ₹18 करोड़ से अधिक का घाटा और ₹700 करोड़ से अधिक का बकाया — यह बताता है कि समस्या ढाँचागत है, सिर्फ राजनीतिक नहीं। ग्लोबल नोरका काउंसिल तब तक प्रभावी नहीं होगी जब तक कि बोर्ड की वित्तीय व्यवहार्यता और बीमा योजनाओं की टिकाऊपन पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लोक केरल सभा क्या थी और इसे क्यों बंद किया गया?
लोक केरल सभा वर्ष 2018 में पिनाराई विजयन सरकार द्वारा स्थापित एक मंच था, जो दुनिया भर के प्रवासी मलयालियों और जनप्रतिनिधियों को प्रवास, निवेश और कल्याण के मुद्दों पर संवाद का अवसर देता था। मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने कहा कि यह मंच अपने उद्देश्यों को पूरा करने में सफल नहीं रहा, इसलिए इसे समाप्त कर एक अधिक प्रभावी व्यवस्था लाई जाएगी।
लोक केरल सभा की जगह केरल सरकार क्या नई व्यवस्था लाने वाली है?
केरल सरकार ने ग्लोबल नोरका कोऑर्डिनेशन काउंसिल बनाने का प्रस्ताव रखा है, जो प्रवासी समुदाय और उनके संगठनों के साथ नियमित संवाद सुनिश्चित करेगी। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक समिति इस बारे में विचार कर रही है कि प्रवासी मलयालियों के लिए कौन-सी संस्थागत व्यवस्था सर्वाधिक उपयुक्त होगी।
प्रवासी कल्याण बोर्ड का वित्तीय संकट कितना गंभीर है?
बोर्ड की मासिक आय करीब ₹16.7 करोड़ है जबकि मासिक खर्च लगभग ₹35 करोड़ है — यानी हर महीने लगभग ₹18 करोड़ से अधिक का घाटा। इसके अलावा बोर्ड पर ₹700 करोड़ से अधिक का अंशदान बकाया है और पेंशन भुगतान भी अभी बाकी है।
नोरका बीमा योजनाओं का नवीनीकरण क्यों मुश्किल हो गया है?
मुख्यमंत्री सतीशन के अनुसार, नोरका की बीमा योजनाओं के तहत दावों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है, जिससे इन योजनाओं का नवीनीकरण कठिन हो गया है। सरकार अब इन योजनाओं के लिए एक नई व्यवस्था पर काम कर रही है।
प्रवासी मलयालियों के हवाई किराए की समस्या पर सरकार का क्या रुख है?
मुख्यमंत्री सतीशन ने कहा कि राज्य सरकार ने कई बार केंद्र सरकार से हवाई किरायों को नियंत्रित करने का अनुरोध किया है। उनके अनुसार, घर आने-जाने का बढ़ता खर्च आम प्रवासी श्रमिकों की बचत को खत्म कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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