21 सितंबर 2026
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लोक केरल सभा का छठा संस्करण नहीं होगा, सतीशन सरकार ने फंड देने से किया इनकार

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लोक केरल सभा का छठा संस्करण नहीं होगा, सतीशन सरकार ने फंड देने से किया इनकार

सारांश

केरल में सत्ता बदलते ही लोक केरल सभा का भविष्य अंधेरे में चला गया। सतीशन सरकार ने साफ कर दिया — छठे संस्करण के लिए एक रुपया भी नहीं मिलेगा। पिनाराई विजयन की महत्वाकांक्षी प्रवासी मंच योजना अब इतिहास बन चुकी है, और नोरका उसकी जगह लेगा।

मुख्य बातें

सतीशन की यूडीएफ सरकार ने लोक केरल सभा के छठे संस्करण के लिए कोई बजटीय प्रावधान नहीं किया।
सीएमओ ने 21 सितंबर 2026 को आधिकारिक बयान में कहा — एलडीएफ मॉडल पर कार्यक्रम जारी नहीं रखने का निर्णय यूडीएफ का राजनीतिक फैसला है।
पाँचवाँ संस्करण जनवरी 2026 में तिरुवनंतपुरम में हुआ था, जिसमें 125 देशों और भारत के 28 राज्यों से 500 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए थे।
प्रवासी कल्याण के लिए नोरका (NORKA) के माध्यम से कार्यक्रम जारी रहेंगे; लोक केरल सभा सचिवालय के प्रशासनिक खर्च के लिए धन आवंटित है।
यूडीएफ ने विपक्ष में रहते हुए इस मंच पर सार्वजनिक धन के अपव्यय का आरोप लगाया था और सभी पाँच संस्करणों का बहिष्कार किया था।

केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन की यूडीएफ सरकार ने 21 सितंबर 2026 को स्पष्ट कर दिया कि लोक केरल सभा का छठा संस्करण उसके पूर्व स्वरूप में आयोजित नहीं किया जाएगा और आगामी वित्तीय वर्ष में इस कार्यक्रम के लिए कोई बजटीय प्रावधान नहीं किया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने सोमवार को जारी अपने बयान में इस निर्णय को 'यूडीएफ का राजनीतिक फैसला' करार दिया और कहा कि इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।

सीएमओ का आधिकारिक बयान

मुख्यमंत्री कार्यालय ने सोमवार को जारी बयान में कहा, 'लोक केरल सभा को जारी नहीं रखने का फैसला यूडीएफ का राजनीतिक निर्णय है और इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।' यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया जब कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा था कि विपक्ष के नेता रहते हुए सतीशन ने जो रुख अपनाया था, उससे वे अब पीछे हट गए हैं। सीएमओ ने इन दावों को सिरे से नकारते हुए स्थिति स्पष्ट की।

लोक केरल सभा: पृष्ठभूमि और विवाद

लोक केरल सभा की परिकल्पना तत्कालीन मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की एलडीएफ सरकार ने की थी, जिसका उद्देश्य दुनियाभर में बसे प्रवासी मलयालियों को केरल के विकास और उनसे जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए एक साझा मंच देना था। उस समय कांग्रेस नीत यूडीएफ ने इस कार्यक्रम से दूरी बनाए रखी थी और सार्वजनिक धन के कथित अपव्यय का आरोप लगाया था। वी.डी. सतीशन स्वयं इस मंच के मुखर आलोचकों में रहे और यूडीएफ ने इसके आधिकारिक सत्रों का बहिष्कार किया था।

गौरतलब है कि लोक केरल सभा का पाँचवाँ संस्करण जनवरी 2026 में तिरुवनंतपुरम में आयोजित हुआ था, जिसमें 125 देशों और भारत के 28 राज्यों से 500 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। यूडीएफ ने उस कार्यक्रम से भी दूरी बनाए रखी थी।

प्रवासी कल्याण जारी रहेगा: सरकार का आश्वासन

सरकार ने स्पष्ट किया कि लोक केरल सभा को बंद करने का अर्थ यह नहीं है कि प्रवासी कल्याण से जुड़ी गतिविधियाँ रोकी जाएंगी। नोरका (NORKA) के माध्यम से आयोजित कार्यक्रमों, बिजनेस लीडरशिप बैठकों और प्रवासी केरलवासियों से जुड़े अन्य कार्यक्रमों के लिए बजट में धन का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, लोक केरल सभा सचिवालय का कार्यालय पहले से मौजूद है और उसके प्रशासनिक खर्चों के लिए धन आवंटित किया गया है।

सरकार ने यह भी बताया कि यह राशि प्रवासी कल्याण से जुड़े प्रस्तावों को लागू करने की प्रारंभिक लागत पूरी करने के लिए भी निर्धारित की गई है। सरकार का कहना है कि प्रवासी भारतीयों का कल्याण उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है।

राजनीतिक महत्व

यह निर्णय केरल की राजनीति में यूडीएफ और एलडीएफ के बीच की गहरी वैचारिक खाई को रेखांकित करता है। लोक केरल सभा एलडीएफ की उस विरासत का हिस्सा थी जिसे वह प्रवासी समुदाय के साथ संस्थागत जुड़ाव के रूप में प्रस्तुत करती थी। आलोचकों का कहना है कि इस मंच के बंद होने से उन प्रवासी मलयालियों को निराशा होगी जिन्होंने इसे एक प्रभावशाली संवाद का माध्यम माना था।

आगे क्या होगा

सरकार के ताज़ा स्पष्टीकरण से यह लगभग तय हो गया है कि एलडीएफ के मॉडल पर लोक केरल सभा का छठा संस्करण आयोजित नहीं होगा। हालाँकि, सतीशन सरकार ने संकेत दिया है कि वह नोरका और अन्य कल्याणकारी कार्यक्रमों के माध्यम से प्रवासी मलयालियों से जुड़ाव बनाए रखेगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नया ढाँचा प्रवासी समुदाय की अपेक्षाओं पर कितना खरा उतरता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि क्या नोरका-केंद्रित विकल्प वाकई प्रवासी मलयालियों की उन अपेक्षाओं को पूरा कर सकेगा जो एक संस्थागत संवाद मंच से जुड़ी थीं। दिलचस्प यह है कि सरकार ने सचिवालय का कार्यालय बनाए रखा है — जो संकेत देता है कि भविष्य में किसी नए स्वरूप में इसे पुनर्जीवित करने का विकल्प खुला रखा गया है। केरल में प्रवासी समुदाय की आर्थिक और सामाजिक भूमिका को देखते हुए, इस वर्ग से संस्थागत दूरी राजनीतिक जोखिम भी बन सकती है। असली परीक्षा यह होगी कि नोरका के माध्यम से वह जुड़ाव और प्रतिनिधित्व मिल पाता है या नहीं जो लोक केरल सभा प्रदान करती थी।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लोक केरल सभा क्या है और इसे क्यों बंद किया जा रहा है?
लोक केरल सभा एलडीएफ सरकार द्वारा शुरू किया गया वह मंच था जो दुनियाभर में बसे प्रवासी मलयालियों को केरल के विकास से जोड़ने के लिए बनाया गया था। यूडीएफ ने विपक्ष में रहते हुए इसे सार्वजनिक धन के अपव्यय के रूप में आलोचना की थी और अब सत्ता में आने के बाद इसे उसी स्वरूप में जारी न रखने का फैसला लिया है।
लोक केरल सभा के छठे संस्करण के लिए फंड क्यों नहीं दिया गया?
मुख्यमंत्री कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि यह यूडीएफ का राजनीतिक निर्णय है और आगामी वित्तीय वर्ष में छठे संस्करण के लिए कोई बजट आवंटित नहीं किया गया है। सरकार का कहना है कि एलडीएफ मॉडल पर कार्यक्रम जारी रखने पर कोई विचार नहीं हो रहा।
क्या केरल सरकार प्रवासी कल्याण से जुड़ी गतिविधियाँ पूरी तरह बंद कर देगी?
नहीं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नोरका (NORKA) के माध्यम से आयोजित कार्यक्रमों, बिजनेस लीडरशिप बैठकों और अन्य प्रवासी कल्याण कार्यक्रमों के लिए बजट में धन का प्रावधान किया गया है। लोक केरल सभा सचिवालय का कार्यालय भी बना रहेगा और उसके प्रशासनिक खर्चों के लिए राशि आवंटित है।
लोक केरल सभा का पाँचवाँ संस्करण कब और कहाँ हुआ था?
लोक केरल सभा का पाँचवाँ संस्करण जनवरी 2026 में तिरुवनंतपुरम में आयोजित हुआ था, जिसमें 125 देशों और भारत के 28 राज्यों से 500 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। यूडीएफ ने उस कार्यक्रम का भी बहिष्कार किया था।
सतीशन सरकार के इस फैसले का राजनीतिक संदर्भ क्या है?
वी.डी. सतीशन विपक्ष के नेता के रूप में लोक केरल सभा के मुखर आलोचक रहे थे। सत्ता में आने के बाद जब कुछ रिपोर्टों में यह कहा गया कि वे अपने पुराने रुख से पीछे हट सकते हैं, तो सीएमओ ने इसे सिरे से नकारते हुए स्पष्ट किया कि निर्णय में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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