लोक केरल सभा का छठा संस्करण नहीं होगा, सतीशन सरकार ने फंड देने से किया इनकार
सारांश
मुख्य बातें
केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन की यूडीएफ सरकार ने 21 सितंबर 2026 को स्पष्ट कर दिया कि लोक केरल सभा का छठा संस्करण उसके पूर्व स्वरूप में आयोजित नहीं किया जाएगा और आगामी वित्तीय वर्ष में इस कार्यक्रम के लिए कोई बजटीय प्रावधान नहीं किया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने सोमवार को जारी अपने बयान में इस निर्णय को 'यूडीएफ का राजनीतिक फैसला' करार दिया और कहा कि इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।
सीएमओ का आधिकारिक बयान
मुख्यमंत्री कार्यालय ने सोमवार को जारी बयान में कहा, 'लोक केरल सभा को जारी नहीं रखने का फैसला यूडीएफ का राजनीतिक निर्णय है और इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।' यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया जब कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा था कि विपक्ष के नेता रहते हुए सतीशन ने जो रुख अपनाया था, उससे वे अब पीछे हट गए हैं। सीएमओ ने इन दावों को सिरे से नकारते हुए स्थिति स्पष्ट की।
लोक केरल सभा: पृष्ठभूमि और विवाद
लोक केरल सभा की परिकल्पना तत्कालीन मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की एलडीएफ सरकार ने की थी, जिसका उद्देश्य दुनियाभर में बसे प्रवासी मलयालियों को केरल के विकास और उनसे जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए एक साझा मंच देना था। उस समय कांग्रेस नीत यूडीएफ ने इस कार्यक्रम से दूरी बनाए रखी थी और सार्वजनिक धन के कथित अपव्यय का आरोप लगाया था। वी.डी. सतीशन स्वयं इस मंच के मुखर आलोचकों में रहे और यूडीएफ ने इसके आधिकारिक सत्रों का बहिष्कार किया था।
गौरतलब है कि लोक केरल सभा का पाँचवाँ संस्करण जनवरी 2026 में तिरुवनंतपुरम में आयोजित हुआ था, जिसमें 125 देशों और भारत के 28 राज्यों से 500 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। यूडीएफ ने उस कार्यक्रम से भी दूरी बनाए रखी थी।
प्रवासी कल्याण जारी रहेगा: सरकार का आश्वासन
सरकार ने स्पष्ट किया कि लोक केरल सभा को बंद करने का अर्थ यह नहीं है कि प्रवासी कल्याण से जुड़ी गतिविधियाँ रोकी जाएंगी। नोरका (NORKA) के माध्यम से आयोजित कार्यक्रमों, बिजनेस लीडरशिप बैठकों और प्रवासी केरलवासियों से जुड़े अन्य कार्यक्रमों के लिए बजट में धन का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, लोक केरल सभा सचिवालय का कार्यालय पहले से मौजूद है और उसके प्रशासनिक खर्चों के लिए धन आवंटित किया गया है।
सरकार ने यह भी बताया कि यह राशि प्रवासी कल्याण से जुड़े प्रस्तावों को लागू करने की प्रारंभिक लागत पूरी करने के लिए भी निर्धारित की गई है। सरकार का कहना है कि प्रवासी भारतीयों का कल्याण उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है।
राजनीतिक महत्व
यह निर्णय केरल की राजनीति में यूडीएफ और एलडीएफ के बीच की गहरी वैचारिक खाई को रेखांकित करता है। लोक केरल सभा एलडीएफ की उस विरासत का हिस्सा थी जिसे वह प्रवासी समुदाय के साथ संस्थागत जुड़ाव के रूप में प्रस्तुत करती थी। आलोचकों का कहना है कि इस मंच के बंद होने से उन प्रवासी मलयालियों को निराशा होगी जिन्होंने इसे एक प्रभावशाली संवाद का माध्यम माना था।
आगे क्या होगा
सरकार के ताज़ा स्पष्टीकरण से यह लगभग तय हो गया है कि एलडीएफ के मॉडल पर लोक केरल सभा का छठा संस्करण आयोजित नहीं होगा। हालाँकि, सतीशन सरकार ने संकेत दिया है कि वह नोरका और अन्य कल्याणकारी कार्यक्रमों के माध्यम से प्रवासी मलयालियों से जुड़ाव बनाए रखेगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नया ढाँचा प्रवासी समुदाय की अपेक्षाओं पर कितना खरा उतरता है।