29 अक्टूबर 2026
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कर्नाटक कैबिनेट ने जनजातीय विकास निगम को मंजूरी दी, ₹33.36 करोड़ से होगी स्थापना

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कर्नाटक कैबिनेट ने जनजातीय विकास निगम को मंजूरी दी, ₹33.36 करोड़ से होगी स्थापना

सारांश

कर्नाटक कैबिनेट ने ₹33.36 करोड़ की लागत से 'कर्नाटक जनजातीय विकास निगम' बनाने को मंजूरी दी — यह राज्य के 33 अनुसूचित जनजाति समुदायों, खासकर इरुला, सोलिगा और सिद्दी जैसे पीवीटीजी समूहों के लिए एक समर्पित ढाँचा है, जो 2026-27 के बजट वादे को अमल में लाता है।

मुख्य बातें

कर्नाटक कैबिनेट ने 29 अक्टूबर 2026 को 'कर्नाटक जनजातीय विकास निगम' की स्थापना को मंजूरी दी।
निगम की स्थापना ₹33.36 करोड़ के अनुदान से होगी।
निगम के दायरे में 33 अनुसूचित जनजाति समुदाय आएंगे, जिनमें इरुला, सोलिगा, जेनुकुरुबा, कडु कुरुबा, कुडिया और सिद्दी प्रमुख हैं।
निगम का ध्यान आर्थिक सशक्तिकरण, कौशल विकास, उद्यमिता और बाज़ार पहुँच पर रहेगा।
यह निर्णय पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया द्वारा 2026-27 राज्य बजट में की गई घोषणा को पूरा करता है।

कर्नाटक मंत्रिमंडल ने 29 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु स्थित विधान सौधा में हुई कैबिनेट बैठक में 'कर्नाटक जनजातीय विकास निगम' की स्थापना को औपचारिक मंजूरी दे दी। ₹33.36 करोड़ के अनुदान से स्थापित होने वाले इस नए निगम का उद्देश्य राज्य के 33 अनुसूचित जनजाति समुदायों — विशेषकर विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) — के सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक विकास को गति देना है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में लिया गया यह निर्णय राज्य के जनजातीय कल्याण ढाँचे में एक महत्त्वपूर्ण विस्तार है।

निगम की जरूरत क्यों पड़ी

कर्नाटक में पहले से ही कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम, कर्नाटक मेदारा विकास निगम और खानाबदोश समुदाय विकास निगम जैसी संस्थाएँ कार्यरत हैं। ये निगम अपने-अपने पारंपरिक व्यवसायों और निवास स्थानों के आधार पर विशिष्ट समुदायों की सेवा करते हैं।

हालाँकि, सरकार ने महसूस किया कि पीवीटीजी श्रेणी के समुदायों की जरूरतें इतनी विशिष्ट और गहरी हैं कि उनके लिए एक समर्पित निकाय अपरिहार्य है। एसटी कल्याण मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, मौजूदा निगमों का ध्यान व्यापक समुदायों पर केंद्रित रहा, जिससे पीवीटीजी समूह प्रायः उचित लाभ से वंचित रह जाते थे।

किन समुदायों को मिलेगा लाभ

नए निगम के दायरे में मुख्यतः वे जनजातीय समुदाय आएंगे जो वन क्षेत्रों और उनके आसपास निवास करते हैं। इनमें इरुला, सोलिगा, जेनुकुरुबा, कडु कुरुबा, कुडिया और सिद्दी समुदाय शामिल हैं।

गौरतलब है कि ये समुदाय सूक्ष्म और अति-सूक्ष्म अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में आते हैं, जिनकी जनसंख्या अपेक्षाकृत कम है और जो मुख्यधारा की विकास योजनाओं तक आसानी से नहीं पहुँच पाते।

निगम की कार्यप्राथमिकताएँ

कैबिनेट प्रस्ताव के अनुसार, यह निगम इन समुदायों के लिए विशेष सामाजिक-शैक्षिक और आर्थिक उत्थान योजनाएँ तैयार करेगा और उन्हें लागू करेगा। मुख्य ज़ोर आर्थिक सशक्तिकरण, उद्यमिता विकास, कौशल प्रशिक्षण, बाज़ार पहुँच और आजीविका संवर्धन पर रहेगा।

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार भी पीवीटीजी मिशन के तहत देशभर में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के लिए अलग बजटीय प्रावधान कर रही है, और कर्नाटक का यह कदम उसी दिशा में राज्य-स्तरीय पहल के रूप में देखा जा रहा है।

बजट घोषणा से हुई शुरुआत

एसटी कल्याण मंत्रालय के अनुसार, इस निगम की परिकल्पना पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया द्वारा 2026-27 के राज्य बजट में की गई उस घोषणा पर आधारित है, जिसमें जनजातीय कल्याण के लिए एक नया समर्पित निगम बनाने का वादा किया गया था। मंत्रिमंडल की यह मंजूरी उस बजटीय प्रतिबद्धता को अमल में लाने की दिशा में एक ठोस कदम है।

आगे की राह

निगम की औपचारिक स्थापना और संचालन के लिए विस्तृत दिशानिर्देश और प्रशासनिक ढाँचा तैयार किया जाएगा। राज्य सरकार से अपेक्षित है कि वह इन समुदायों की विशिष्ट आवश्यकताओं के आधार पर लक्षित योजनाएँ अधिसूचित करे, ताकि निगम केवल एक प्रशासनिक इकाई बनकर न रह जाए, बल्कि ज़मीनी स्तर पर परिवर्तन का माध्यम बन सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन है — राज्य में पहले से चल रहे तीन जनजातीय निगमों की उपलब्धियों का विस्तृत सार्वजनिक मूल्यांकन आज भी उपलब्ध नहीं है। ₹33.36 करोड़ की प्रारंभिक राशि इरुला और सिद्दी जैसे उन समुदायों की बहुआयामी वंचना की गहराई के सामने सीमित प्रतीत होती है, जो दशकों से वन-अधिकार विवादों और शैक्षिक अवसरों की कमी से जूझ रहे हैं। बजट घोषणा से कैबिनेट मंजूरी तक का सफर अच्छा है, परंतु बिना पारदर्शी परिणाम-आधारित ढाँचे के यह निगम भी अपने पूर्ववर्तियों की तरह कागज़ों पर बड़ा और ज़मीन पर छोटा साबित हो सकता है।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक जनजातीय विकास निगम क्या है?
'कर्नाटक जनजातीय विकास निगम' एक नया राज्य-स्तरीय निकाय है, जिसे कर्नाटक कैबिनेट ने 29 अक्टूबर 2026 को ₹33.36 करोड़ के अनुदान से स्थापित करने की मंजूरी दी। इसका उद्देश्य राज्य के 33 अनुसूचित जनजाति समुदायों, विशेषकर विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी), के सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।
इस निगम से किन जनजातीय समुदायों को फायदा होगा?
इस निगम के दायरे में मुख्यतः वन क्षेत्रों और उनके आसपास रहने वाले पीवीटीजी समुदाय आएंगे — जैसे इरुला, सोलिगा, जेनुकुरुबा, कडु कुरुबा, कुडिया और सिद्दी। कुल मिलाकर 33 अनुसूचित जनजाति समुदाय इसके लाभार्थी होंगे।
पहले से मौजूद जनजातीय निगमों से यह अलग क्यों है?
कर्नाटक में पहले से 'कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम', 'कर्नाटक मेदारा विकास निगम' और 'खानाबदोश समुदाय विकास निगम' कार्यरत हैं, जो अपने-अपने पारंपरिक समुदायों पर केंद्रित हैं। नया निगम विशेष रूप से उन पीवीटीजी समूहों के लिए बनाया गया है जो मौजूदा निकायों के तहत पर्याप्त लाभ नहीं पा रहे थे।
इस निगम की घोषणा कब और कैसे हुई?
एसटी कल्याण मंत्रालय के अनुसार, इस निगम की परिकल्पना पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 2026-27 के राज्य बजट में की थी। 29 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस बजट वादे को औपचारिक मंजूरी दी गई।
निगम किन क्षेत्रों में काम करेगा?
निगम का मुख्य ध्यान आर्थिक सशक्तिकरण, उद्यमिता को बढ़ावा देने, कौशल विकास, बाज़ार में सहायता और आजीविका सुधार पर रहेगा। इसके अलावा सामाजिक और शैक्षिक उत्थान के लिए भी विशेष योजनाएँ बनाई और लागू की जाएंगी।
राष्ट्र प्रेस
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