कर्नाटक कैबिनेट ने जनजातीय विकास निगम को मंजूरी दी, ₹33.36 करोड़ से होगी स्थापना
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक मंत्रिमंडल ने 29 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु स्थित विधान सौधा में हुई कैबिनेट बैठक में 'कर्नाटक जनजातीय विकास निगम' की स्थापना को औपचारिक मंजूरी दे दी। ₹33.36 करोड़ के अनुदान से स्थापित होने वाले इस नए निगम का उद्देश्य राज्य के 33 अनुसूचित जनजाति समुदायों — विशेषकर विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) — के सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक विकास को गति देना है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में लिया गया यह निर्णय राज्य के जनजातीय कल्याण ढाँचे में एक महत्त्वपूर्ण विस्तार है।
निगम की जरूरत क्यों पड़ी
कर्नाटक में पहले से ही कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम, कर्नाटक मेदारा विकास निगम और खानाबदोश समुदाय विकास निगम जैसी संस्थाएँ कार्यरत हैं। ये निगम अपने-अपने पारंपरिक व्यवसायों और निवास स्थानों के आधार पर विशिष्ट समुदायों की सेवा करते हैं।
हालाँकि, सरकार ने महसूस किया कि पीवीटीजी श्रेणी के समुदायों की जरूरतें इतनी विशिष्ट और गहरी हैं कि उनके लिए एक समर्पित निकाय अपरिहार्य है। एसटी कल्याण मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, मौजूदा निगमों का ध्यान व्यापक समुदायों पर केंद्रित रहा, जिससे पीवीटीजी समूह प्रायः उचित लाभ से वंचित रह जाते थे।
किन समुदायों को मिलेगा लाभ
नए निगम के दायरे में मुख्यतः वे जनजातीय समुदाय आएंगे जो वन क्षेत्रों और उनके आसपास निवास करते हैं। इनमें इरुला, सोलिगा, जेनुकुरुबा, कडु कुरुबा, कुडिया और सिद्दी समुदाय शामिल हैं।
गौरतलब है कि ये समुदाय सूक्ष्म और अति-सूक्ष्म अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में आते हैं, जिनकी जनसंख्या अपेक्षाकृत कम है और जो मुख्यधारा की विकास योजनाओं तक आसानी से नहीं पहुँच पाते।
निगम की कार्यप्राथमिकताएँ
कैबिनेट प्रस्ताव के अनुसार, यह निगम इन समुदायों के लिए विशेष सामाजिक-शैक्षिक और आर्थिक उत्थान योजनाएँ तैयार करेगा और उन्हें लागू करेगा। मुख्य ज़ोर आर्थिक सशक्तिकरण, उद्यमिता विकास, कौशल प्रशिक्षण, बाज़ार पहुँच और आजीविका संवर्धन पर रहेगा।
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार भी पीवीटीजी मिशन के तहत देशभर में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के लिए अलग बजटीय प्रावधान कर रही है, और कर्नाटक का यह कदम उसी दिशा में राज्य-स्तरीय पहल के रूप में देखा जा रहा है।
बजट घोषणा से हुई शुरुआत
एसटी कल्याण मंत्रालय के अनुसार, इस निगम की परिकल्पना पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया द्वारा 2026-27 के राज्य बजट में की गई उस घोषणा पर आधारित है, जिसमें जनजातीय कल्याण के लिए एक नया समर्पित निगम बनाने का वादा किया गया था। मंत्रिमंडल की यह मंजूरी उस बजटीय प्रतिबद्धता को अमल में लाने की दिशा में एक ठोस कदम है।
आगे की राह
निगम की औपचारिक स्थापना और संचालन के लिए विस्तृत दिशानिर्देश और प्रशासनिक ढाँचा तैयार किया जाएगा। राज्य सरकार से अपेक्षित है कि वह इन समुदायों की विशिष्ट आवश्यकताओं के आधार पर लक्षित योजनाएँ अधिसूचित करे, ताकि निगम केवल एक प्रशासनिक इकाई बनकर न रह जाए, बल्कि ज़मीनी स्तर पर परिवर्तन का माध्यम बन सके।