कर्नाटक उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने दलित संघर्ष समिति से की बैठक, SC उप-योजना सहित 20+ मुद्दे उठे
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने मंगलवार, 21 जुलाई 2026 को बेंगलुरु स्थित विधान सौधा में कर्नाटक दलित संघर्ष समिति (अंबेडकर वादा) के प्रतिनिधिमंडल के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। यह बैठक संगठन द्वारा हाल ही में आयोजित दलित जनाग्रह सम्मेलन के दौरान राज्य सरकार को सौंपे गए विस्तृत मांगपत्र पर विचार-विमर्श के लिए बुलाई गई थी। विधान सौधा के कॉन्फ्रेंस हॉल में हुई इस चर्चा में अनुसूचित जाति (SC) समुदाय से जुड़े 20 से अधिक अहम मुद्दों को विस्तार से रखा गया।
मुख्य मुद्दे और मांगें
बैठक में भूमि अधिकार, शिक्षा, आवास, आरक्षण और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर केंद्रित चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल ने सरकार से स्पेशल कंपोनेंट प्लान (SCP) के लिए सिंगल विंडो व्यवस्था लागू करने, व्यक्तिगत संपत्ति निर्माण को प्राथमिकता देने और SCSP कानून में संशोधन कर गारंटी योजनाओं पर होने वाले खर्च को अनुसूचित जाति की आबादी के अनुपात में सुनिश्चित करने की माँग की।
SC उप-योजना राशि के कथित दुरुपयोग का आरोप
संगठन ने गंभीर आरोप लगाया कि स्पेशल कंपोनेंट प्लान की ₹200 करोड़ से अधिक की राशि को परिवहन विभाग के कर्मचारियों के वेतन भुगतान में खर्च किया गया, जो कि SCSP अधिनियम की धारा-24 का उल्लंघन है। समिति ने इस राशि की वसूली और इसके लिए जिम्मेदार वित्त विभाग के अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की माँग की।
भूमि अधिकार और कानूनी संरक्षण
भूमि अधिकारों के मोर्चे पर संगठन ने पीटीसीएल अधिनियम के कमज़ोर होते प्रभाव पर चिंता जताई। उनका कहना था कि न्यायालयों के फैसलों और प्रशासनिक कमियों के कारण इस कानून की प्रभावशीलता घटी है। समिति ने अनुसूचित जाति की भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करने और थोटी, इनामथी तथा नीरगंती भूमि को बहाल करने की माँग की। इसके साथ ही हर भूमिहीन SC परिवार और कृषि मजदूर को कम से कम दो एकड़ जमीन उपलब्ध कराने के लिए भूमि सुधार कानून में संशोधन की भी माँग रखी गई।
शिक्षा, आवास और बजट संबंधी माँगें
प्रतिनिधिमंडल ने समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत आने वाले विकास निगमों के लिए अधिक बजट, जिला और तालुक मुख्यालयों में छात्रावास परिसर निर्माण, तथा लंबे समय से लंबित भूमि स्वामित्व योजना को तत्काल लागू करने की माँग भी रखी। मांगपत्र में कर्नाटक बौद्ध विकास निगम के लिए ₹500 करोड़ का बजट आवंटित करने की माँग भी शामिल थी।
अन्य प्रमुख माँगें और आगे की राह
संगठन ने भूमिहीन SC परिवारों का सर्वेक्षण कराने, सामाजिक-आर्थिक एवं जातीय जनगणना रिपोर्ट सार्वजनिक करने, अत्याचार से जुड़े मामलों की जाँच करने वाले DCARE पुलिस स्टेशनों को सुदृढ़ बनाने, आबादी के अनुपात में आरक्षण बढ़ाने, मेधावी SC/ST छात्रों के लिए प्रत्यक्ष भर्ती लाभ बहाल करने और शिक्षा का अधिकार अधिनियम को प्रभावी ढंग से लागू करने की भी माँग उठाई। यह बैठक राज्य में दलित अधिकारों के मुद्दे पर सरकार और सामाजिक संगठनों के बीच संवाद की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, और अब नज़रें सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।