21 जुलाई 2026
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कर्नाटक में बैकलॉग रिक्तियां भरने का ऐलान, दलित नेताओं संग परमेश्वर की बैठक में 72,000 पदों पर भर्ती का भरोसा

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कर्नाटक में बैकलॉग रिक्तियां भरने का ऐलान, दलित नेताओं संग परमेश्वर की बैठक में 72,000 पदों पर भर्ती का भरोसा

सारांश

कर्नाटक में दलित अधिकारों पर बड़ी हलचल — उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने 72,000 पदों पर भर्ती, बैकलॉग रिक्तियां भरने और एससी-एसटी छात्रवृत्ति बढ़ाने का वादा किया। साथ ही श्री श्री रविशंकर से जुड़े 150 एकड़ भूमि विवाद की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई।

मुख्य बातें

परमेश्वर ने 21 जुलाई को विधान सौधा, बेंगलुरु में दलित संगठनों के नेताओं के साथ बैठक की।
विश्वविद्यालयों और प्रमुख सरकारी विभागों में बैकलॉग आरक्षित रिक्तियां भरने का ऐलान; पहले से 72,000 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी।
पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति वर्तमान में ₹1,800 प्रति माह, जबकि खर्च ₹3,000 तक — अगले बजट में बढ़ोतरी पर विचार।
एससी-एसटी समुदाय की कथित 150 एकड़ भूमि विवाद की जांच के लिए एसआईटी गठित; नेतृत्व बेंगलुरु मंडलायुक्त आदित्य अमलान बिस्वास करेंगे।
आदिवासी समुदाय के 12 पीएचडी धारक बेरोजगार युवाओं के लिए विशेष भर्ती उपायों पर चर्चा।
दलित महिलाओं को गारंटी योजनाओं का पूरा लाभ न मिलने की शिकायत पर जिला-तालुका स्तर पर जानकारी जुटाने का निर्देश।

कर्नाटक सरकार ने मंगलवार, 21 जुलाई को बेंगलुरु स्थित विधान सौधा में विभिन्न दलित संगठनों के नेताओं के साथ व्यापक बैठक की। बैठक के बाद उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने घोषणा की कि विश्वविद्यालयों और प्रमुख सरकारी विभागों में वर्षों से लंबित बैकलॉग आरक्षित रिक्तियों को भरा जाएगा। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब राज्य में दलित समुदाय के अधिकारों और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर दबाव बढ़ रहा है।

मुख्य घोषणाएँ और आश्वासन

उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने पत्रकारों को बताया कि राज्य सरकार पहले से विभिन्न विभागों में 72,000 पदों पर भर्ती प्रक्रिया चला रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के उम्मीदवारों को कानून के अनुसार आरक्षण का पूरा लाभ दिया जाएगा। उन्होंने कहा, 'हम विश्वविद्यालयों और बड़े विभागों में बैकलॉग रिक्तियां भरेंगे। मैं इस पर मुख्यमंत्री से चर्चा करूंगा और सुनिश्चित करूंगा कि इन पदों पर नियुक्तियां हों।'

छात्रवृत्ति और कल्याण योजनाओं पर चर्चा

बैठक में दलित संगठनों ने एससी-एसटी छात्रों की छात्रवृत्ति बढ़ाने की मांग प्रमुखता से उठाई। वर्तमान में पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के तहत छात्रों को ₹1,800 प्रति माह मिलते हैं, जबकि कई छात्रों का वास्तविक खर्च लगभग ₹3,000 तक पहुँच जाता है। परमेश्वर ने कहा कि इस अंतर को पाटने के लिए मुख्यमंत्री से चर्चा की जाएगी और अगले बजट में छात्रवृत्ति राशि बढ़ाने पर विचार किया जाएगा।

इसके अलावा, शिकायतें मिली हैं कि दलित समुदाय की कई महिलाओं को राज्य सरकार की गारंटी योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल रहा। उपमुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि जिला और तालुका स्तर पर जानकारी जुटाई जाएगी और जहाँ दलित महिलाएं योजनाओं से वंचित रह गई हैं, वहाँ सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

150 एकड़ भूमि विवाद पर एसआईटी गठन

बैठक की सबसे महत्वपूर्ण घोषणाओं में से एक यह रही कि राजस्व विभाग ने एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया है। यह एसआईटी उस आरोप की जांच करेगी जिसके अनुसार एससी-एसटी समुदाय की करीब 150 एकड़ भूमि कथित तौर पर आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर के नियंत्रण में है। परमेश्वर ने बताया कि जांच का नेतृत्व बेंगलुरु मंडलायुक्त आदित्य अमलान बिस्वास करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि संयोगवश जिस दिन यह मुद्दा बैठक में उठाया गया, उसी दिन एसआईटी गठन का निर्णय भी लिया गया।

आदिवासी समुदाय और भूमि आवंटन के मुद्दे

दलित नेताओं ने कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास बोर्ड द्वारा औद्योगिक भूमि आवंटन, आवासीय भूखंडों की उपलब्धता और कर्नाटक स्टेट फाइनेंशियल कॉरपोरेशन के माध्यम से ऋण सुविधाओं तक बेहतर पहुँच का मुद्दा भी उठाया। घुमंतू और आदिवासी समुदायों ने वन अधिकारियों द्वारा कथित उत्पीड़न की शिकायत की, जिसकी जांच का आश्वासन दिया गया। सरकार आदिवासी समुदाय के उच्च शिक्षित युवाओं के लिए विशेष भर्ती उपायों पर भी विचार कर रही है — आदिवासी समुदाय के 12 पीएचडी धारक युवा वर्तमान में बेरोजगार हैं और उनके लिए विशेष अवसरों पर चर्चा जारी है।

आगे क्या होगा

उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने संकेत दिया कि बैठक में उठाए गए अधिकांश मुद्दों पर मुख्यमंत्री के साथ विस्तृत चर्चा की जाएगी। अनुसूचित जाति उप-योजना और जनजातीय उप-योजना के बेहतर क्रियान्वयन की माँगों पर भी विचार होगा। शिवाजी नगर में अतिक्रमण हटाने के अभियान के दौरान अधिकारियों पर हुए कथित हमले को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब देखना होगा कि ये घोषणाएं कितनी जल्दी ज़मीनी हकीकत बनती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन बैकलॉग रिक्तियों का मुद्दा कर्नाटक में दशकों पुराना है — हर सरकार ने वादे किए, क्रियान्वयन की गति धीमी रही। ₹1,800 बनाम ₹3,000 की छात्रवृत्ति की खाई बताती है कि कल्याणकारी योजनाएं ज़मीनी ज़रूरतों से कितनी पिछड़ी हैं। 150 एकड़ भूमि विवाद पर एसआईटी गठन राजनीतिक रूप से संवेदनशील कदम है — जांच का दायरा और समयसीमा यह तय करेगी कि यह वास्तविक जवाबदेही है या केवल दबाव-प्रबंधन। आदिवासी पीएचडी धारकों की बेरोजगारी उच्च शिक्षा और सरकारी नियुक्ति नीति के बीच की संरचनात्मक विफलता को रेखांकित करती है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में बैकलॉग रिक्तियां क्या होती हैं और इन्हें भरना क्यों ज़रूरी है?
बैकलॉग रिक्तियां वे आरक्षित पद हैं जो एससी-एसटी वर्ग के उम्मीदवारों की अनुपलब्धता या प्रशासनिक विलंब के कारण वर्षों से खाली पड़े हैं। कानूनी रूप से इन्हें भरना अनिवार्य है और इनकी अनदेखी आरक्षण नीति को कमज़ोर करती है।
परमेश्वर ने दलित नेताओं के साथ बैठक में कौन-कौन से मुद्दों पर चर्चा हुई?
बैठक में छात्रवृत्ति वृद्धि, कल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन, भूमि आवंटन, रोजगार के अवसर, वन अधिकारियों द्वारा कथित उत्पीड़न, औद्योगिक भूमि आवंटन और ऋण सुविधाओं तक पहुँच जैसे मुद्दे उठाए गए। सरकार ने अधिकांश पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।
आर्ट ऑफ लिविंग और 150 एकड़ भूमि विवाद में एसआईटी की भूमिका क्या होगी?
राजस्व विभाग द्वारा गठित एसआईटी यह जांच करेगी कि एससी-एसटी समुदाय की कथित 150 एकड़ भूमि आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर के नियंत्रण में है या नहीं। जांच का नेतृत्व बेंगलुरु मंडलायुक्त आदित्य अमलान बिस्वास करेंगे।
एससी-एसटी छात्रों की पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति कितनी है और क्या बदलाव प्रस्तावित है?
वर्तमान में पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के तहत ₹1,800 प्रति माह मिलते हैं, जबकि कई छात्रों का खर्च ₹3,000 तक पहुँचता है। उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने कहा कि अगले बजट में इसे बढ़ाने पर मुख्यमंत्री से चर्चा की जाएगी।
आदिवासी समुदाय के पीएचडी धारक युवाओं के लिए क्या प्रस्ताव है?
आदिवासी समुदाय के 12 पीएचडी धारक युवा वर्तमान में बेरोजगार हैं। सरकार उनके लिए विशेष भर्ती उपायों पर विचार कर रही है, हालांकि अभी कोई ठोस योजना घोषित नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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