कर्नाटक में 72,000 सरकारी पद भरे जाएंगे, CM शिवकुमार ने दो IAS अधिकारियों को सौंपी निगरानी
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने शुक्रवार, 26 जून 2026 को बेंगलुरु में मीडिया से बात करते हुए घोषणा की कि राज्य सरकार ने सभी विभागों को 72,000 रिक्त पदों के लिए भर्ती अधिसूचनाएं तैयार करने के निर्देश दे दिए हैं। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने इस प्रक्रिया की निगरानी और गति के लिए वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों उमा महादेवन और गौरव गुप्ता को नियुक्त किया है।
भर्ती में देरी की वजह और अब का रास्ता
परमेश्वर ने स्पष्ट किया कि सत्ता में आने से पहले कांग्रेस सरकार ने अपने चुनावी घोषणापत्र में 1.50 लाख खाली सरकारी पदों को चरणबद्ध तरीके से भरने का वादा किया था। उन्होंने कहा, 'सत्ता में आने से पहले हमने अपने चुनावी घोषणापत्र में वादा किया था कि हम चरणबद्ध तरीके से 1.50 लाख खाली सरकारी पदों को भरेंगे, लेकिन विभिन्न कारणों से यह प्रक्रिया देरी से चल रही थी, जिसका मुख्य कारण आंतरिक आरक्षण का मुद्दा था।'
इस अड़चन को दूर करने के लिए सरकार ने जस्टिस एच.एन. नागमोहन दास (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में एक आयोग गठित किया था, जिसने आंतरिक आरक्षण के मुद्दे की जांच की। आयोग की रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार ने निर्णय लिया, जिससे भर्ती का रास्ता साफ हो गया।
चरणबद्ध भर्ती की रूपरेखा
राज्य बजट में पहले ही 56,942 पदों को भरने की घोषणा की गई थी और उसके लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू भी हो चुकी है। इसके अतिरिक्त, वित्त विभाग ने लगभग 26,000 पदों को भरने की मंजूरी दी थी। परमेश्वर के अनुसार, नए मुख्यमंत्री की नियुक्ति के बाद खाली पदों की समीक्षा की गई, जिसके बाद कुल 72,000 पदों को भरने का निर्णय लिया गया।
शिक्षा, स्वास्थ्य और लोक निर्माण विभाग को बिना देरी के शिक्षकों, डॉक्टरों, नर्सों और इंजीनियरों की भर्ती के लिए अधिसूचना जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। राजस्व विभाग में भी इसकी तैयारी जारी है।
बेरोजगार युवाओं पर असर
परमेश्वर ने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य राज्य के हजारों बेरोजगार युवाओं को रोजगार के अवसर देना है, जो कई बार सड़कों पर उतरकर भर्ती की मांग कर चुके हैं। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में सरकारी नौकरियों की मांग को लेकर युवाओं का आंदोलन लंबे समय से जारी है। इसी को देखते हुए 72,000 पदों को भरने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
बिदादी टाउनशिप और बेंगलुरु के दबाव का सवाल
मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए परमेश्वर ने बिदादी इंटीग्रेटेड टाउनशिप परियोजना पर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा, 'हम किसानों को मजबूर नहीं करेंगे। उनकी सहमति लेना जरूरी है।' मुख्यमंत्री शिवकुमार ने भी अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जमीन अधिग्रहण से पहले किसानों की सहमति अनिवार्य रूप से ली जाए और यदि मुआवजा कम लगे तो सरकार उसे बढ़ाने के लिए तैयार है।
गौरतलब है कि बेंगलुरु पर ट्रैफिक और तेज शहरीकरण का भारी दबाव है। परमेश्वर के अनुसार, बिदादी टाउनशिप का उद्देश्य इसी दबाव को कम करना है। इसी तर्ज पर तुमकुरु, कोलार और रामनगर जैसे शहरों को टियर-2 शहरों के रूप में विकसित करने की भी योजना है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हब की संभावनाओं पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह परियोजना का मुख्य उद्देश्य नहीं है।
आगे की राह
सभी विभागों को भर्ती अधिसूचनाएं तत्काल जारी करने के निर्देश दिए जा चुके हैं और दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की निगरानी में यह प्रक्रिया अब तेज गति से आगे बढ़ने की उम्मीद है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सरकार अपने 1.50 लाख पदों के मूल वादे को समयबद्ध तरीके से पूरा कर पाती है।