ऐतिहासिक फैसला: कर्नाटक कैबिनेट ने SC आंतरिक आरक्षण 5.25:5.25:4.5 अनुपात में मंजूर किया
सारांश
Key Takeaways
- कर्नाटक कैबिनेट ने 24 अप्रैल 2025 को SC आंतरिक आरक्षण 5.25:5.25:4.5 अनुपात में सर्वसम्मति से मंजूर किया।
- वाम श्रेणी को 5.25%25, दक्षिण श्रेणी को 5.25%25 और अन्य समुदायों (बोवी, लंबानी, कोराचा, कोरामा सहित 59 घुमंतू समूह) को 4.5%25 आरक्षण मिलेगा।
- श्रेणी C के 20 प्रतिशत पद विशेष रूप से 59 घुमंतू समुदायों के लिए आरक्षित होंगे।
- इस वर्ष 56,432 सरकारी पदों पर भर्ती की जाएगी और शीघ्र अधिसूचनाएं जारी होंगी।
- न्यायालय के 50%25 की सीमा के आदेश का पालन होगा; अतिरिक्त 6%25 को 'बैकलॉग' के रूप में सुरक्षित रखा जाएगा।
- सेवानिवृत्त न्यायाधीश नागमोहन दास आयोग और मुख्य सचिव की तकनीकी समिति की सिफारिशों के आधार पर यह निर्णय लिया गया।
बेंगलुरु, 24 अप्रैल: कर्नाटक मंत्रिमंडल ने शुक्रवार, 24 अप्रैल 2025 को एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए अनुसूचित जातियों (SC) के भीतर आंतरिक आरक्षण को 5.25:5.25:4.5 के अनुपात में सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी। यह आरक्षण क्रमशः 'वाम' (Left), 'दक्षिण' (Right) और 'अन्य' श्रेणियों के समुदायों पर लागू होगा। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कैबिनेट बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस निर्णय की घोषणा की और इसे देश के सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक न्याय के फैसलों में से एक बताया।
आरक्षण का नया ढांचा: कौन सी श्रेणी को कितना मिलेगा?
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने स्पष्ट किया कि 'लेफ्ट' (वाम) श्रेणी के समुदायों को 5.25 प्रतिशत, 'राइट' (दक्षिण) श्रेणी के समुदायों को 5.25 प्रतिशत और अन्य समुदायों — जिनमें बोवी, लंबानी, कोराचा, कोरामा तथा 59 घुमंतू समूह शामिल हैं — को 4.5 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा।
पूर्व में अनुसूचित जातियों के लिए 17 प्रतिशत आरक्षण को 6:6:5 के अनुपात में विभाजित किया गया था। किंतु उच्च न्यायालय के उस निर्देश के बाद, जिसमें कुल आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत निर्धारित की गई, अब एससी के लिए 15 प्रतिशत और एसटी के लिए 3 प्रतिशत आरक्षण तय किया गया है। इसी के अनुरूप संशोधित अनुपात 5.25:5.25:4.5 निर्धारित किया गया है।
यह भी निर्णय लिया गया कि श्रेणी 'C' के अंतर्गत उपलब्ध पदों में से 20 प्रतिशत पद विशेष रूप से 59 घुमंतू समुदायों के लिए आरक्षित किए जाएंगे।
56,432 पदों पर भर्ती और बैकलॉग की व्यवस्था
राज्य सरकार ने बजट में की गई घोषणा के अनुरूप इस वर्ष 56,432 पदों को भरने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए शीघ्र ही अधिसूचनाएं जारी की जाएंगी और भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि जब तक अदालतें अपना अंतिम निर्णय नहीं सुना देतीं, तब तक 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा का पालन अनिवार्य रूप से किया जाएगा। हालांकि, सरकार भविष्य में 56 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक न्यायालय कोई अंतिम आदेश नहीं देता, तब तक 6 प्रतिशत आरक्षण के हिस्से को 'बैकलॉग' (पिछड़ा बकाया) के रूप में संरक्षित माना जाएगा। यह प्रावधान उन समुदायों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए है जो वर्षों से अपने उचित हिस्से से वंचित रहे हैं।
निर्णय की पृष्ठभूमि: सुप्रीम कोर्ट से लेकर तकनीकी समिति तक
सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में राज्यों को अनुसूचित जातियों के भीतर आंतरिक आरक्षण तय करने की अनुमति दी थी। इसके बाद कर्नाटक सरकार ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश नागमोहन दास की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग का गठन किया था। उस आयोग की रिपोर्ट के आधार पर कैबिनेट ने पहले 6:6:5 के अनुपात का निर्णय लिया था, जब कुल आरक्षण 24 प्रतिशत (17%25 SC + 7%25 ST) था, जिससे समग्र आरक्षण 56 प्रतिशत तक पहुंच गया था।
किंतु न्यायालय ने इंदिरा साहनी मामले का हवाला देते हुए दोहराया कि आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता। इस विधिक जटिलता को सुलझाने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक तकनीकी समिति गठित की गई, जिसकी सिफारिशों के आधार पर वर्तमान 5.25:5.25:4.5 का अनुपात अंतिम रूप से तय किया गया।
चित्रदुर्ग में आयोजित एक सम्मेलन में 101 एससी समुदायों और 59 घुमंतू समूहों के प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से आंतरिक आरक्षण का समर्थन किया था। गृह मंत्री जी. परमेश्वर की अध्यक्षता वाली घोषणापत्र समिति ने भी इसे लागू करने का आश्वासन दिया था।
सामाजिक न्याय का व्यापक संदर्भ और राजनीतिक निहितार्थ
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब देशभर में आरक्षण की राजनीति एक बार फिर केंद्र में है। सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले के बाद कई राज्य SC उपवर्गीकरण की दिशा में कदम उठा रहे हैं, लेकिन कर्नाटक इसे विधिसम्मत ढांचे में लागू करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है।
आलोचकों का कहना है कि दशकों से 'अन्य' श्रेणी के समुदाय — विशेषकर घुमंतू जनजातियां — मुख्यधारा के एससी समुदायों की तुलना में आरक्षण का समुचित लाभ नहीं उठा पाए। 20 प्रतिशत पदों का घुमंतू समुदायों के लिए उपआरक्षण इस ऐतिहासिक वंचना को दूर करने का एक ठोस प्रयास माना जा रहा है।
राजनीतिक दृष्टि से देखें तो यह फैसला कांग्रेस सरकार के लिए दलित मतदाताओं को साधने की एक महत्वपूर्ण रणनीति भी है, विशेषकर जब राज्य में अगले विधानसभा चुनावों की तैयारियां धीरे-धीरे शुरू होने लगी हैं।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने विश्वास व्यक्त किया कि दलित संगठन और सभी संबंधित समुदाय इस निर्णय का स्वागत करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार समान हिस्सेदारी और समान अवसर के अपने सिद्धांत के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और उसने अपना वादा पूरा किया है।
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि भर्ती अधिसूचनाएं कब जारी होती हैं, रोस्टर प्रणाली में यह बदलाव कितनी जल्दी जमीन पर उतरता है, और न्यायालय इस नए ढांचे पर क्या रुख अपनाता है।