जेपीएससी-जेएसएससी लाठीचार्ज पर सीजेपी के अभिजीत दिपके बोले — छात्रों को मजबूत करना है, चेहरा नहीं चमकाना
सारांश
मुख्य बातें
रांची में जेपीएससी-जेएसएससी आंदोलन के दौरान छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और आंसू गैस के प्रयोग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने 11 अगस्त को तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पुलिस की इस कार्रवाई को 'बेहद दुखद' करार देते हुए सवाल उठाया कि बल प्रयोग केवल छात्रों पर ही क्यों किया जाता है।
मुख्य घटनाक्रम
दिपके ने कहा, 'सोमवार को झारखंड में जो हुआ, वह बहुत दुखद है। हमने 20 तारीख को जंतर-मंतर पर भी ऐसी ही स्थिति देखी थी और झारखंड में भी ठीक वैसा ही हुआ, जहाँ छात्रों पर आँसू गैस के गोले छोड़े गए और उन पर लाठियाँ बरसाई गईं।' उन्होंने यह भी पूछा कि जब राजनीतिक दल विरोध प्रदर्शन करते हैं, तो इसी तरह की कार्रवाई क्यों नहीं होती।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे देवेंद्र महतो की स्वास्थ्य स्थिति पर चिंता जताते हुए दिपके ने बताया कि उनसे सीधे फोन पर बात हुई। उनके अनुसार, देवेंद्र महतो कई दिनों से अनशन पर थे, इसके बावजूद पुलिस ने उन पर लाठियाँ चलाईं और वे अभी अस्पताल में भर्ती हैं।
सीजेपी की भूमिका और रुख
दिपके ने स्पष्ट किया कि सीजेपी की टीम पहले ही रांची पहुँच चुकी है और सोमवार की रात उनके कार्यकर्ता अस्पताल में देवेंद्र महतो के साथ मौजूद रहे। उन्होंने कहा, 'इस समय हम नहीं चाहते कि पूरा ध्यान देवेंद्र महतो से हटे।'
जब उनसे पूछा गया कि क्या वे स्वयं रांची जाएंगे, तो दिपके ने साफ कहा कि वहाँ जाकर 'अपना चेहरा चमकाना' उनका काम नहीं है। उनके अनुसार, झारखंड के छात्रों को मजबूत करना और उनके साथ खड़े रहना ही उनकी प्राथमिकता है।
छात्रों के अधिकार और राजनीतिक सवाल
दिपके ने ज़ोर देकर कहा, 'ये छात्र अपने जायज अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं, न कि किसी वोट बैंक की राजनीति के लिए।' उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आँसू गैस और लाठियाँ हमेशा छात्रों पर ही क्यों इस्तेमाल की जाती हैं, जबकि राजनीतिक दलों के प्रदर्शनों पर ऐसी कार्रवाई नहीं होती।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और भर्ती प्रक्रिया को लेकर छात्रों में असंतोष बढ़ रहा है। गौरतलब है कि इससे पहले जंतर-मंतर पर भी इसी तरह के हालात बने थे।
आंदोलन का नेतृत्व
दिपके ने स्पष्ट किया कि वे चाहते हैं कि देवेंद्र महतो ही झारखंड में इस आंदोलन की कमान संभालें और इसका नेतृत्व करें। उन्होंने कहा कि वे झारखंड के छात्रों के साथ लगातार संपर्क में हैं और पूरे दिल से उनका समर्थन कर रहे हैं।
आने वाले दिनों में आंदोलन की दिशा और सरकार की प्रतिक्रिया पर सबकी नज़रें टिकी रहेंगी।