11 अगस्त 2026
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झारखंड में छात्रों पर पुलिस बल प्रयोग की अभिजीत दिपके ने की कड़ी निंदा, देवेंद्र नाथ महतो को समर्थन का ऐलान

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झारखंड में छात्रों पर पुलिस बल प्रयोग की अभिजीत दिपके ने की कड़ी निंदा, देवेंद्र नाथ महतो को समर्थन का ऐलान

सारांश

झारखंड में छात्रों पर कथित आंसू गैस और लाठीचार्ज की घटना ने एक नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया और नौ दिन से अनशनरत आंदोलन नेता देवेंद्र नाथ महतो के साथ एकजुटता का ऐलान किया।

मुख्य बातें

सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने झारखंड में छात्रों पर कथित लाठीचार्ज और आंसू गैस प्रयोग को निंदनीय करार दिया।
आंदोलन नेता देवेंद्र नाथ महतो नौ दिनों से अनशन पर थे और पुलिस कार्रवाई में कथित तौर पर घायल हुए।
दिपके ने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में देशभर में 94 हज़ार से अधिक सरकारी स्कूल बंद हुए।
तमिलनाडु के छात्र आंदोलन को भी दिपके ने समर्थन दिया; उनकी टीम वहाँ आंदोलनकारियों के संपर्क में है।
दिपके ने परिसीमन के संदर्भ में आरोप लगाया कि बहुमत सुरक्षित रखने के लिए राजनीतिक कदम उठाए जा रहे हैं।

छत्रपति संभाजीनगर, 11 अगस्त। झारखंड में छात्र आंदोलनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने झारखंड सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने छात्रों पर कथित तौर पर आंसू गैस और लाठीचार्ज किए जाने को निंदनीय करार देते हुए कहा कि अपने अधिकारों और भविष्य के लिए सड़कों पर उतरे छात्रों के खिलाफ इस प्रकार का बल प्रयोग किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार्य नहीं है। आंदोलन के नेता देवेंद्र नाथ महतो के प्रति एकजुटता जताते हुए दिपके ने स्पष्ट किया कि उनकी टीम लगातार आंदोलनकारियों के संपर्क में है और हर संभव सहयोग दिया जा रहा है।

पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

अभिजीत दिपके ने झारखंड की घटनाओं की तुलना जंतर-मंतर पर हुए विरोध-प्रदर्शनों से करते हुए कहा कि राजधानी में प्रदर्शन के दौरान जो संयम दिखाया जाता है, वह झारखंड में नदारद रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राजनीतिक दल प्रदर्शन करते हैं तो उन पर लाठीचार्ज या आंसू गैस का इस्तेमाल क्यों नहीं होता, लेकिन छात्रों के आंदोलनों में ही ऐसी कार्रवाई देखने को मिलती है। दिपके के अनुसार, छात्रों का संघर्ष किसी वोट बैंक की राजनीति से प्रेरित नहीं, बल्कि उनके अपने अधिकारों और भविष्य की रक्षा के लिए है।

देवेंद्र नाथ महतो की स्थिति और समर्थन

दिपके ने बताया कि आंदोलन के नेता देवेंद्र नाथ महतो नौ दिनों से अनशन पर थे और पुलिस कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर घायल हो गए। उनकी टीम अस्पताल में महतो की स्थिति पर नज़र बनाए हुए है। दिपके ने महतो से सेहत के बारे में सीधी बातचीत की और उन्हें भरोसा दिलाया कि आंदोलनकारियों को जिस भी स्तर पर मदद की ज़रूरत होगी, उनकी टीम हमेशा साथ खड़ी रहेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन का नेतृत्व देवेंद्र नाथ महतो के हाथों में ही रहना चाहिए — नौ दिनों का अनशन एक असाधारण बलिदान है और उसका श्रेय उन्हीं को मिलना चाहिए।

आदिवासी अधिकार और शिक्षा व्यवस्था पर चिंता

उमर खालिद की पुस्तक 'फ्रैक्चर्ड कम्युनिटीज: आदिवासी हिस्ट्रीज एंड द पॉलिटिक्स ऑफ पावर' के विमोचन से जुड़े सवाल पर दिपके ने कहा कि आदिवासी और हाशिए पर खड़े समुदायों के मुद्दों को समझने के लिए इस तरह के विषयों पर पढ़ना ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि आज़ादी के लगभग 80 वर्षों बाद भी देश के कई ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में पर्याप्त विकास नहीं हो पाया है, आदिवासी समुदायों की ज़मीन और जंगलों पर उनके अधिकार प्रभावित हुए हैं और उन्हें बदले में पर्याप्त लाभ नहीं मिला।

15 अगस्त को जारी अपने वीडियो में सरकारी स्कूलों की दशा पर सवाल उठाने के संदर्भ में दिपके ने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में देशभर में 94 हज़ार से अधिक सरकारी स्कूल बंद किए गए हैं। उन्होंने पूछा कि बड़े सरकारी भवनों और बुनियादी ढाँचे पर व्यय किया जा सकता है, तो ग्रामीण बच्चों के लिए उसी स्तर की सुविधाओं वाले स्कूल क्यों नहीं बनाए जा सकते।

तमिलनाडु आंदोलन को भी समर्थन

दिपके ने तमिलनाडु में जारी छात्र आंदोलन के प्रति भी एकजुटता जताई। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु के कुछ छात्र उनसे मिलने आए थे और उनकी वहाँ की टीम आंदोलनकारियों के साथ निरंतर संपर्क में है। दिपके ने स्पष्ट किया कि वे राज्य की सरकार देखकर अपना समर्थन तय नहीं करते — जहाँ भी छात्रों के साथ अन्याय होगा, उनकी टीम उनके साथ खड़ी रहेगी।

परिसीमन और राजनीतिक परिस्थितियाँ

परिसीमन पर पूछे गए सवाल के जवाब में दिपके ने 2024 के लोकसभा चुनाव में बहुमत के आँकड़ों का संदर्भ देते हुए आरोप लगाया कि बहुमत को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से कुछ राजनीतिक कदम उठाए जा रहे हैं। आगे की राजनीतिक प्रक्रियाओं पर उनकी नज़र बनी रहेगी और उनकी पार्टी इन मुद्दों पर अपनी आवाज़ उठाती रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके स्रोत और कालखंड का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है — जो पत्रकारीय जाँच की माँग करता है। छात्र आंदोलनों में बाहरी राजनीतिक हस्तक्षेप का इतिहास मिला-जुला रहा है; कभी-कभी यह आंदोलन को मज़बूती देता है, कभी उसकी मूल माँगों को पीछे धकेल देता है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई क्यों हुई?
झारखंड में छात्र अपने अधिकारों और भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे, जिसके दौरान कथित तौर पर पुलिस ने आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। इस कार्रवाई की कई नेताओं और संगठनों ने आलोचना की है।
अभिजीत दिपके कौन हैं और सीजेपी क्या है?
अभिजीत दिपके कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक हैं, जो छत्रपति संभाजीनगर से सक्रिय हैं। वे आदिवासी अधिकारों, शिक्षा और छात्र मुद्दों पर मुखर रहते हैं।
देवेंद्र नाथ महतो कौन हैं और उनकी स्थिति क्या है?
देवेंद्र नाथ महतो झारखंड छात्र आंदोलन के नेता हैं, जो नौ दिनों से अनशन पर थे। पुलिस कार्रवाई के दौरान वे कथित तौर पर घायल हुए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
दिपके ने सरकारी स्कूलों को लेकर क्या दावा किया?
दिपके ने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में देशभर में 94 हज़ार से अधिक सरकारी स्कूल बंद किए गए हैं। उन्होंने ग्रामीण बच्चों को शहरी बच्चों के समान शैक्षणिक सुविधाएँ देने की माँग की।
क्या दिपके केवल झारखंड के छात्र आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं?
नहीं, दिपके ने तमिलनाडु में जारी छात्र आंदोलन को भी समर्थन दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे राज्य की सरकार देखकर नहीं, बल्कि छात्रों के साथ हो रहे अन्याय के आधार पर अपना समर्थन तय करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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