झारखंड में छात्रों पर पुलिस बल प्रयोग की अभिजीत दिपके ने की कड़ी निंदा, देवेंद्र नाथ महतो को समर्थन का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
छत्रपति संभाजीनगर, 11 अगस्त। झारखंड में छात्र आंदोलनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने झारखंड सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने छात्रों पर कथित तौर पर आंसू गैस और लाठीचार्ज किए जाने को निंदनीय करार देते हुए कहा कि अपने अधिकारों और भविष्य के लिए सड़कों पर उतरे छात्रों के खिलाफ इस प्रकार का बल प्रयोग किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार्य नहीं है। आंदोलन के नेता देवेंद्र नाथ महतो के प्रति एकजुटता जताते हुए दिपके ने स्पष्ट किया कि उनकी टीम लगातार आंदोलनकारियों के संपर्क में है और हर संभव सहयोग दिया जा रहा है।
पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
अभिजीत दिपके ने झारखंड की घटनाओं की तुलना जंतर-मंतर पर हुए विरोध-प्रदर्शनों से करते हुए कहा कि राजधानी में प्रदर्शन के दौरान जो संयम दिखाया जाता है, वह झारखंड में नदारद रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राजनीतिक दल प्रदर्शन करते हैं तो उन पर लाठीचार्ज या आंसू गैस का इस्तेमाल क्यों नहीं होता, लेकिन छात्रों के आंदोलनों में ही ऐसी कार्रवाई देखने को मिलती है। दिपके के अनुसार, छात्रों का संघर्ष किसी वोट बैंक की राजनीति से प्रेरित नहीं, बल्कि उनके अपने अधिकारों और भविष्य की रक्षा के लिए है।
देवेंद्र नाथ महतो की स्थिति और समर्थन
दिपके ने बताया कि आंदोलन के नेता देवेंद्र नाथ महतो नौ दिनों से अनशन पर थे और पुलिस कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर घायल हो गए। उनकी टीम अस्पताल में महतो की स्थिति पर नज़र बनाए हुए है। दिपके ने महतो से सेहत के बारे में सीधी बातचीत की और उन्हें भरोसा दिलाया कि आंदोलनकारियों को जिस भी स्तर पर मदद की ज़रूरत होगी, उनकी टीम हमेशा साथ खड़ी रहेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन का नेतृत्व देवेंद्र नाथ महतो के हाथों में ही रहना चाहिए — नौ दिनों का अनशन एक असाधारण बलिदान है और उसका श्रेय उन्हीं को मिलना चाहिए।
आदिवासी अधिकार और शिक्षा व्यवस्था पर चिंता
उमर खालिद की पुस्तक 'फ्रैक्चर्ड कम्युनिटीज: आदिवासी हिस्ट्रीज एंड द पॉलिटिक्स ऑफ पावर' के विमोचन से जुड़े सवाल पर दिपके ने कहा कि आदिवासी और हाशिए पर खड़े समुदायों के मुद्दों को समझने के लिए इस तरह के विषयों पर पढ़ना ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि आज़ादी के लगभग 80 वर्षों बाद भी देश के कई ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में पर्याप्त विकास नहीं हो पाया है, आदिवासी समुदायों की ज़मीन और जंगलों पर उनके अधिकार प्रभावित हुए हैं और उन्हें बदले में पर्याप्त लाभ नहीं मिला।
15 अगस्त को जारी अपने वीडियो में सरकारी स्कूलों की दशा पर सवाल उठाने के संदर्भ में दिपके ने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में देशभर में 94 हज़ार से अधिक सरकारी स्कूल बंद किए गए हैं। उन्होंने पूछा कि बड़े सरकारी भवनों और बुनियादी ढाँचे पर व्यय किया जा सकता है, तो ग्रामीण बच्चों के लिए उसी स्तर की सुविधाओं वाले स्कूल क्यों नहीं बनाए जा सकते।
तमिलनाडु आंदोलन को भी समर्थन
दिपके ने तमिलनाडु में जारी छात्र आंदोलन के प्रति भी एकजुटता जताई। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु के कुछ छात्र उनसे मिलने आए थे और उनकी वहाँ की टीम आंदोलनकारियों के साथ निरंतर संपर्क में है। दिपके ने स्पष्ट किया कि वे राज्य की सरकार देखकर अपना समर्थन तय नहीं करते — जहाँ भी छात्रों के साथ अन्याय होगा, उनकी टीम उनके साथ खड़ी रहेगी।
परिसीमन और राजनीतिक परिस्थितियाँ
परिसीमन पर पूछे गए सवाल के जवाब में दिपके ने 2024 के लोकसभा चुनाव में बहुमत के आँकड़ों का संदर्भ देते हुए आरोप लगाया कि बहुमत को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से कुछ राजनीतिक कदम उठाए जा रहे हैं। आगे की राजनीतिक प्रक्रियाओं पर उनकी नज़र बनी रहेगी और उनकी पार्टी इन मुद्दों पर अपनी आवाज़ उठाती रहेगी।