अभिजीत दिपके: शिक्षा का कोई मुद्दा उठे, कॉकरोच जनता पार्टी छात्रों के साथ खड़ी रहेगी
सारांश
मुख्य बातें
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने 3 अगस्त को छत्रपति संभाजीनगर में स्पष्ट किया कि उनका संगठन किसी एक राजनीतिक दल का विरोधी नहीं, बल्कि समग्र व्यवस्था की खामियों के खिलाफ संघर्षरत है। उन्होंने कहा कि देशभर में शिक्षा व्यवस्था संकट में है और जहाँ भी छात्रों से जुड़ा कोई मुद्दा उभरेगा, उनकी टीम वहाँ मौजूद रहेगी।
शिक्षा संकट और छात्र आंदोलन
दिपके ने कहा कि शिक्षा की समस्या किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है — यह लगभग पूरे देश की व्यथा है। उनके अनुसार, छात्र निराश हैं और उनकी पीड़ा को गंभीरता से सुना जाना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि बड़ी संख्या में छात्र किसी मंत्री को हटाने की माँग कर रहे हों, तो सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह उस माँग पर विचार करे — हालाँकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि यह उनका व्यक्तिगत राजनीतिक मत है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका संगठन सत्ता में चाहे कोई भी दल हो, छात्रों के हितों की अनदेखी पर आवाज़ उठाएगा। मुख्यमंत्री या शिक्षा मंत्री की पार्टी का कोई भेद नहीं — जवाबदेही सबके लिए समान होगी।
विपक्ष की कमज़ोरी और प्रवर्तन एजेंसियों पर आरोप
दिपके ने कथित तौर पर कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी दलों को कमज़ोर करने के लिए किया गया। उन्होंने महाराष्ट्र का उदाहरण दिया, जहाँ शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) — दोनों प्रमुख विपक्षी दलों में विभाजन हुआ। उनके अनुसार, ऐसी घटनाओं ने लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा को कमज़ोर किया है।
राजनीतिक संपर्क और कांग्रेस का समर्थन
राजनीतिक दलों से संवाद के सवाल पर दिपके ने बताया कि हाल के दिनों में खराब स्वास्थ्य के कारण वे किसी से नहीं मिल सके। उन्होंने बताया कि कांग्रेस नेता पवन खेड़ा उनसे मिलने आए और राहुल गांधी की ओर से समर्थन का संदेश लेकर आए। कांग्रेस के कई सांसदों ने भी उनका समर्थन किया। दिपके ने यह भी कहा कि उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से भी समर्थन माँगा था और विभिन्न दलों से संवाद बनाए रखना उनकी रणनीति का हिस्सा रहा है।
आंदोलन पर आरोप और दिल्ली पुलिस का दावा
आंदोलन के दौरान असामाजिक तत्वों की मौजूदगी के आरोपों पर दिपके ने कहा कि उन्होंने पहले ही आशंका जताई थी कि आंदोलन को बदनाम करने के लिए बाहरी तत्व भेजे जा सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि आंदोलन के शुरुआती एक महीने तक कोई ऐसी घटना नहीं हुई। दिल्ली पुलिस के उस दावे पर उन्होंने सवाल उठाया जिसमें बड़ी संख्या में अपराधियों की मौजूदगी की बात कही गई थी — दिपके ने पूछा कि यदि इतने अपराधी वहाँ मौजूद थे, तो उन्हें रहने की अनुमति किसने दी और सुरक्षा व्यवस्था में यह चूक कैसे हुई।
संगठन का भविष्य और अमेरिका से वापसी
दिपके ने बताया कि उनका संगठन अब पुनर्गठन के दौर में है। आंदोलन की शुरुआत केवल 10 से 20 लोगों के साथ हुई थी, लेकिन अब स्वयंसेवकों की संख्या 300 से अधिक हो गई है। वे सभी स्वयंसेवकों से फीडबैक लेने के बाद संगठन की आगे की दिशा तय करेंगे।
अमेरिका से भारत लौटने के अपने फैसले पर उन्होंने कहा कि जब वे अमेरिका में पढ़ाई कर रहे थे, तब उनके प्रोफेसर और मित्र उन्हें भारत के प्रतिनिधि के रूप में देखते थे। लेकिन अपने ही देश में उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया — इस अनुभव ने उन्हें भावनात्मक रूप से प्रभावित किया और वे वापस लौटे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें 'अन्ना' या 'गांधी' जैसे संबोधनों से नहीं पुकारा जाए — वे अपनी स्वतंत्र पहचान के साथ काम करना चाहते हैं। फिलहाल उनका फोकस चुनावी राजनीति नहीं, बल्कि एक प्रभावशाली 'पब्लिक प्रेशर ग्रुप' के रूप में जनदबाव और जनभागीदारी के ज़रिए बदलाव लाने पर है।