जेपीएससी छात्र आंदोलन: संजय सेठ ने की सीबीआई जांच की मांग, जेएमएम पर लाठीचार्ज का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय राज्य मंत्री संजय सेठ ने 22 अगस्त को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए कथित हमले को लेकर झारखंड सरकार और सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ कथित मारपीट को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताते हुए पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच की माँग की। सेठ ने यह भी आरोप लगाया कि यह मामला करीब ₹1,000 करोड़ के घोटाले से जुड़ा है।
मुख्य घटनाक्रम
संजय सेठ ने आरोप लगाया कि जेपीएससी के खिलाफ शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर जेएमएम कार्यकर्ताओं ने लाठियों से हमला किया। उन्होंने कहा कि इस कथित बर्बरता ने उन्हें आपातकाल के दिनों की याद दिला दी। सेठ ने कहा, 'जेएमएम के कार्यकर्ता लाठी लेकर छात्रों पर इस तरह टूट पड़े, जैसे वे किसी गंभीर अपराध में शामिल हों।' उन्होंने एक छात्रा के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार का फुटेज देखने का दावा करते हुए सवाल किया कि आखिर छात्रों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया गया।
अस्पतालों से कथित जबरन छुट्टी
केंद्रीय राज्य मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्रों को रिम्स, सदर और पारस अस्पतालों से कथित पुलिसिया दबाव में जबरन डिस्चार्ज कराया गया। उन्होंने कहा कि घायल छात्रों को इलाज की जरूरत है, ऐसे में उन्हें दबाव में अस्पताल से निकालना अमानवीय है। उन्होंने इन सभी आरोपों की स्वतंत्र जांच की माँग दोहराई।
जेपीएससी में कथित अनियमितताएँ और नीलिमा केरकेट्टा का पत्र
सेठ ने जेपीएससी के कामकाज पर सवाल उठाते हुए पूर्व वरिष्ठ अधिकारी नीलिमा केरकेट्टा के एक पत्र का हवाला दिया। उनके अनुसार, लगभग दो वर्ष पूर्व सेवानिवृत्ति के समय नीलिमा केरकेट्टा ने सरकार को दो पन्नों का पत्र लिखकर आयोग के कामकाज में कथित अनियमितताओं और फाइलों के महीनों तक लंबित रहने जैसे गंभीर मुद्दे उठाए थे। सेठ ने आरोप लगाया कि उस पत्र को कथित तौर पर दबाकर रखा गया। उन्होंने कहा कि यदि उस पत्र पर दो साल पहले ही कार्रवाई हो जाती, तो आज जेपीएससी विवाद इस रूप में सामने नहीं आता।
कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना
संजय सेठ ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि जब प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल हुआ और बाद में लाठीचार्ज की तस्वीरें घंटों टीवी चैनलों पर प्रसारित होती रहीं, तब भी कांग्रेस नेतृत्व की ओर से कोई प्रभावी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। सेठ ने कहा कि झारखंड में राजनीतिक समीकरणों के कारण कांग्रेस जेएमएम सरकार के विरुद्ध बोलने से बच रही है और इस तरह दोहरा चरित्र अपना रही है। उन्होंने राहुल गांधी से अपील की कि यदि उनकी लोकतांत्रिक मुद्दों को लेकर वास्तव में चिंता है, तो वे झारखंड आकर प्रदर्शनकारी छात्रों और घायलों से मिलें।
आगे क्या
सेठ ने स्पष्ट किया कि वे इस पूरे मामले में सीबीआई जांच की माँग पर अडिग हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल सत्ता से नहीं, बल्कि लोक-लाज और जवाबदेही से चलता है, और झारखंड में सत्ता के लिए लोकतांत्रिक मर्यादाओं को दरकिनार किया जा रहा है। यह देखना होगा कि राज्य सरकार इन आरोपों पर क्या रुख अपनाती है और क्या न्यायिक या केंद्रीय एजेंसी की जांच का रास्ता खुलता है।