22 अगस्त 2026
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जेपीएससी छात्र आंदोलन: संजय सेठ ने की सीबीआई जांच की मांग, जेएमएम पर लाठीचार्ज का आरोप

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जेपीएससी छात्र आंदोलन: संजय सेठ ने की सीबीआई जांच की मांग, जेएमएम पर लाठीचार्ज का आरोप

सारांश

जेपीएससी विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर कथित लाठीचार्ज और अस्पतालों से जबरन छुट्टी के आरोपों के बीच केंद्रीय राज्य मंत्री संजय सेठ ने जेएमएम सरकार को घेरा, सीबीआई जांच की माँग की और कांग्रेस पर जेएमएम के दबाव में चुप रहने का आरोप लगाया।

मुख्य बातें

केंद्रीय राज्य मंत्री संजय सेठ ने 22 अगस्त को जेपीएससी छात्र आंदोलन पर जेएमएम सरकार के विरुद्ध सीबीआई जांच की माँग की।
सेठ ने आरोप लगाया कि जेएमएम कार्यकर्ताओं ने लाठियों से प्रदर्शनकारी छात्रों पर हमला किया और एक छात्रा के साथ दुर्व्यवहार हुआ।
घायल छात्रों को रिम्स, सदर और पारस अस्पतालों से कथित पुलिसिया दबाव में जबरन डिस्चार्ज कराने का आरोप।
पूर्व वरिष्ठ अधिकारी नीलिमा केरकेट्टा के करीब दो वर्ष पुराने पत्र में जेपीएससी की कथित अनियमितताओं का उल्लेख था, जिसे कथित तौर पर दबाया गया।
सेठ ने इसे करीब ₹1,000 करोड़ का घोटाला बताया और कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर जेएमएम के दबाव में चुप रहने का आरोप लगाया।

केंद्रीय राज्य मंत्री संजय सेठ ने 22 अगस्त को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए कथित हमले को लेकर झारखंड सरकार और सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ कथित मारपीट को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताते हुए पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच की माँग की। सेठ ने यह भी आरोप लगाया कि यह मामला करीब ₹1,000 करोड़ के घोटाले से जुड़ा है।

मुख्य घटनाक्रम

संजय सेठ ने आरोप लगाया कि जेपीएससी के खिलाफ शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर जेएमएम कार्यकर्ताओं ने लाठियों से हमला किया। उन्होंने कहा कि इस कथित बर्बरता ने उन्हें आपातकाल के दिनों की याद दिला दी। सेठ ने कहा, 'जेएमएम के कार्यकर्ता लाठी लेकर छात्रों पर इस तरह टूट पड़े, जैसे वे किसी गंभीर अपराध में शामिल हों।' उन्होंने एक छात्रा के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार का फुटेज देखने का दावा करते हुए सवाल किया कि आखिर छात्रों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया गया।

अस्पतालों से कथित जबरन छुट्टी

केंद्रीय राज्य मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्रों को रिम्स, सदर और पारस अस्पतालों से कथित पुलिसिया दबाव में जबरन डिस्चार्ज कराया गया। उन्होंने कहा कि घायल छात्रों को इलाज की जरूरत है, ऐसे में उन्हें दबाव में अस्पताल से निकालना अमानवीय है। उन्होंने इन सभी आरोपों की स्वतंत्र जांच की माँग दोहराई।

जेपीएससी में कथित अनियमितताएँ और नीलिमा केरकेट्टा का पत्र

सेठ ने जेपीएससी के कामकाज पर सवाल उठाते हुए पूर्व वरिष्ठ अधिकारी नीलिमा केरकेट्टा के एक पत्र का हवाला दिया। उनके अनुसार, लगभग दो वर्ष पूर्व सेवानिवृत्ति के समय नीलिमा केरकेट्टा ने सरकार को दो पन्नों का पत्र लिखकर आयोग के कामकाज में कथित अनियमितताओं और फाइलों के महीनों तक लंबित रहने जैसे गंभीर मुद्दे उठाए थे। सेठ ने आरोप लगाया कि उस पत्र को कथित तौर पर दबाकर रखा गया। उन्होंने कहा कि यदि उस पत्र पर दो साल पहले ही कार्रवाई हो जाती, तो आज जेपीएससी विवाद इस रूप में सामने नहीं आता।

कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना

संजय सेठ ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि जब प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल हुआ और बाद में लाठीचार्ज की तस्वीरें घंटों टीवी चैनलों पर प्रसारित होती रहीं, तब भी कांग्रेस नेतृत्व की ओर से कोई प्रभावी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। सेठ ने कहा कि झारखंड में राजनीतिक समीकरणों के कारण कांग्रेस जेएमएम सरकार के विरुद्ध बोलने से बच रही है और इस तरह दोहरा चरित्र अपना रही है। उन्होंने राहुल गांधी से अपील की कि यदि उनकी लोकतांत्रिक मुद्दों को लेकर वास्तव में चिंता है, तो वे झारखंड आकर प्रदर्शनकारी छात्रों और घायलों से मिलें।

आगे क्या

सेठ ने स्पष्ट किया कि वे इस पूरे मामले में सीबीआई जांच की माँग पर अडिग हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल सत्ता से नहीं, बल्कि लोक-लाज और जवाबदेही से चलता है, और झारखंड में सत्ता के लिए लोकतांत्रिक मर्यादाओं को दरकिनार किया जा रहा है। यह देखना होगा कि राज्य सरकार इन आरोपों पर क्या रुख अपनाती है और क्या न्यायिक या केंद्रीय एजेंसी की जांच का रास्ता खुलता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनमें से अधिकांश अभी तक 'कथित' के दायरे में हैं — न जेएमएम की ओर से आधिकारिक खंडन आया है, न पुलिस या अस्पताल प्रशासन की पुष्टि। जेपीएससी को लेकर छात्रों की शिकायतें वर्षों पुरानी हैं और नीलिमा केरकेट्टा वाला पत्र प्रकरण यदि सत्य है, तो यह प्रशासनिक विफलता की गहरी जड़ों की ओर इशारा करता है। कांग्रेस की चुप्पी पर सवाल उठाना स्वाभाविक है, लेकिन असली जवाबदेही झारखंड सरकार की है — वह बताए कि आयोग की कथित अनियमितताओं पर दो साल में क्या कदम उठाए गए।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेपीएससी छात्र आंदोलन में क्या हुआ?
झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित तौर पर जेएमएम कार्यकर्ताओं ने लाठियों से हमला किया। इस दौरान एक छात्रा के साथ भी कथित दुर्व्यवहार की बात सामने आई और घायल छात्रों को अस्पतालों से कथित दबाव में छुट्टी दिए जाने के आरोप लगाए गए हैं।
संजय सेठ ने सीबीआई जांच की माँग क्यों की?
केंद्रीय राज्य मंत्री संजय सेठ ने आरोप लगाया कि जेपीएससी में करीब ₹1,000 करोड़ का घोटाला हुआ है, छात्रों पर राजनीतिक हमला हुआ और घायलों को अस्पतालों से कथित पुलिसिया दबाव में डिस्चार्ज कराया गया। उनका कहना है कि इन सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई हस्तक्षेप ज़रूरी है।
नीलिमा केरकेट्टा का पत्र क्या है और इसका जेपीएससी विवाद से क्या संबंध है?
संजय सेठ के अनुसार, पूर्व वरिष्ठ अधिकारी नीलिमा केरकेट्टा ने लगभग दो वर्ष पहले सेवानिवृत्ति के समय सरकार को दो पन्नों का पत्र लिखकर जेपीएससी में कथित अनियमितताओं और फाइलों के महीनों तक लंबित रहने की बात उठाई थी। सेठ का आरोप है कि उस पत्र को दबाकर रखा गया, जिसके कारण आयोग की समस्याएँ बढ़ती रहीं और अंततः यह बड़ा विवाद सामने आया।
कांग्रेस और राहुल गांधी पर क्या आरोप लगाए गए?
संजय सेठ ने आरोप लगाया कि जेएमएम के साथ राजनीतिक समीकरणों के कारण कांग्रेस झारखंड सरकार के विरुद्ध बोलने से बच रही है। उन्होंने कहा कि आंसू गैस, वॉटर कैनन और लाठीचार्ज की तस्वीरें घंटों टीवी पर प्रसारित होती रहीं, फिर भी कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से कोई प्रभावी प्रतिक्रिया नहीं आई।
इस मामले में आगे क्या हो सकता है?
केंद्रीय राज्य मंत्री संजय सेठ ने सीबीआई जांच की माँग पर अडिग रहने की बात कही है। अब यह देखना होगा कि झारखंड सरकार इन आरोपों पर क्या आधिकारिक रुख अपनाती है और क्या केंद्र या न्यायपालिका के स्तर पर कोई जांच आदेश जारी होता है।
राष्ट्र प्रेस
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