कुमारस्वामी का कर्नाटक सरकार पर बड़ा आरोप: 2.94 लाख पद रिक्त!
सारांश
Key Takeaways
- कर्नाटक में 2.94 लाख सरकारी पद खाली हैं।
- बेरोजगारी का स्तर 7 लाख तक पहुँच चुका है।
- कुमारस्वामी ने सरकार की लापरवाही की आलोचना की।
- युवाओं ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया।
- सरकार को रिक्तियों को भरने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए।
नई दिल्ली, 24 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने मंगलवार को कर्नाटक सरकार पर 2.94 लाख सरकारी पदों को खाली छोड़ने का आरोप लगाते हुए गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने चेतावनी दी कि बेरोजगार युवाओं के विरोध-प्रदर्शनों को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।
कुमारस्वामी ने कहा कि धारवाड़ में बड़ी संख्या में नौकरी के अभ्यर्थियों का सड़कों पर उतरना इस बात का संकेत है कि सरकार ने समय पर रिक्त पदों को नहीं भरा है। युवाओं को सरकार की लापरवाही के कारण विरोध करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
उन्होंने प्रदर्शन कर रहे युवाओं का समर्थन करते हुए उनसे शांतिपूर्ण आंदोलन करने की अपील की और आश्वासन दिया कि वह उनके साथ खड़े हैं।
कुमारस्वामी ने कहा कि राज्य में इस समय 2.94 लाख सरकारी पद खाली हैं, जबकि केवल कैबिनेट रैंक के पद “सुपर-फास्ट” गति से भरे जा रहे हैं। यह कांग्रेस सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाता है।
कर्नाटक प्रशासनिक सुधार आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में 7 लाख बेरोजगार हैं, जो सरकारी नौकरियों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। रिक्तियों को चरणबद्ध तरीके से भरा जाना चाहिए था, लेकिन सरकार ने आंतरिक सत्ता संघर्ष में तीन बहुमूल्य वर्ष गंवा दिए और युवाओं के मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया।
उन्होंने कहा कि बेरोजगारी कोई साधारण समस्या नहीं है, बल्कि एक निरंतर फटने वाला ज्वालामुखी है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सरकार को बजट में अलग से प्रावधान कर भर्ती प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए थी।
कुमारस्वामी ने बताया कि शिक्षा, स्वास्थ्य और पुलिस विभाग में सबसे अधिक रिक्तियां हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बेंगलुरु के 18 प्रमुख पुलिस थानों में निरीक्षक (इंस्पेक्टर) तक नहीं हैं और इसके लिए सरकार की तबादला-राजनीति को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने कहा कि इन हालात का सीधा असर शासन-प्रशासन पर पड़ रहा है और सरकार को तुरंत रिक्त पदों को भरने के कदम उठाने चाहिए।
कुमारस्वामी ने सरकार से “विधान सौधा की तीसरी मंजिल से नीचे उतरकर” युवाओं की आवाज सुनने की अपील की और चेतावनी दी कि यदि उनकी नाराजगी को अनदेखा किया गया तो कांग्रेस सरकार को इसकी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी।