मेसी इवेंट मामला: कलकत्ता हाईकोर्ट ने पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास की अंतरिम सुरक्षा 30 नवंबर तक बढ़ाई
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने मंगलवार, 11 अगस्त को पश्चिम बंगाल के पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास को गिरफ्तारी सहित पुलिस की कठोर कार्रवाई से मिली अंतरिम सुरक्षा 30 नवंबर 2026 तक बढ़ा दी। यह मामला अर्जेंटीना के फुटबॉल स्टार लियोनेल मेसी के 'गोट इंडिया टूर' इवेंट के दौरान कथित अनियमितताओं से संबंधित है, जो 13 दिसंबर 2025 को कोलकाता के साल्ट लेक स्थित युवा भारती क्रीड़ांगन में आयोजित हुआ था।
मुख्य घटनाक्रम
जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की सिंगल बेंच ने बिस्वास को पहले 17 अगस्त तक अंतरिम सुरक्षा दी थी, जिसे अब 30 नवंबर तक विस्तारित कर दिया गया है। इस फैसले से पूर्व मंत्री को बड़ी राहत मिली है, क्योंकि मामले में पुलिस जाँच अभी जारी है। उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल पुलिस ने बीते सप्ताह हाईकोर्ट से उस दिन की घटनाओं पर रिपोर्ट दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय माँगा था।
इवेंट में क्या हुआ था
13 दिसंबर 2025 को लियोनेल मेसी के कोलकाता पहुँचने पर युवा भारती स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में भारी भीड़ उमड़ी। कथित तौर पर बिस्वास और उनके करीबी सहयोगी मेसी के इर्द-गिर्द बने रहे, जिससे महँगी टिकट खरीदकर आए दर्शक फुटबॉल स्टार की एक झलक पाने को तरसते रहे। इसके बाद नाराज फैंस ने स्टेडियम में तोड़फोड़ शुरू कर दी और भीड़ नियंत्रण पूरी तरह बिगड़ गया, जिसके चलते सुरक्षा कारणों से मेसी को कुछ ही मिनटों में मैदान से बाहर निकालना पड़ा।
बिस्वास की भूमिका और इस्तीफा
इस घटना के बाद अरूप बिस्वास की व्यापक आलोचना हुई और उन्हें पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के तहत उस दिन हालात बिगड़ने में बिस्वास की भूमिका की जाँच के लिए एक स्वतंत्र समिति गठित की गई है, जो अपनी जाँच जारी रखे हुए है।
बिस्वास की राजनीतिक पृष्ठभूमि
टॉलीगंज विधानसभा क्षेत्र से चार बार तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक रहे बिस्वास हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में पराजित हो गए। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विश्वस्त सहयोगी माने जाने वाले बिस्वास अब TMC के उस गुट के साथ हैं, जिसका नेतृत्व विधायक रितब्रता बनर्जी कर रहे हैं — जिसे 'बागी लेकिन बहुमत वाला' गुट कहा जा रहा है।
आगे क्या होगा
मामले में अगली सुनवाई 30 नवंबर को निर्धारित है। तब तक पश्चिम बंगाल पुलिस को अपनी रिपोर्ट दाखिल करनी होगी और स्वतंत्र जाँच समिति भी अपने निष्कर्ष प्रस्तुत करेगी। इस मामले का राजनीतिक असर TMC के आंतरिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।