मेसी 'गोट इंडिया टूर' विवाद: बंगाल के पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास दूसरी बार बिधाननगर पुलिस के सामने पेश
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास मंगलवार, 7 जुलाई को बिधाननगर साउथ पुलिस स्टेशन में पूछताछ के लिए पेश हुए। यह पेशी कोलकाता के युवा भारती क्रीड़ांगन, साल्ट लेक में 13 दिसंबर 2024 को आयोजित अर्जेंटीना के फुटबॉल स्टार लियोनेल मेसी के 'गोट इंडिया टूर' इवेंट के दौरान कथित अव्यवस्था और भीड़ कुप्रबंधन से जुड़ी जाँच के सिलसिले में हुई। 18 जून के बाद जाँचकर्ताओं के सामने यह उनकी दूसरी उपस्थिति थी।
पेशी का घटनाक्रम
बिस्वास शनिवार को पुलिस की ओर से भेजे गए नोटिस पर कार्रवाई करते हुए अपने वकील के साथ सुबह करीब 10 बजे थाने पहुँचे। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के इस नेता ने इससे पहले बिधाननगर पुलिस के कई समन को नज़रअंदाज़ किया था। अंततः कलकत्ता उच्च न्यायालय से अंतरिम कानूनी सुरक्षा मिलने के बाद वे 18 जून को पहली बार जाँचकर्ताओं के सामने पेश हुए थे।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला इवेंट के मुख्य आयोजक शताद्रु दत्ता की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर पर आधारित है। दत्ता ने आरोप लगाया है कि मेसी की उपस्थिति के दौरान युवा भारती स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में हुई कथित अफरातफरी और सुरक्षा चूक में बिस्वास की अहम भूमिका थी। दत्ता के अनुसार, इवेंट के लिए लगभग 70,000 टिकट छापे गए थे, जिनमें से बिस्वास ने कथित तौर पर अपने आधिकारिक पद का उपयोग करते हुए लगभग 22,000 टिकट लिए और उन्हें अपने सहयोगियों में वितरित किया अथवा बेचा। गौरतलब है कि इस हाई-प्रोफाइल इवेंट के बाद दत्ता को स्वयं भी गिरफ्तार किया गया था।
न्यायालय की भूमिका
बिस्वास ने किसी भी सख्त कार्रवाई से सुरक्षा पाने के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया था। सिंगल बेंच ने उन्हें शुरुआत में 2 जुलाई तक अंतरिम सुरक्षा प्रदान की, जिससे वे 18 जून को गिरफ्तारी के जोखिम के बिना पेश हो सके। बाद में दत्ता ने इस आदेश को उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच में चुनौती दी, परंतु डिवीजन बेंच ने पूर्व आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। इसके पश्चात बिस्वास को मिली सुरक्षा की अवधि 17 अगस्त तक बढ़ा दी गई।
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं। राज्य में सरकार बदलने के बाद दत्ता ने बिधाननगर पुलिस के पास एक नई शिकायत दर्ज कराई और पूर्व मंत्री पर लगाए गए आरोपों को दोहराया। बिस्वास पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए इवेंट के संचालन को प्रभावित किया और भीड़ प्रबंधन की विफलताओं के लिए ज़िम्मेदार रहे।
आगे क्या होगा
बिस्वास को 17 अगस्त तक अंतरिम सुरक्षा प्राप्त है, जिसके चलते वे फिलहाल गिरफ्तारी से बचे हुए हैं। जाँच जारी है और अगली सुनवाई तक पुलिस द्वारा और साक्ष्य जुटाए जाने की संभावना है। इस मामले का परिणाम न केवल बिस्वास के राजनीतिक भविष्य, बल्कि बड़े सार्वजनिक इवेंट्स में प्रशासनिक जवाबदेही की दिशा भी तय करेगा।