मेसी इवेंट तोड़फोड़ मामले में पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास के खिलाफ FIR दर्ज, टिकट कालाबाजारी का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता के बिधाननगर साउथ थाने में पश्चिम बंगाल के पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला 13 दिसंबर 2025 को साल्ट लेक स्थित युवा भारती क्रीड़ांगन में आयोजित फुटबॉल स्टार लियोनेल मेसी के इंडिया टूर कार्यक्रम के दौरान हुई तोड़फोड़ और सुरक्षा व्यवस्था में कथित चूक से जुड़ा है। पुलिस ने शनिवार रात कार्यक्रम के मुख्य आयोजक सतद्रु दत्ता की 17 मई को दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई की।
मुख्य आरोप और कानूनी धाराएँ
शिकायतकर्ता सतद्रु दत्ता ने पूर्व मंत्री के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 3(5), 308(2), 318(4), 351(2) और 61(2) के तहत शिकायत दर्ज कराई है। ये धाराएँ कथित तौर पर टिकटों की कालाबाजारी, जबरन वसूली, आपराधिक धमकी और धोखाधड़ी से संबंधित हैं। दत्ता ने आरोप लगाया है कि अरूप बिस्वास ने कार्यक्रम के करीब 22,000 टिकटों की कथित रूप से कालाबाजारी की थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूर्व मंत्री को जल्द ही पूछताछ के लिए तलब किया जा सकता है।
सुरक्षा घेरा तोड़ने का आरोप
दत्ता ने पुलिस को दिए पत्र में आरोप लगाया है कि अरूप बिस्वास अपने करीबी लोगों के साथ बिना अनुमति के प्रतिबंधित सुरक्षा क्षेत्र में घुस गए और मेसी की सुरक्षा को खतरे में डाला। उनका दावा है कि अपने राजनीतिक प्रभाव का उपयोग कर वे अर्जेंटीना के स्टार खिलाड़ी के काफी करीब पहुँच गए थे। दत्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि कार्यक्रम की सुरक्षा व्यवस्था में जानबूझकर लापरवाही बरती गई। इसके अलावा उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की पार्षद जुई बिस्वास और तत्कालीन डीजीपी राजीव कुमार के खिलाफ भी शिकायत दर्ज कराई है।
13 दिसंबर की रात क्या हुआ
13 दिसंबर 2025 को साल्ट लेक स्टेडियम में मेसी के कार्यक्रम के लिए बड़ी संख्या में दर्शक उमड़े और कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही स्टेडियम खचाखच भर गया था। मेसी के पहुँचते ही भीड़ उनके साथ तस्वीरें खिंचवाने के लिए आगे बढ़ गई, जिससे अफरा-तफरी मच गई। कई दर्शकों ने शिकायत की कि वे अपने पसंदीदा खिलाड़ी को ठीक से देख भी नहीं सके और मेसी लगभग 22 मिनट बाद ही मैदान से चले गए। इसके बाद स्टेडियम में तोड़फोड़ शुरू हो गई — दर्शकों ने गैलरी से मैदान में कुर्सियाँ और बोतलें फेंकीं, बैरिकेड और गेट तोड़े, तथा गैलरियों और शौचालयों में भी नुकसान पहुँचाया।
घटना के बाद की कार्रवाई
इस हंगामे के बाद राज्य सरकार ने जाँच समिति गठित की और आयोजक सतद्रु दत्ता को 13 दिसंबर को ही गिरफ्तार कर लिया गया था। उन्हें 14 दिनों की पुलिस हिरासत में भेजा गया और उनकी जमानत याचिका दो बार खारिज हुई, लेकिन 19 जनवरी को शहर की एक अदालत ने उन्हें जमानत दे दी। दत्ता को कोलकाता में मेसी को लाने का मुख्य सूत्रधार माना जाता है। घटना के बाद अरूप बिस्वास ने खेल मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था, जबकि तत्कालीन डीजीपी राजीव कुमार समेत कई वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और आगे की राह
गौरतलब है कि राज्य के नए खेल मंत्री निशीथ प्रामाणिक ने पदभार संभालने के बाद मेसी कार्यक्रम से जुड़े विवाद की फाइल दोबारा खोलने की बात कही थी, जिसके बाद यह जाँच तेज हुई। दत्ता ने शनिवार देर रात सोशल मीडिया पर लिखा, 'सत्यमेव जयते। पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो गई है। पश्चिम बंगाल की माननीय मुख्यमंत्री, खेल मंत्री और डीजीपी का धन्यवाद।' यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक संवेदनशील मोड़ पर आया है और आने वाले दिनों में पूर्व मंत्री की पूछताछ इस पूरे प्रकरण की दिशा तय कर सकती है।