11 अगस्त 2026
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मेसी टूर विवाद: बंगाल के पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास को तीसरा पुलिस नोटिस, अदालत ने लगाई राज्य छोड़ने पर रोक

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मेसी टूर विवाद: बंगाल के पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास को तीसरा पुलिस नोटिस, अदालत ने लगाई राज्य छोड़ने पर रोक

सारांश

मेसी के 'गोट इंडिया टूर' से जुड़े कथित घोटाले में बंगाल के पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास को तीसरा पुलिस नोटिस मिला है। दो बार पेशी से बचने और अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद अब वे कथित तौर पर छिपे हैं — जबकि कलकत्ता HC ने उनके राज्य छोड़ने पर रोक लगा दी है।

मुख्य बातें

बिधाननगर दक्षिण पुलिस स्टेशन ने पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास को 14 जून 2025 को तीसरा समन जारी किया।
मामला 14 दिसंबर 2024 को हुए लियोनेल मेसी के 'गोट इंडिया टूर' में कथित टिकट ब्लैक-मार्केटिंग, जबरन वसूली और धोखाधड़ी से जुड़ा है।
बिस्वास 4 जून और 8 जून को जाँचकर्ताओं के सामने पेश नहीं हुए; स्वास्थ्य का हवाला दिया लेकिन मेडिकल रिपोर्ट नहीं दी।
बारासात अदालत ने अग्रिम जमानत अर्जी खारिज की; कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सशर्त राहत दी और पश्चिम बंगाल छोड़ने पर रोक लगाई।
पुलिस सूत्रों के अनुसार बिस्वास तीसरे नोटिस के बाद से कथित तौर पर छिपे हुए हैं।

पश्चिम बंगाल के पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास को बिधाननगर दक्षिण पुलिस स्टेशन ने 14 जून 2025 को तीसरा समन जारी किया है — यह नोटिस लियोनेल मेसी के 'गोट इंडिया टूर' इवेंट (14 दिसंबर 2024) से जुड़े कथित कुप्रबंधन, वित्तीय गड़बड़ियों और जबरन वसूली के आरोपों की जाँच के सिलसिले में भेजा गया है। नोटिस में बिस्वास को समन मिलने के 48 घंटे के भीतर जाँचकर्ताओं के सामने पेश होने का निर्देश दिया गया है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद 17 मई 2025 को तब सामने आया जब इवेंट के मुख्य आयोजक सतद्रु दत्ता ने बिधाननगर दक्षिण पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई। दत्ता ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता बिस्वास पर कथित टिकट ब्लैक-मार्केटिंग, जबरन वसूली, धमकी, धोखाधड़ी और इवेंट की सुरक्षा में चूक का आरोप लगाया। शिकायत भारतीय न्याय संहिता (BNS) के कई प्रावधानों के तहत दर्ज की गई।

पेशी से बचने का सिलसिला

एफआईआर के बाद पुलिस ने बिस्वास को पहले 4 जून को पेश होने का निर्देश दिया। पूर्व मंत्री ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए कम से कम दो सप्ताह की मोहलत माँगी, जिसे जाँचकर्ताओं ने अस्वीकार कर दिया। इसके बाद 8 जून को सुबह 11 बजे तक पेश होने का दूसरा नोटिस जारी हुआ। डेडलाइन से एक दिन पहले पुलिस ने उनके दक्षिण कोलकाता स्थित आवास पर नोटिस चिपकाया, यह दर्ज करते हुए कि बीमारी के दावे के समर्थन में कोई मेडिकल रिपोर्ट नहीं दी गई। बिस्वास 8 जून को भी जाँचकर्ताओं के सामने नहीं आए। पुलिस सूत्रों के अनुसार, न तो उन्होंने और न ही उनके कानूनी प्रतिनिधियों ने अनुपस्थिति की आधिकारिक सूचना दी।

अदालत का हस्तक्षेप

बिस्वास ने बारासात अदालत में अग्रिम जमानत की अर्जी दायर की, जो खारिज कर दी गई। इसके बाद उन्होंने कलकत्ता उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और जबरदस्ती की कार्रवाई से संरक्षण माँगा। उच्च न्यायालय ने सशर्त राहत देते हुए पुलिस को निर्देश दिया कि बिस्वास को पेशी के लिए 48 घंटे पहले नोटिस दिया जाए और बिना उचित प्रक्रिया के गिरफ्तारी जैसे जबरदस्ती के कदम न उठाए जाएँ। साथ ही अदालत ने बिस्वास पर पश्चिम बंगाल छोड़ने पर तब तक रोक लगा दी जब तक पूर्व अनुमति न ली जाए।

पुलिस की स्थिति और बिस्वास का ठिकाना

पुलिस सूत्रों के अनुसार, तीसरा नोटिस जारी होने के बाद से अरूप बिस्वास कथित तौर पर छिपे हुए हैं। जाँचकर्ता अब तीसरे समन पर उनकी प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में उभरा है जब पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ TMC पहले से ही कई विवादों से घिरी है।

आगे क्या होगा

उच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत पुलिस बिस्वास को बिना पूर्व सूचना के गिरफ्तार नहीं कर सकती, लेकिन यदि वे तीसरे नोटिस पर भी पेश नहीं होते, तो जाँचकर्ता अदालत से और कड़े कदमों की अनुमति माँग सकते हैं। मामले की अगली सुनवाई और बिस्वास का अगला कदम इस विवाद की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन पुलिस की कार्रवाई की गति ज़रूर धीमी करती है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अरूप बिस्वास को पुलिस नोटिस क्यों भेजा गया है?
पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास पर लियोनेल मेसी के 'गोट इंडिया टूर' (14 दिसंबर 2024) में कथित टिकट ब्लैक-मार्केटिंग, जबरन वसूली, धमकी, धोखाधड़ी और सुरक्षा चूक के आरोप हैं। इवेंट के आयोजक सतद्रु दत्ता की शिकायत पर 17 मई 2025 को BNS के तहत FIR दर्ज हुई थी।
यह तीसरा नोटिस क्यों जारी हुआ?
बिस्वास 4 जून और 8 जून को जारी पहले दो नोटिसों के बावजूद जाँचकर्ताओं के सामने पेश नहीं हुए। उन्होंने स्वास्थ्य कारण बताए लेकिन मेडिकल रिपोर्ट नहीं दी, जिसके बाद बिधाननगर दक्षिण पुलिस स्टेशन ने 48 घंटे में पेशी का तीसरा समन जारी किया।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने क्या आदेश दिया है?
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बिस्वास को सशर्त राहत दी है — पुलिस को पेशी के लिए 48 घंटे पहले नोटिस देना होगा और बिना उचित प्रक्रिया के गिरफ्तारी नहीं की जा सकती। साथ ही अदालत ने उन पर पूर्व अनुमति के बिना पश्चिम बंगाल छोड़ने पर रोक लगाई है।
अग्रिम जमानत पर क्या हुआ?
बिस्वास ने पहले बारासात अदालत में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल की, जो खारिज हो गई। इसके बाद उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट से संरक्षण माँगा जहाँ उन्हें सीमित सशर्त राहत मिली, लेकिन जाँच जारी रखने की अनुमति भी दी गई।
अब आगे क्या हो सकता है?
यदि बिस्वास तीसरे नोटिस पर भी पेश नहीं होते, तो जाँचकर्ता अदालत से और सख्त कदमों की अनुमति माँग सकते हैं। उच्च न्यायालय के आदेश के तहत जाँच बिना रुकावट जारी है, और बिस्वास का अगला कदम इस मामले की कानूनी दिशा तय करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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