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मेसी 'गोट इंडिया टूर' विवाद: पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास से बिधाननगर पुलिस की पूछताछ जारी

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मेसी 'गोट इंडिया टूर' विवाद: पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास से बिधाननगर पुलिस की पूछताछ जारी

सारांश

मेसी के 'गोट इंडिया टूर' में सुरक्षा चूक का मामला अब पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास के दरवाजे तक पहुँच गया है। 22,000 टिकट हड़पने और मेसी को असहज करने के आरोपों के बीच बिधाननगर पुलिस ने लगातार दो दिन उनसे पूछताछ की — यह विवाद अब खेल से बड़ा राजनीतिक मामला बन चुका है।

मुख्य बातें

पूर्व पश्चिम बंगाल खेल मंत्री अरूप बिस्वास से बिधाननगर साउथ पुलिस स्टेशन में बुधवार और गुरुवार — लगातार दो दिन पूछताछ हुई।
मेसी की टीम ने पुलिस आयुक्त को ईमेल में आरोप लगाया कि बिस्वास की मैदान में मौजूदगी से सुरक्षा व्यवस्था चरमराई और मेसी को कार्यक्रम बीच में छोड़ना पड़ा।
आयोजनकर्ता सतद्रु दत्ता का आरोप — 70,000 में से करीब 22,000 टिकट तत्कालीन मंत्री ने अपने प्रभाव से हासिल किए और परिचितों में बाँटे या बेचे।
अनुमति केवल 3 फोटोग्राफरों को थी, लेकिन मैदान में करीब 40 लोग अनधिकृत रूप से मौजूद थे।
बिस्वास ने अदालत से अंतरिम राहत मिलने के बाद जाँच में सहयोग शुरू किया; अदालत ने शर्तों सहित गिरफ्तारी से संरक्षण दिया था।

पूर्व पश्चिम बंगाल खेल मंत्री अरूप बिस्वास गुरुवार को बिधाननगर साउथ पुलिस स्टेशन पहुँचे, जहाँ उनसे दिसंबर 2025 में कोलकाता के युवा भारती क्रीडांगन, साल्ट लेक में आयोजित फुटबॉल महानायक लियोनेल मेसी के 'गोट इंडिया टूर' के दौरान हुई सुरक्षा चूक को लेकर पूछताछ की गई। यह उनकी लगातार दूसरी पूछताछ थी — इससे पहले बुधवार को भी उन्हें उसी थाने में तलब किया गया था। मेसी की टीम द्वारा पुलिस को भेजी गई ईमेल शिकायत के बाद यह जाँच नए सिरे से तेज हुई है।

मेसी की टीम का आरोप: मंत्री की मौजूदगी से बिगड़ी व्यवस्था

मेसी की टीम के एक सदस्य ने बिधाननगर पुलिस आयुक्त त्रिपुरारी अथर्व को भेजे गए ईमेल में आरोप लगाया है कि स्टेडियम में अव्यवस्था उस वक्त शुरू हुई, जब तत्कालीन खेल मंत्री अरूप बिस्वास मैदान में उतरे। शिकायत के अनुसार, बिस्वास बार-बार मेसी के पास जाकर उनके कंधे और कमर को छूते हुए तस्वीरें खिंचवाने की कोशिश कर रहे थे। इस दौरान बड़ी संख्या में अनधिकृत लोग भी मैदान में घुस आए, जिससे सुरक्षा घेरा पूरी तरह टूट गया।

शिकायत में यह भी बताया गया है कि आयोजन स्थल पर केवल तीन फोटोग्राफरों को अनुमति दी गई थी, लेकिन उस समय मैदान में करीब 40 लोग मौजूद थे। इस अनियंत्रित भीड़ के कारण मेसी असहज हो गए और सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता उत्पन्न होने के बाद उन्हें कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर जाना पड़ा।

टिकट विवाद: 22 हजार टिकट मंत्री ने लिए — आरोपकर्ता

आयोजनकर्ता सतद्रु दत्ता ने दावा किया है कि कार्यक्रम के लिए कुल 70,000 टिकट छापे गए थे, जिनमें से लगभग 22,000 टिकट तत्कालीन खेल मंत्री ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर हासिल कर लिए थे। आरोप है कि इन टिकटों को परिचितों में बाँटा गया और कुछ की बिक्री भी की गई, जिससे भीड़ अनियंत्रित हो गई और सुरक्षा व्यवस्था ध्वस्त हो गई।

गौरतलब है कि इसी घटना के बाद सतद्रु दत्ता को गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा है कि मेसी की टीम द्वारा दिए गए नए विवरण जाँच में मददगार साबित होंगे और उन्होंने भी पूर्व मंत्री पर सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।

जाँच से बचते रहे, अदालत से राहत के बाद पेश हुए

पुलिस ने इस मामले में अरूप बिस्वास को कई बार पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया था, लेकिन वे अब तक जाँच में शामिल नहीं हुए थे। अदालत से अंतरिम राहत मिलने के बाद वे सहयोग के लिए सामने आए हैं। अदालत ने पहले उन्हें कुछ शर्तों के साथ गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान किया था और पुलिस को निष्पक्ष जाँच के निर्देश दिए थे।

आगे क्या होगा

यह मामला पश्चिम बंगाल में खेल आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक हस्तक्षेप पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जाँच अभी जारी है और मेसी की टीम की ईमेल शिकायत के आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई तय करेगी। इस प्रकरण के नतीजे भविष्य में भारत में होने वाले अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की सुरक्षा नीति को भी प्रभावित कर सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ सत्ता का दुरुपयोग प्रोटोकॉल को पीछे धकेल देता है। 22,000 टिकट एक मंत्री के हाथों में जाने का आरोप — अगर सिद्ध होता है — तो यह प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि संगठित लूट है। असली सवाल यह है कि अदालत से राहत मिलने से पहले बिस्वास ने कई नोटिसों के बावजूद जाँच में सहयोग क्यों नहीं किया — और क्या पुलिस अब राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर निष्पक्ष जाँच कर पाएगी।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेसी 'गोट इंडिया टूर' विवाद क्या है?
दिसंबर 2025 में कोलकाता के युवा भारती क्रीडांगन में लियोनेल मेसी के 'गोट इंडिया टूर' के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई और मेसी को कार्यक्रम बीच में छोड़कर जाना पड़ा। मेसी की टीम ने पुलिस को ईमेल भेजकर तत्कालीन खेल मंत्री अरूप बिस्वास और अनधिकृत भीड़ पर इस अव्यवस्था का आरोप लगाया है।
अरूप बिस्वास पर क्या आरोप हैं?
मेसी की टीम का आरोप है कि बिस्वास बार-बार मेसी के पास जाकर उनके कंधे और कमर को छूते हुए तस्वीरें खिंचवाने की कोशिश कर रहे थे, जिससे मेसी असहज हुए। इसके अलावा आयोजनकर्ता सतद्रु दत्ता का आरोप है कि बिस्वास ने अपने प्रभाव से 22,000 टिकट हासिल कर परिचितों में बाँटे और कुछ बेचे भी।
बिस्वास पुलिस जाँच में पहले क्यों नहीं आए?
पुलिस ने उन्हें कई बार नोटिस जारी किया, लेकिन वे जाँच में शामिल नहीं हुए। अदालत से अंतरिम राहत और शर्तों सहित गिरफ्तारी से संरक्षण मिलने के बाद वे बिधाननगर साउथ पुलिस स्टेशन में पूछताछ के लिए पेश हुए।
आयोजनकर्ता सतद्रु दत्ता की इस मामले में क्या भूमिका है?
सतद्रु दत्ता इस कार्यक्रम के आयोजनकर्ता हैं और घटना के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने पूर्व मंत्री बिस्वास पर सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही के आरोप लगाए हैं और कहा है कि मेसी की टीम के नए विवरण जाँच में सहायक होंगे।
इस मामले में जाँच अब किस दिशा में है?
बिधाननगर पुलिस ने बिस्वास से लगातार दो दिन पूछताछ की है और मेसी की टीम की ईमेल शिकायत को आधार बनाकर जाँच आगे बढ़ाई जा रही है। अदालत ने पुलिस को निष्पक्ष जाँच के निर्देश दिए हैं और मामला अभी भी जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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