मेसी 'गोट इंडिया टूर' विवाद: पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास से बिधाननगर पुलिस की पूछताछ जारी
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व पश्चिम बंगाल खेल मंत्री अरूप बिस्वास गुरुवार को बिधाननगर साउथ पुलिस स्टेशन पहुँचे, जहाँ उनसे दिसंबर 2025 में कोलकाता के युवा भारती क्रीडांगन, साल्ट लेक में आयोजित फुटबॉल महानायक लियोनेल मेसी के 'गोट इंडिया टूर' के दौरान हुई सुरक्षा चूक को लेकर पूछताछ की गई। यह उनकी लगातार दूसरी पूछताछ थी — इससे पहले बुधवार को भी उन्हें उसी थाने में तलब किया गया था। मेसी की टीम द्वारा पुलिस को भेजी गई ईमेल शिकायत के बाद यह जाँच नए सिरे से तेज हुई है।
मेसी की टीम का आरोप: मंत्री की मौजूदगी से बिगड़ी व्यवस्था
मेसी की टीम के एक सदस्य ने बिधाननगर पुलिस आयुक्त त्रिपुरारी अथर्व को भेजे गए ईमेल में आरोप लगाया है कि स्टेडियम में अव्यवस्था उस वक्त शुरू हुई, जब तत्कालीन खेल मंत्री अरूप बिस्वास मैदान में उतरे। शिकायत के अनुसार, बिस्वास बार-बार मेसी के पास जाकर उनके कंधे और कमर को छूते हुए तस्वीरें खिंचवाने की कोशिश कर रहे थे। इस दौरान बड़ी संख्या में अनधिकृत लोग भी मैदान में घुस आए, जिससे सुरक्षा घेरा पूरी तरह टूट गया।
शिकायत में यह भी बताया गया है कि आयोजन स्थल पर केवल तीन फोटोग्राफरों को अनुमति दी गई थी, लेकिन उस समय मैदान में करीब 40 लोग मौजूद थे। इस अनियंत्रित भीड़ के कारण मेसी असहज हो गए और सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता उत्पन्न होने के बाद उन्हें कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर जाना पड़ा।
टिकट विवाद: 22 हजार टिकट मंत्री ने लिए — आरोपकर्ता
आयोजनकर्ता सतद्रु दत्ता ने दावा किया है कि कार्यक्रम के लिए कुल 70,000 टिकट छापे गए थे, जिनमें से लगभग 22,000 टिकट तत्कालीन खेल मंत्री ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर हासिल कर लिए थे। आरोप है कि इन टिकटों को परिचितों में बाँटा गया और कुछ की बिक्री भी की गई, जिससे भीड़ अनियंत्रित हो गई और सुरक्षा व्यवस्था ध्वस्त हो गई।
गौरतलब है कि इसी घटना के बाद सतद्रु दत्ता को गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा है कि मेसी की टीम द्वारा दिए गए नए विवरण जाँच में मददगार साबित होंगे और उन्होंने भी पूर्व मंत्री पर सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
जाँच से बचते रहे, अदालत से राहत के बाद पेश हुए
पुलिस ने इस मामले में अरूप बिस्वास को कई बार पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया था, लेकिन वे अब तक जाँच में शामिल नहीं हुए थे। अदालत से अंतरिम राहत मिलने के बाद वे सहयोग के लिए सामने आए हैं। अदालत ने पहले उन्हें कुछ शर्तों के साथ गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान किया था और पुलिस को निष्पक्ष जाँच के निर्देश दिए थे।
आगे क्या होगा
यह मामला पश्चिम बंगाल में खेल आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक हस्तक्षेप पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जाँच अभी जारी है और मेसी की टीम की ईमेल शिकायत के आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई तय करेगी। इस प्रकरण के नतीजे भविष्य में भारत में होने वाले अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की सुरक्षा नीति को भी प्रभावित कर सकते हैं।