मैसी की टीम का आरोप: कोलकाता 'गोट इंडिया टूर' अव्यवस्था के लिए पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास जिम्मेदार
सारांश
मुख्य बातें
फुटबॉल महानायक लियोनेल मैसी की टीम ने बुधवार को बिधाननगर पुलिस आयुक्तालय पहुँचकर पश्चिम बंगाल के पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास पर गंभीर आरोप लगाए — कि दिसंबर 2024 में कोलकाता के साल्ट लेक स्थित युवा भारती क्रीड़ांगन में 'गोट इंडिया टूर' के दौरान हुई भारी अव्यवस्था के लिए वही जिम्मेदार हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मैसी के सलाहकार के रूप में भारत दौरे पर आए टीम के एक सदस्य ने बिधाननगर पुलिस आयुक्त त्रिपुरारी अथर्व को ईमेल भेजकर यह दावा किया।
ईमेल में क्या आरोप लगाए गए
मैसी की टीम के सदस्य ने अपने ईमेल में आरोप लगाया कि स्टेडियम में अफरातफरी उस वक्त शुरू हुई जब तत्कालीन खेल मंत्री अरूप बिस्वास मैदान में पहुँचे। ईमेल के अनुसार, बिस्वास बार-बार मैसी के कंधे और कमर को छूकर उनके साथ तस्वीरें खिंचवाने की कोशिश करते रहे।
शिकायत में यह भी कहा गया कि बिस्वास के साथ कई ऐसे लोग मैदान में घुस आए जिन्हें वहाँ आने की अनुमति नहीं थी। मैदान पर केवल तीन फोटोग्राफरों को रहने की इजाज़त थी, लेकिन उस दौरान करीब 40 लोग वहाँ मौजूद थे। इससे मैसी असहज हो गए और उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए, जिसके चलते उन्हें कार्यक्रम बीच में छोड़कर मैदान से जाना पड़ा।
आयोजक सतद्रु दत्ता को क्लीन चिट
मैसी की टीम ने स्पष्ट किया कि इस पूरे घटनाक्रम के लिए कार्यक्रम आयोजक सतद्रु दत्ता जिम्मेदार नहीं थे और स्थिति उनके नियंत्रण से बाहर थी। दत्ता ने भी कहा कि मैसी की टीम की ओर से आई यह जानकारी जाँच में सहायक होगी।
गौरतलब है कि 13 दिसंबर 2024 को हुई इस अव्यवस्था के बाद सतद्रु दत्ता को गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कई बार पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास पर सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही और अव्यवस्था फैलाने का आरोप लगाया है।
टिकट घोटाले का आरोप
सतद्रु दत्ता का दावा है कि मैसी के कार्यक्रम के लिए कुल 70,000 टिकट छापे गए थे, जिनमें से 22,000 टिकट तत्कालीन खेल मंत्री अरूप बिस्वास ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर हासिल कर लिए। दत्ता के अनुसार, इन टिकटों को मंत्री ने अपने परिचितों में बाँटा और कुछ की बिक्री भी कराई, जिससे स्टेडियम में भारी भीड़ और अव्यवस्था की स्थिति पैदा हुई।
अदालत और कानूनी मोर्चे पर घटनाक्रम
भाजपा सरकार बनने के बाद दत्ता ने बिधाननगर पुलिस में अरूप बिस्वास के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई और उन्हें सुरक्षा चूक का जिम्मेदार ठहराया। मंगलवार को दत्ता ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर बिस्वास को मिली कानूनी संरक्षण को चुनौती दी।
दत्ता के वकील अरिंदम जना ने मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया, जिसके बाद अदालत ने याचिका स्वीकार कर ली। इस सप्ताह के अंत में इस मामले की सुनवाई होने की संभावना है।
उल्लेखनीय है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद अरूप बिस्वास ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अदालत से संरक्षण माँगा था। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने कुछ शर्तों के साथ उन्हें अंतरिम राहत देते हुए जाँच में सहयोग करने का निर्देश दिया था और बिधाननगर पुलिस को निष्पक्ष जाँच करने के आदेश भी दिए थे।
पुलिस का रुख और आगे की राह
पुलिस ने अब तक पूछताछ के लिए अरूप बिस्वास को कई नोटिस जारी किए हैं, लेकिन उन्होंने अब तक पूछताछ में हिस्सा नहीं लिया है। मैसी की टीम का यह ईमेल जाँच को नई दिशा दे सकता है — विशेष रूप से तब, जब कलकत्ता उच्च न्यायालय में सुनवाई निकट है।