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मैसी की टीम का आरोप: कोलकाता 'गोट इंडिया टूर' अव्यवस्था के लिए पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास जिम्मेदार

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मैसी की टीम का आरोप: कोलकाता 'गोट इंडिया टूर' अव्यवस्था के लिए पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास जिम्मेदार

सारांश

मैसी के 'गोट इंडिया टूर' का कोलकाता विवाद अब पुलिस और अदालत दोनों मोर्चों पर गर्म है। टीम के ईमेल में पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास पर मैदान में घुसकर अव्यवस्था फैलाने और 22,000 टिकट हड़पने का आरोप — जबकि कलकत्ता उच्च न्यायालय में सुनवाई इसी सप्ताह संभावित है।

मुख्य बातें

मैसी की टीम ने बुधवार को बिधाननगर पुलिस आयुक्त त्रिपुरारी अथर्व को ईमेल भेजकर पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास पर अव्यवस्था फैलाने का आरोप लगाया।
आरोप है कि बिस्वास ने मैसी को बार-बार छूकर तस्वीरें खिंचवाने की कोशिश की और अनधिकृत लोगों को मैदान में प्रवेश दिलाया।
मैदान पर केवल 3 फोटोग्राफरों की अनुमति थी, लेकिन उस वक्त करीब 40 लोग मौजूद थे।
सतद्रु दत्ता का दावा — 70,000 में से 22,000 टिकट बिस्वास ने अपने प्रभाव से हासिल किए।
दत्ता ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर बिस्वास की कानूनी संरक्षण को चुनौती दी; इस सप्ताह सुनवाई संभावित।
पुलिस के कई नोटिस के बावजूद अरूप बिस्वास अब तक पूछताछ में शामिल नहीं हुए हैं।

फुटबॉल महानायक लियोनेल मैसी की टीम ने बुधवार को बिधाननगर पुलिस आयुक्तालय पहुँचकर पश्चिम बंगाल के पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास पर गंभीर आरोप लगाए — कि दिसंबर 2024 में कोलकाता के साल्ट लेक स्थित युवा भारती क्रीड़ांगन में 'गोट इंडिया टूर' के दौरान हुई भारी अव्यवस्था के लिए वही जिम्मेदार हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मैसी के सलाहकार के रूप में भारत दौरे पर आए टीम के एक सदस्य ने बिधाननगर पुलिस आयुक्त त्रिपुरारी अथर्व को ईमेल भेजकर यह दावा किया।

ईमेल में क्या आरोप लगाए गए

मैसी की टीम के सदस्य ने अपने ईमेल में आरोप लगाया कि स्टेडियम में अफरातफरी उस वक्त शुरू हुई जब तत्कालीन खेल मंत्री अरूप बिस्वास मैदान में पहुँचे। ईमेल के अनुसार, बिस्वास बार-बार मैसी के कंधे और कमर को छूकर उनके साथ तस्वीरें खिंचवाने की कोशिश करते रहे।

शिकायत में यह भी कहा गया कि बिस्वास के साथ कई ऐसे लोग मैदान में घुस आए जिन्हें वहाँ आने की अनुमति नहीं थी। मैदान पर केवल तीन फोटोग्राफरों को रहने की इजाज़त थी, लेकिन उस दौरान करीब 40 लोग वहाँ मौजूद थे। इससे मैसी असहज हो गए और उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए, जिसके चलते उन्हें कार्यक्रम बीच में छोड़कर मैदान से जाना पड़ा।

आयोजक सतद्रु दत्ता को क्लीन चिट

मैसी की टीम ने स्पष्ट किया कि इस पूरे घटनाक्रम के लिए कार्यक्रम आयोजक सतद्रु दत्ता जिम्मेदार नहीं थे और स्थिति उनके नियंत्रण से बाहर थी। दत्ता ने भी कहा कि मैसी की टीम की ओर से आई यह जानकारी जाँच में सहायक होगी।

गौरतलब है कि 13 दिसंबर 2024 को हुई इस अव्यवस्था के बाद सतद्रु दत्ता को गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कई बार पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास पर सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही और अव्यवस्था फैलाने का आरोप लगाया है।

टिकट घोटाले का आरोप

सतद्रु दत्ता का दावा है कि मैसी के कार्यक्रम के लिए कुल 70,000 टिकट छापे गए थे, जिनमें से 22,000 टिकट तत्कालीन खेल मंत्री अरूप बिस्वास ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर हासिल कर लिए। दत्ता के अनुसार, इन टिकटों को मंत्री ने अपने परिचितों में बाँटा और कुछ की बिक्री भी कराई, जिससे स्टेडियम में भारी भीड़ और अव्यवस्था की स्थिति पैदा हुई।

अदालत और कानूनी मोर्चे पर घटनाक्रम

भाजपा सरकार बनने के बाद दत्ता ने बिधाननगर पुलिस में अरूप बिस्वास के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई और उन्हें सुरक्षा चूक का जिम्मेदार ठहराया। मंगलवार को दत्ता ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर बिस्वास को मिली कानूनी संरक्षण को चुनौती दी।

दत्ता के वकील अरिंदम जना ने मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया, जिसके बाद अदालत ने याचिका स्वीकार कर ली। इस सप्ताह के अंत में इस मामले की सुनवाई होने की संभावना है।

उल्लेखनीय है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद अरूप बिस्वास ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अदालत से संरक्षण माँगा था। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने कुछ शर्तों के साथ उन्हें अंतरिम राहत देते हुए जाँच में सहयोग करने का निर्देश दिया था और बिधाननगर पुलिस को निष्पक्ष जाँच करने के आदेश भी दिए थे।

पुलिस का रुख और आगे की राह

पुलिस ने अब तक पूछताछ के लिए अरूप बिस्वास को कई नोटिस जारी किए हैं, लेकिन उन्होंने अब तक पूछताछ में हिस्सा नहीं लिया है। मैसी की टीम का यह ईमेल जाँच को नई दिशा दे सकता है — विशेष रूप से तब, जब कलकत्ता उच्च न्यायालय में सुनवाई निकट है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन में भारतीय राजनीतिक संस्कृति की उस पुरानी बीमारी का दस्तावेज़ है — जहाँ मंत्री और उनके चहेते प्रोटोकॉल को ताक पर रखकर सेलिब्रिटी इवेंट को अपनी प्रतिष्ठा चमकाने का अवसर मान लेते हैं। विडंबना यह है कि जिस आयोजक को पहले गिरफ्तार किया गया, उसे अब मैसी की टीम ने क्लीन चिट दी है — और जिस पर असली आरोप है, वह पुलिस नोटिस के बावजूद पूछताछ से बचता रहा। कलकत्ता उच्च न्यायालय की सुनवाई यह तय करेगी कि राजनीतिक संरक्षण कानूनी जवाबदेही से ऊपर है या नहीं।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मैसी की टीम ने बिधाननगर पुलिस को ईमेल में क्या आरोप लगाए?
मैसी के सलाहकार ने ईमेल में आरोप लगाया कि पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास के मैदान में पहुँचने के बाद अव्यवस्था शुरू हुई — वे बार-बार मैसी को छूकर तस्वीरें खिंचवाने की कोशिश कर रहे थे और उनके साथ अनधिकृत लोग भी मैदान में घुस आए।
'गोट इंडिया टूर' में कोलकाता अव्यवस्था की घटना कब हुई थी?
यह घटना 13 दिसंबर 2024 को कोलकाता के साल्ट लेक स्थित युवा भारती क्रीड़ांगन में हुई थी। मैदान पर भारी भीड़ और सुरक्षा चूक के कारण मैसी को कार्यक्रम बीच में छोड़कर जाना पड़ा था।
सतद्रु दत्ता ने अरूप बिस्वास पर टिकटों को लेकर क्या आरोप लगाए हैं?
सतद्रु दत्ता का दावा है कि कार्यक्रम के लिए छापे गए 70,000 टिकटों में से 22,000 टिकट तत्कालीन मंत्री अरूप बिस्वास ने अपने प्रभाव से हासिल किए और उन्हें परिचितों में बाँटा तथा कुछ की बिक्री भी कराई।
कलकत्ता उच्च न्यायालय में इस मामले में क्या हो रहा है?
सतद्रु दत्ता ने मंगलवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर अरूप बिस्वास को मिली अंतरिम कानूनी संरक्षण को चुनौती दी है। मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने याचिका स्वीकार कर ली है और इस सप्ताह के अंत में सुनवाई होने की संभावना है।
अरूप बिस्वास ने पुलिस नोटिस का जवाब क्यों नहीं दिया?
पुलिस ने पूछताछ के लिए अरूप बिस्वास को कई बार नोटिस जारी किए हैं, लेकिन उन्होंने अब तक पूछताछ में हिस्सा नहीं लिया। एफआईआर दर्ज होने के बाद उन्होंने न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य से अंतरिम राहत प्राप्त की थी, जिसमें जाँच में सहयोग करने की शर्त रखी गई थी।
राष्ट्र प्रेस
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