26 जुलाई 2026
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मेसी 'गोट इंडिया टूर' मामला: अरूप विश्वास को 17 अगस्त तक अंतरिम राहत, पासपोर्ट जमा करने का आदेश

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मेसी 'गोट इंडिया टूर' मामला: अरूप विश्वास को 17 अगस्त तक अंतरिम राहत, पासपोर्ट जमा करने का आदेश

सारांश

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मेसी के 'गोट इंडिया टूर' में कथित अनियमितताओं के मामले में पूर्व मंत्री अरूप विश्वास को 17 अगस्त तक राहत दी, लेकिन पासपोर्ट जमा करने और जाँच में सहयोग की सख्त शर्तें लगाईं। 22,000 टिकट अकेले विश्वास ने लिए — यह मामला सिर्फ भीड़ प्रबंधन नहीं, राजनीतिक जवाबदेही का सवाल बन गया है।

मुख्य बातें

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 10 जून 2026 को पूर्व मंत्री अरूप विश्वास को 17 अगस्त 2026 तक अंतरिम राहत प्रदान की।
अरूप विश्वास को 7 दिनों के भीतर पासपोर्ट निचली अदालत में जमा करना होगा और अदालत की अनुमति के बिना आवासीय क्षेत्र नहीं छोड़ सकेंगे।
जाँच एजेंसी को पूछताछ नोटिस के लिए कम से कम 48 घंटे पहले सूचना देनी होगी।
आरोप है कि 70,000 में से 22,000 टिकट अकेले अरूप विश्वास ने अपने विधानसभा क्षेत्र के लिए लिए और क्लबों के जरिए बेचे।
बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट को 4 सप्ताह में जाँच रिपोर्ट पेश करनी होगी।
यह मामला 13 दिसंबर 2025 को साल्ट लेक, कोलकाता में आयोजित मेसी के कार्यक्रम में हुई कथित अव्यवस्था से जुड़ा है।

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 10 जून 2026 को पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री अरूप विश्वास को फुटबॉल महानायक लियोनेल मेसी के 'गोट इंडिया टूर' कार्यक्रम में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में 17 अगस्त 2026 तक किसी भी कठोर कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा प्रदान कर दी। हालाँकि, न्यायालय ने यह राहत कई सख्त शर्तों के साथ दी है, जिनमें पासपोर्ट जमा करना और जाँच में पूर्ण सहयोग शामिल है।

अदालत की शर्तें और निर्देश

न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि जाँच एजेंसी कानून के अनुसार अपनी जाँच निर्बाध रूप से जारी रखेगी। यदि अरूप विश्वास को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया जाता है, तो उन्हें जाँच एजेंसी के समक्ष अनिवार्य रूप से उपस्थित होना होगा। जाँच एजेंसी को नोटिस देने से पहले कम से कम 48 घंटे का समय देना अनिवार्य होगा।

अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि अरूप विश्वास जाँच में पूरा सहयोग करेंगे। यदि वह नोटिस का जवाब देने में विफल रहते हैं, तो पुलिस इस मामले को न्यायालय के संज्ञान में ला सकती है।

उच्च न्यायालय ने अरूप विश्वास को सात दिनों के भीतर अपना पासपोर्ट निचली अदालत में जमा करने का निर्देश दिया है। इसके अतिरिक्त, अदालत की अनुमति के बिना वह अपने आवासीय क्षेत्र से बाहर नहीं जा सकेंगे।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद 13 दिसंबर 2025 को कोलकाता के साल्ट लेक स्थित युवा भारती क्रीड़ांगन में आयोजित लियोनेल मेसी के 'गोट इंडिया टूर' कार्यक्रम के दौरान कथित अव्यवस्था और भीड़ प्रबंधन में गड़बड़ी से जुड़ा है। आरोप है कि सुरक्षा संबंधी गंभीर चिंताओं के कारण कार्यक्रम के दौरान अफरातफरी मच गई और मेसी को समय से पहले कार्यक्रम स्थल छोड़ना पड़ा।

गौरतलब है कि मुख्य आयोजक सतद्रु दत्ता की शिकायत के आधार पर पुलिस ने अरूप विश्वास और अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए पूर्व मंत्री ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

टिकट वितरण पर गंभीर आरोप

मुख्य आयोजक सतद्रु दत्ता के वकील ने अदालत में दावा किया कि कार्यक्रम के लिए कुल 70,000 टिकट जारी किए गए थे, जिनमें से 22,000 टिकट अकेले अरूप विश्वास ने अपने विधानसभा क्षेत्र के लोगों के लिए लिए थे। वकील ने आरोप लगाया कि इन टिकटों को विभिन्न क्लबों के माध्यम से बेचा गया, जिससे भीड़ नियंत्रण बुरी तरह विफल रहा।

अदालत की टिप्पणियाँ

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने टिप्पणी की कि अन्य शहरों में यह कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न हुआ, किंतु कोलकाता में हुई अव्यवस्था ने शहर की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि अंतरिम राहत देने का अर्थ आरोपों की गंभीरता को कम आँकना नहीं है।

न्यायालय ने अरूप विश्वास और मेसी के बीच कथित नजदीकियों पर भी सवाल उठाए और पूछा कि आखिर कोलकाता में ही कार्यक्रम के दौरान अराजकता क्यों फैली।

जाँच और आगे की कार्रवाई

उच्च न्यायालय ने बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट को मामले की निष्पक्ष जाँच करने का निर्देश देते हुए कहा कि यह पता लगाया जाए कि कार्यक्रम का उचित संचालन क्यों नहीं हो सका। अदालत ने चार सप्ताह के भीतर जाँच रिपोर्ट पेश करने का आदेश भी दिया है। अगली सुनवाई 17 अगस्त 2026 को होगी, जब अंतरिम राहत की समीक्षा की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि एक सार्वजनिक कार्यक्रम में 22,000 टिकट एक विधायक के हाथों में कैसे पहुँचे और फिर क्लबों के जरिए बेचे गए। यह मामला पश्चिम बंगाल में राजनीतिक संरक्षण और सार्वजनिक आयोजनों के बीच की धुँधली रेखा को उजागर करता है। अदालत ने खुद स्वीकार किया कि कोलकाता में अव्यवस्था ने शहर की छवि को नुकसान पहुँचाया — यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि जवाबदेही का प्रश्न है। बिधाननगर पुलिस की जाँच रिपोर्ट ही तय करेगी कि यह मामला राजनीतिक दुरुपयोग की श्रेणी में आता है या नहीं।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अरूप विश्वास को कलकत्ता उच्च न्यायालय से क्या राहत मिली?
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पूर्व मंत्री अरूप विश्वास को 17 अगस्त 2026 तक किसी भी कठोर कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है। यह राहत कई शर्तों के साथ दी गई है, जिनमें पासपोर्ट जमा करना, जाँच में सहयोग और आवासीय क्षेत्र न छोड़ना शामिल है।
मेसी 'गोट इंडिया टूर' कोलकाता विवाद क्या है?
13 दिसंबर 2025 को कोलकाता के साल्ट लेक स्थित युवा भारती क्रीड़ांगन में लियोनेल मेसी के 'गोट इंडिया टूर' कार्यक्रम के दौरान कथित भीड़ प्रबंधन विफलता और अव्यवस्था हुई, जिसके चलते मेसी को समय से पहले कार्यक्रम छोड़ना पड़ा। मुख्य आयोजक सतद्रु दत्ता की शिकायत पर अरूप विश्वास समेत अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई।
अरूप विश्वास पर टिकट को लेकर क्या आरोप हैं?
आयोजक के वकील ने अदालत में दावा किया कि कार्यक्रम के कुल 70,000 टिकटों में से 22,000 टिकट अकेले अरूप विश्वास ने अपने विधानसभा क्षेत्र के नाम पर लिए और उन्हें विभिन्न क्लबों के माध्यम से बेचा गया। इससे भीड़ नियंत्रण बुरी तरह विफल रहा।
बिधाननगर पुलिस को क्या निर्देश दिए गए हैं?
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट को मामले की निष्पक्ष जाँच करने और यह पता लगाने का निर्देश दिया है कि कार्यक्रम का उचित संचालन क्यों नहीं हो सका। पुलिस को चार सप्ताह के भीतर जाँच रिपोर्ट अदालत में पेश करनी होगी।
अगली सुनवाई कब होगी और क्या होगा?
इस मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त 2026 को होगी, जब अंतरिम राहत की समीक्षा की जाएगी। तब तक बिधाननगर पुलिस की जाँच रिपोर्ट और अरूप विश्वास के पासपोर्ट जमा करने की स्थिति अदालत के समक्ष होगी।
राष्ट्र प्रेस
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