मेसी 'गोट इंडिया टूर' मामला: अरूप विश्वास को 17 अगस्त तक अंतरिम राहत, पासपोर्ट जमा करने का आदेश
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 10 जून 2026 को पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री अरूप विश्वास को फुटबॉल महानायक लियोनेल मेसी के 'गोट इंडिया टूर' कार्यक्रम में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में 17 अगस्त 2026 तक किसी भी कठोर कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा प्रदान कर दी। हालाँकि, न्यायालय ने यह राहत कई सख्त शर्तों के साथ दी है, जिनमें पासपोर्ट जमा करना और जाँच में पूर्ण सहयोग शामिल है।
अदालत की शर्तें और निर्देश
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि जाँच एजेंसी कानून के अनुसार अपनी जाँच निर्बाध रूप से जारी रखेगी। यदि अरूप विश्वास को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया जाता है, तो उन्हें जाँच एजेंसी के समक्ष अनिवार्य रूप से उपस्थित होना होगा। जाँच एजेंसी को नोटिस देने से पहले कम से कम 48 घंटे का समय देना अनिवार्य होगा।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि अरूप विश्वास जाँच में पूरा सहयोग करेंगे। यदि वह नोटिस का जवाब देने में विफल रहते हैं, तो पुलिस इस मामले को न्यायालय के संज्ञान में ला सकती है।
उच्च न्यायालय ने अरूप विश्वास को सात दिनों के भीतर अपना पासपोर्ट निचली अदालत में जमा करने का निर्देश दिया है। इसके अतिरिक्त, अदालत की अनुमति के बिना वह अपने आवासीय क्षेत्र से बाहर नहीं जा सकेंगे।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद 13 दिसंबर 2025 को कोलकाता के साल्ट लेक स्थित युवा भारती क्रीड़ांगन में आयोजित लियोनेल मेसी के 'गोट इंडिया टूर' कार्यक्रम के दौरान कथित अव्यवस्था और भीड़ प्रबंधन में गड़बड़ी से जुड़ा है। आरोप है कि सुरक्षा संबंधी गंभीर चिंताओं के कारण कार्यक्रम के दौरान अफरातफरी मच गई और मेसी को समय से पहले कार्यक्रम स्थल छोड़ना पड़ा।
गौरतलब है कि मुख्य आयोजक सतद्रु दत्ता की शिकायत के आधार पर पुलिस ने अरूप विश्वास और अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए पूर्व मंत्री ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
टिकट वितरण पर गंभीर आरोप
मुख्य आयोजक सतद्रु दत्ता के वकील ने अदालत में दावा किया कि कार्यक्रम के लिए कुल 70,000 टिकट जारी किए गए थे, जिनमें से 22,000 टिकट अकेले अरूप विश्वास ने अपने विधानसभा क्षेत्र के लोगों के लिए लिए थे। वकील ने आरोप लगाया कि इन टिकटों को विभिन्न क्लबों के माध्यम से बेचा गया, जिससे भीड़ नियंत्रण बुरी तरह विफल रहा।
अदालत की टिप्पणियाँ
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने टिप्पणी की कि अन्य शहरों में यह कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न हुआ, किंतु कोलकाता में हुई अव्यवस्था ने शहर की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि अंतरिम राहत देने का अर्थ आरोपों की गंभीरता को कम आँकना नहीं है।
न्यायालय ने अरूप विश्वास और मेसी के बीच कथित नजदीकियों पर भी सवाल उठाए और पूछा कि आखिर कोलकाता में ही कार्यक्रम के दौरान अराजकता क्यों फैली।
जाँच और आगे की कार्रवाई
उच्च न्यायालय ने बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट को मामले की निष्पक्ष जाँच करने का निर्देश देते हुए कहा कि यह पता लगाया जाए कि कार्यक्रम का उचित संचालन क्यों नहीं हो सका। अदालत ने चार सप्ताह के भीतर जाँच रिपोर्ट पेश करने का आदेश भी दिया है। अगली सुनवाई 17 अगस्त 2026 को होगी, जब अंतरिम राहत की समीक्षा की जाएगी।