7 जुलाई 2026
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वायनाड भूस्खलन: मेप्पाडी सुरंग स्थल पर 5 मजदूरों की मौत, 3 लापता; मानवजनित आपदा की आशंका

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वायनाड भूस्खलन: मेप्पाडी सुरंग स्थल पर 5 मजदूरों की मौत, 3 लापता; मानवजनित आपदा की आशंका

सारांश

वायनाड में एक बार फिर त्रासदी — इस बार सुरंग निर्माण स्थल पर। 226 मिमी बारिश के बाद मिट्टी का ढेर ढहा, 5 मजदूरों की जान गई, 3 अब भी लापता। सरकार ने इसे मानवजनित आपदा माना है — निर्देशों की अनदेखी का आरोप, और मुंडक्कई की बरसी से महज 23 दिन पहले यह सवाल फिर उठा: क्या सीख ली गई?

मुख्य बातें

वायनाड के मेप्पाडी-कल्लाडी सुरंग निर्माण स्थल पर 7 जुलाई 2026 को भूस्खलन में 5 मजदूरों की मौत , 3 लापता , 7 घायल ।
पिछले 24 घंटों में 226 मिमी बारिश के बाद खुदाई की मिट्टी का ढेर ढहा।
सिद्दीक ने प्रारंभिक जांच के आधार पर इसे मानवजनित आपदा करार दिया।
निर्माण कंपनी को 25 जून को मिट्टी हटाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन कथित तौर पर पालन नहीं हुआ।
₹2,134 करोड़ की परियोजना का निर्माण दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड कर रही है; प्रबंधन कोंकण रेलवे कॉरपोरेशन के पास।
यह हादसा मुंडक्कई-चूरलमाला भूस्खलन ( 30 जुलाई 2024 ) की बरसी से 23 दिन पहले हुआ, जिसमें 200+ लोगों की जान गई थी।

वायनाड जिले के मेप्पाडी-कल्लाडी सुरंग निर्माण स्थल पर 7 जुलाई 2026 को हुए भीषण भूस्खलन में कम से कम 5 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 3 लोग अब भी लापता हैं और 7 घायल अस्पताल में उपचाराधीन हैं। भारी मशीनों, खोजी कुत्तों और बचाव दलों की मदद से मलबे में दबे लोगों की तलाश रातभर जारी रही। कृषि मंत्री टी. सिद्दीक ने प्रारंभिक जांच के आधार पर इसे मानवजनित आपदा करार दिया है।

हादसा कैसे हुआ

यह दुर्घटना कल्लाडी स्थित मीनाक्षी पुल के निकट अनाक्कमपोयिल-कल्लाडी-मेप्पाडी सुरंग परियोजना के निर्माण स्थल पर हुई। पिछले 24 घंटों में मेप्पाडी में 226 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जिसके कारण खुदाई से निकली मिट्टी का विशाल ढेर अचानक ढह गया और कार्यस्थल का बड़ा हिस्सा मलबे में दब गया। भूस्खलन की चपेट में एक चर्च और पास का एक मकान भी आ गया, हालांकि मकान में रहने वाला परिवार हज यात्रा पर मक्का गया हुआ था और चर्च भी उस समय खाली था, जिससे और अधिक जनहानि टल गई।

लापरवाही के आरोप और जांच

लोक निर्माण मंत्री पी.के. बशीर ने खुलासा किया कि 10 जून को इस स्थल के संबंध में शिकायतें मिली थीं, जिसके बाद 25 जून को अधिकारियों ने निरीक्षण किया था। निर्माण कंपनी को खुदाई से निकली मिट्टी हटाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे, परंतु कथित तौर पर इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया। केंद्रीय पर्यटन राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने आरोप लगाया कि निर्देशों की अनदेखी गंभीर लापरवाही है और जांच में दोष सिद्ध होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घटना की जानकारी दे दी है।

सरकार की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आपात बैठक कर हालात की समीक्षा की। उन्होंने राजस्व मंत्री ए.पी. अनिल कुमार और कृषि मंत्री टी. सिद्दीक को राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी के लिए वायनाड भेजा। विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने हादसे पर गहरा दुख जताते हुए फंसे लोगों को जल्द निकालने और हादसे के कारणों की व्यापक जांच कराने की मांग की। वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी शोक व्यक्त करते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं से जिला प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की।

आम जनता पर असर

जिला प्रशासन ने एहतियात के तौर पर प्रभावित क्षेत्र के आसपास रहने वाले करीब 400 परिवारों का आकलन शुरू कर दिया है और संवेदनशील इलाकों के निवासियों को राहत शिविरों में स्थानांतरित करने की तैयारी है। वायनाड जिले के सभी शिक्षण संस्थानों में बुधवार, 8 जुलाई को अवकाश घोषित किया गया है। घटनास्थल के पास बस स्टॉप पर मौजूद एक दंपति ने बताया कि उन्होंने अचानक पहाड़ जैसी मिट्टी को नीचे गिरते देखा और तुरंत वहां से भाग निकले; महिला के हाथ में हल्की चोट आई।

परियोजना और ऐतिहासिक संदर्भ

₹2,134 करोड़ की लागत वाली अनाक्कमपोयिल-कल्लाडी-मेप्पाडी सुरंग परियोजना का निर्माण भोपाल स्थित दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड कर रही है, जबकि पहुंच मार्ग का निर्माण रॉयल इंफ्रा कंस्ट्रक्शन के जिम्मे है। परियोजना का प्रबंधन कोंकण रेलवे कॉरपोरेशन लिमिटेड कर रहा है। गौरतलब है कि यह हादसा 30 जुलाई 2024 को मुंडक्कई-चूरलमाला में हुए विनाशकारी भूस्खलन की दूसरी बरसी से महज 23 दिन पहले हुआ है, जिसमें 200 से अधिक लोगों की जान गई थी। यह हादसा एक बार फिर वायनाड में बड़े निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

25 जून को निरीक्षण, फिर भी मिट्टी नहीं हटी — और 7 जुलाई को पाँच जानें गईं। मुंडक्कई-चूरलमाला की 200 से अधिक मौतों के बाद वायनाड में बड़े निर्माण कार्यों पर सुरक्षा प्रोटोकॉल सख्त होने चाहिए थे, लेकिन यह हादसा बताता है कि चेतावनी और कार्रवाई के बीच की खाई अभी पाटी नहीं गई। असली सवाल यह है कि ₹2,134 करोड़ की परियोजना में निर्माण एजेंसी पर निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी — और वह जिम्मेदारी कहाँ चूकी।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वायनाड मेप्पाडी भूस्खलन में कितने लोगों की मौत हुई?
7 जुलाई 2026 को मेप्पाडी-कल्लाडी सुरंग निर्माण स्थल पर हुए भूस्खलन में कम से कम 5 मजदूरों की मौत हो गई, 3 लोग अब भी लापता हैं और 7 घायल अस्पताल में उपचाराधीन हैं।
वायनाड भूस्खलन का कारण क्या था?
पिछले 24 घंटों में मेप्पाडी में 226 मिमी भारी बारिश के कारण सुरंग खुदाई से निकली मिट्टी का विशाल ढेर ढह गया। कृषि मंत्री टी. सिद्दीक ने प्रारंभिक जांच के आधार पर इसे मानवजनित आपदा बताया है, क्योंकि निर्माण कंपनी ने मिट्टी हटाने के सरकारी निर्देशों का पालन नहीं किया।
मेप्पाडी-कल्लाडी सुरंग परियोजना क्या है और इसे कौन बना रहा है?
अनाक्कमपोयिल-कल्लाडी-मेप्पाडी सुरंग परियोजना ₹2,134 करोड़ की लागत वाली एक बड़ी बुनियादी ढाँचा योजना है। इसका निर्माण भोपाल स्थित दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड कर रही है, पहुंच मार्ग रॉयल इंफ्रा कंस्ट्रक्शन बना रही है और परियोजना का प्रबंधन कोंकण रेलवे कॉरपोरेशन लिमिटेड के पास है।
केरल सरकार ने इस हादसे पर क्या कदम उठाए?
मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के साथ आपात बैठक की और राजस्व मंत्री ए.पी. अनिल कुमार व कृषि मंत्री टी. सिद्दीक को वायनाड भेजा। मेप्पाडी पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और जिला प्रशासन ने करीब 400 परिवारों का आकलन शुरू किया है।
क्या वायनाड में पहले भी ऐसे भूस्खलन हो चुके हैं?
हाँ, 30 जुलाई 2024 को मुंडक्कई-चूरलमाला में हुए विनाशकारी भूस्खलन में 200 से अधिक लोगों की जान गई थी। यह नया हादसा उसी त्रासदी की दूसरी बरसी से महज 23 दिन पहले हुआ है, जिससे वायनाड में बड़े निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों पर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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