7 जुलाई 2026
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वायनाड भूस्खलन में 4 की मौत, 4 लापता; प्रियंका गांधी ने बचाव कार्य में सहयोग की अपील की

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वायनाड भूस्खलन में 4 की मौत, 4 लापता; प्रियंका गांधी ने बचाव कार्य में सहयोग की अपील की

सारांश

वायनाड के कल्लाडी में भूस्खलन से 4 की मौत, 4 लापता। कृषि मंत्री सिद्दीकी ने इसे 'मानव-जनित आपदा' करार दिया — निर्माण कंपनी ने 20 जून के सरकारी आदेश की अनदेखी की थी। सांसद प्रियंका गांधी ने बचाव में सहयोग की अपील की।

मुख्य बातें

वायनाड के कल्लाडी में 7 जुलाई 2026 को हुए भूस्खलन में 4 लोगों की मौत , 4 अभी भी लापता , 10 घायल ।
सिद्दीकी ने घटना को 'मानव-जनित आपदा' बताया; निर्माण कंपनी ने 20 जून के सरकारी आदेश का पालन नहीं किया।
पिछले 24 घंटों में 226 मिमी वर्षा के बाद सुरंग निर्माण स्थल पर जमा मिट्टी के ढेर ढहे।
NDRF, SDRF, पुलिस और सिविल डिफेंस की संयुक्त टीमें बचाव में जुटीं; 2 एक्सकेवेटर मलबा हटाने में लगे।
सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने UDF कार्यकर्ताओं और जनता से जिला प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की।
सतीशन ने जाँच का आश्वासन दिया कि पूर्व चेतावनियों के बाद क्या कार्रवाई हुई।

केरल के वायनाड जिले में 7 जुलाई 2026 को हुए विनाशकारी भूस्खलन में मरने वालों की संख्या बढ़कर चार हो गई है, जबकि चार अन्य लोग अब भी भारी मिट्टी और मलबे के नीचे दबे हैं। पुलिस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और सिविल डिफेंस के स्वयंसेवकों की संयुक्त टीमें बचाव अभियान में जुटी हैं। दस घायल लोगों का दो अस्पतालों में उपचार जारी है।

मुख्य घटनाक्रम

यह भूस्खलन कल्लाडी में मीनाक्षी पुल के निकट हुआ। प्रारंभिक जाँच के अनुसार, मेप्पाडी क्षेत्र में पिछले 24 घंटों में 226 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जिसके कारण सुरंग निर्माण स्थल पर जमा की गई खोदी हुई मिट्टी के विशाल ढेर ढह गए।

भूस्खलन में एक चर्च और उसके पास स्थित एक घर भी मलबे में दब गए। हालाँकि, घर पर ताला लगा था क्योंकि उसके निवासी मक्का की तीर्थयात्रा पर गए हुए थे, और घटना के समय चर्च के भीतर भी कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था। प्रभावित क्षेत्रों को जोड़ने वाला एक पुल भी मलबे में दब जाने से बचाव कार्यों में गंभीर बाधा उत्पन्न हुई है।

मानव-जनित आपदा का आरोप

केरल सरकार के कृषि मंत्री टी. सिद्दीकी ने घटनास्थल के लिए रवाना होने से पहले मीडिया से बात करते हुए स्पष्ट रूप से कहा, 'यह प्राकृतिक भूस्खलन नहीं है। यह मानव-जनित आपदा है।' उन्होंने बताया कि शुरुआती आकलन से संकेत मिलते हैं कि चिंताएँ जताए जाने के बावजूद निर्माण स्थल पर मिट्टी को अवैज्ञानिक तरीके से जमा किया गया था।

मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (KSDMA) मुख्यालय में आपातकालीन समीक्षा बैठक की अध्यक्षता के बाद बताया कि अधिकारियों ने निर्माण कंपनी को कई बार निर्देश दिए थे कि साइट पर जमा खोदी हुई मिट्टी के ढेर को हटाया जाए। इस संबंध में 20 जून को औपचारिक सरकारी आदेश भी जारी किया गया था, परंतु कंपनी ने उसका पालन नहीं किया। सरकार ने जाँच का आश्वासन दिया है कि पूर्व चेतावनियों के बाद क्या कार्रवाई की गई थी।

सरकार की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री सतीशन स्वयं बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने राजस्व मंत्री ए.पी. अनिल कुमार और कृषि मंत्री सिद्दीकी को बचाव अभियान की प्रत्यक्ष निगरानी के लिए वायनाड जाने का निर्देश दिया है। मलबा हटाने और बचाव दलों के लिए रास्ता बनाने हेतु दो एक्सकेवेटर लगातार काम कर रहे हैं।

प्रियंका गांधी की अपील

कांग्रेस नेता और वायनाड की सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि फँसे हुए लोगों को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं और राज्य प्रशासन पूरे समन्वय के साथ काम कर रहा है। उन्होंने जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा, 'हमारी प्रार्थनाएं और उम्मीदें उन लोगों के साथ हैं जो अभी भी लापता हैं।'

उन्होंने UDF कार्यकर्ताओं, पार्टी पदाधिकारियों और आम जनता से अपील की कि वे जिला प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए बचाव कार्यों में सहयोग करें और किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न करें।

आगे क्या

यह क्षेत्र पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है और घटना के समय निकट ही कई निजी वाहन और निर्माण मजदूरों को लाने-ले जाने वाली एक बस खड़ी थी। बचाव दलों को आशंका है कि मलबे के नीचे अभी भी लोग दबे हो सकते हैं। गौरतलब है कि यह घटना जुलाई 2024 के वायनाड भूस्खलन की विभीषिका के लगभग एक वर्ष बाद हुई है, जिसमें 200 से अधिक लोगों की जान गई थी — और एक बार फिर इस क्षेत्र में निर्माण गतिविधियों की निगरानी पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और अधिकारियों ने अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया — यह निगरानी तंत्र की गंभीर खामी उजागर करता है। वायनाड जुलाई 2024 की विभीषिका के बाद भी यदि निर्माण स्थलों पर अवैज्ञानिक प्रथाएँ जारी रहीं, तो 'पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र' की घोषणाएँ कागज़ी बनकर रह जाती हैं। असली सवाल यह है कि जवाबदेही की यह जाँच केवल एक और रिपोर्ट बनकर रहेगी, या इस बार कंपनी और लापरवाह अधिकारियों पर ठोस कार्रवाई होगी।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वायनाड भूस्खलन में कितने लोगों की मौत हुई और कितने लापता हैं?
7 जुलाई 2026 तक वायनाड के कल्लाडी में हुए भूस्खलन में 4 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और 4 अन्य लोग अभी भी मलबे के नीचे दबे हैं। 10 घायल लोगों का दो अस्पतालों में उपचार जारी है।
वायनाड भूस्खलन को 'मानव-जनित आपदा' क्यों कहा जा रहा है?
कृषि मंत्री टी. सिद्दीकी के अनुसार, सुरंग निर्माण स्थल पर खोदी गई मिट्टी को अवैज्ञानिक तरीके से जमा किया गया था। सरकार ने 20 जून को औपचारिक आदेश जारी कर निर्माण कंपनी को मिट्टी के ढेर हटाने को कहा था, परंतु कंपनी ने इसका पालन नहीं किया।
बचाव अभियान में कौन-कौन सी एजेंसियाँ शामिल हैं?
बचाव अभियान में पुलिस, NDRF, SDRF और सिविल डिफेंस के स्वयंसेवक शामिल हैं। मलबा हटाने के लिए दो एक्सकेवेटर लगातार काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन स्वयं अभियान की निगरानी कर रहे हैं।
प्रियंका गांधी ने वायनाड भूस्खलन पर क्या कहा?
वायनाड की सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और UDF कार्यकर्ताओं व जनता से जिला प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए बचाव कार्यों में सहयोग देने की अपील की। उन्होंने कहा कि बचाव में किसी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए।
वायनाड में भूस्खलन कहाँ और कैसे हुआ?
भूस्खलन कल्लाडी में मीनाक्षी पुल के पास हुआ। मेप्पाडी क्षेत्र में 24 घंटों में 226 मिमी वर्षा के कारण निर्माण स्थल पर जमा मिट्टी के ढेर ढह गए। एक चर्च, एक घर और एक पुल मलबे में दब गए।
राष्ट्र प्रेस
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