वायनाड भूस्खलन: सीएम वी.डी. सतीशन ने बुलाई आपातकालीन बैठक, तीन लोग बचाए गए, और फंसे हो सकते हैं
सारांश
मुख्य बातें
केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने मंगलवार, 7 जुलाई को वायनाड में हुए भूस्खलन की गंभीर स्थिति को लेकर तत्काल आपातकालीन बैठक बुलाई। अनाक्कम्पॉयिल-कल्लाडी सुरंग सड़क परियोजना के वायनाड छोर पर हुए इस भूस्खलन में अब तक तीन लोगों को बचाया जा चुका है, जबकि अधिकारियों को आशंका है कि मलबे में और श्रमिक व पर्यटक दबे हो सकते हैं। बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है और फंसे लोगों की सटीक संख्या की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मुख्य घटनाक्रम
यह भूस्खलन मीनाक्षी पुल के पास कलाड़ी में सुरंग निर्माण स्थल के निकट हुआ। मेप्पडी क्षेत्र में पिछले 24 घंटों में असाधारण रूप से 226 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जिसके कारण ढीली मिट्टी धंसकर नीचे गिर गई और कार्यस्थल के कुछ हिस्से पूरी तरह दब गए। निर्माण स्थल पर खोदकर रखी गई मिट्टी का विशाल ढेर भी इस भूस्खलन में ढह गया, जिससे स्थिति और अधिक विकट हो गई।
घटना के समय कार्यस्थल पर निर्माण श्रमिकों को लाने वाली एक बस भी खड़ी थी, जिसके मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। इसके अलावा, यह इलाका पर्यटकों में काफी लोकप्रिय है और भूस्खलन के समय वहाँ कई निजी वाहन भी खड़े थे।
सरकार की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री सतीशन ने आपातकालीन बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राहत और बचाव कार्य बिना किसी देरी के युद्धस्तर पर चलाए जाएँ। उन्होंने राजस्व मंत्री ए.पी. अनिल कुमार और कृषि मंत्री टी. सिद्दीकी को तत्काल वायनाड पहुँचकर राहत एवं बचाव अभियान की सीधी निगरानी करने के निर्देश दिए। उल्लेखनीय है कि कृषि मंत्री टी. सिद्दीकी स्वयं वायनाड से हैं और बैठक में पहले से मौजूद थे।
बचाव अभियान की स्थिति
दमकल और बचाव सेवा, पुलिस तथा अन्य आपातकालीन एजेंसियों ने घटनास्थल पर राहत कार्य शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की एक टीम को भी तत्काल घटनास्थल पर भेजा गया है। घटनास्थल से मिली रिपोर्टों के अनुसार, अब तक तीन लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। हालाँकि, अधिकारियों को संदेह है कि मलबे में अभी और श्रमिक एवं पर्यटक दबे हो सकते हैं, जिनकी तलाश जारी है।
आम जनता पर असर
यह घटना ऐसे समय में आई है जब केरल में मानसून अपने चरम पर है और वायनाड जैसे पहाड़ी जिले भारी वर्षा की चपेट में हैं। गौरतलब है कि वायनाड पहले भी विनाशकारी भूस्खलन का शिकार हो चुका है — जुलाई 2024 में मुंडक्कई-चूरलमाला भूस्खलन में 200 से अधिक लोगों की जान गई थी। निर्माण स्थलों के आसपास खोदी गई मिट्टी का अनुचित प्रबंधन भूस्खलन के जोखिम को बढ़ाता है, यह चिंता विशेषज्ञ पहले भी उठा चुके हैं।
क्या होगा आगे
बचाव अभियान अभी जारी है और फंसे हुए लोगों की संख्या तथा हुए नुकसान की पूरी जानकारी की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। अधिकारियों के अनुसार, भारी बारिश के कारण भूस्खलन की घटना हुई, लेकिन घटनाक्रम के सटीक क्रम का अभी पता लगाया जा रहा है। राज्य सरकार ने स्थिति पर कड़ी नज़र रखी हुई है और वरिष्ठ मंत्री वायनाड पहुँच रहे हैं।