रेट्टामलाई श्रीनिवासन जयंती: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन समेत कई नेताओं ने अर्पित की पुष्पांजलि
सारांश
मुख्य बातें
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने मंगलवार, 7 जुलाई को नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में प्रख्यात समाज सुधारक रेट्टामलाई श्रीनिवासन की जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित की। हाशिए पर खड़े समुदायों के अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष करने वाले इस अग्रणी नेता को देशभर के राजनेताओं ने श्रद्धा के साथ याद किया।
उपराष्ट्रपति की श्रद्धांजलि
उपराष्ट्रपति कार्यालय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर जानकारी दी कि सी. पी. राधाकृष्णन ने उपराष्ट्रपति आवास पर रेट्टामलाई श्रीनिवासन को पुष्पांजलि अर्पित की। कार्यालय ने उन्हें 'समाज सुधारक और हाशिए पर मौजूद समुदायों के उत्थान के लिए अथक प्रयास करने वाले अग्रणी नेता' के रूप में वर्णित किया।
भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता नैनार नागेंद्रन ने एक्स पर लिखा कि रेट्टामलाई श्रीनिवासन ने 'सामाजिक न्याय, समानता और दबे-कुचले समुदायों के अधिकारों के लिए निस्वार्थ भाव से लड़ाई लड़ी।' उन्होंने कहा कि शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के क्षेत्र में उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बना रहेगा।
BJP नेता वनथी श्रीनिवासन ने एक्स पर श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें 'थाथा' के नाम से संबोधित किया और कहा कि मद्रास प्रांतीय विधान सभा के सदस्य के रूप में उन्होंने वंचित समुदायों के लिए बजट आवंटन, शिक्षा-स्वास्थ्य के विकास और पंचमी भूमि के वितरण जैसे महत्वपूर्ण प्रयास किए।
अन्नामलाई का संदेश
BJP नेता के. अन्नामलाई ने एक्स पर लिखा कि 'थिरु रेट्टामलाई श्रीनिवासन' ने एक सामाजिक विचारक, पत्रकार और राजनीतिक नेता के रूप में अनुसूचित जाति के लोगों के अधिकारों और पंचमी ज़मीन की वापसी के लिए अथक संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि छुआछूत उन्मूलन, सामाजिक न्याय और समानता के लिए आधी सदी से भी अधिक समय तक किए गए उनके निस्वार्थ प्रयास आज भी प्रेरणा का स्रोत हैं।
रेट्टामलाई श्रीनिवासन की विरासत
गौरतलब है कि रेट्टामलाई श्रीनिवासन को दलित अधिकार आंदोलन के अग्रदूतों में गिना जाता है। उन्होंने मद्रास प्रांतीय विधान सभा में रहते हुए वंचित तबके के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए विधायी स्तर पर संघर्ष किया। उनकी जयंती पर देश के विभिन्न हिस्सों में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
इस वर्ष उनकी जयंती पर राष्ट्रीय स्तर पर हुई श्रद्धांजलि यह दर्शाती है कि सामाजिक न्याय की उनकी विरासत आज भी राजनीतिक और सामाजिक विमर्श को प्रभावित करती है।