क्या उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन और पीएम मोदी ने रानी वेलु नचियार की जयंती पर श्रद्धांजलि दी?

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क्या उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन और पीएम मोदी ने रानी वेलु नचियार की जयंती पर श्रद्धांजलि दी?

सारांश

3 जनवरी को रानी वेलु नचियार की जयंती पर उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन और पीएम मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। उनके साहस और विरासत को याद करते हुए, उन्होंने भारत की महिलाओं के प्रति उनकी प्रेरणा को स्वीकार किया। यह एक महत्वपूर्ण घटना है जो भारतीय इतिहास की महान नायिकाओं को उजागर करती है।

Key Takeaways

  • रानी वेलु नचियार भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की एक महत्वपूर्ण नायिका थीं।
  • उनकी साहस और नेतृत्व ने कई महिलाओं को प्रेरित किया।
  • उपराष्ट्रपति और पीएम मोदी ने उनकी विरासत को मान्यता दी।
  • रानी वेलु नचियार ने औपनिवेशिक शासन के खिलाफ मजबूती से खड़े होकर लड़ा।
  • उनका योगदान आज भी लोगों को प्रेरित करता है।

नई दिल्ली, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत की प्रारंभिक महिला स्वतंत्रता सेनानियों में से एक रानी वेलु नचियार की जयंती के अवसर पर देश के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। उन्होंने अच्छे शासन और सांस्कृतिक गर्व के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की प्रशंसा की।

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "महिलाओं की ताकत और नेतृत्व की एक अमर प्रतीक वीरामंगई रानी वेलु नचियार की जयंती पर मैं भारत की प्रारंभिक महिला स्वतंत्रता सेनानियों में से एक को अपनी श्रद्धांजलि देता हूं।"

उन्होंने आगे लिखा, "एक बहादुर शासक और दूरदर्शी नेता के रूप में वह औपनिवेशिक शासन के खिलाफ मजबूती से खड़ी रहीं और साहस, रणनीतिक समझ व असाधारण नेतृत्व का उदाहरण पेश किया। उनकी अमिट विरासत पीढ़ियों को प्रेरित करती है, खासकर महिलाओं को, साहस, गरिमा और देशभक्ति की भावना को मजबूत करके जो आज देश का मार्गदर्शन करती है।"

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रानी वेलु नचियार को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि देते हुए लिखा, "उन्हें भारत की प्रारंभिक बहादुर योद्धाओं में से एक के रूप में याद किया जाता है, जिन्होंने अदम्य साहस और अद्वितीय रणनीतिक कौशल का परिचय दिया। वह औपनिवेशिक दमन के खिलाफ उठीं और भारतीयों के खुद पर राज करने के अधिकार पर जोर दिया। अच्छे शासन और सांस्कृतिक गर्व के लिए उनकी प्रतिबद्धता भी तारीफ के काबिल है। उनका त्याग और दूरदर्शी नेतृत्व आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।"

3 जनवरी 1730 को जन्मी वेलु नचियार 18वीं शताब्दी के दौरान वर्तमान तमिलनाडु में शिवगंगई रियासत की रानी थीं। रानी वेलु नचियार युद्ध कलाओं और तीरंदाजी में प्रशिक्षित थीं। उन्हें फ्रांसीसी, उर्दू और अंग्रेजी समेत कई भाषाओं में भी निपुणता हासिल थी।

रानी वेलु नचियार को ब्रिटिश औपनिवेशिक सत्ता के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाली पहली रानी के रूप में जाना जाता है। 1780 में रानी वेलु नचियार अंग्रेजों से निडर होकर लड़ीं और उन्हें परास्त किया। तमिलनाडु के लोग आज भी उन्हें वीरमंगई यानी बहादुर रानी के नाम से जानते हैं।

Point of View

उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने रानी वेलु नचियार की भूमिका को मान्यता दी है। यह निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण क्षण है, जहां महिलाओं के प्रति सम्मान और उनकी वीरता को सलाम किया जा रहा है। यह देश के स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं के योगदान को उजागर करता है और समाज में उनके स्थान को महत्वपूर्ण बनाता है।
NationPress
03/01/2026

Frequently Asked Questions

रानी वेलु नचियार कौन थीं?
रानी वेलु नचियार 18वीं शताब्दी की एक प्रमुख भारतीय रानी थीं, जिन्होंने ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी।
उपराष्ट्रपति और पीएम मोदी ने क्या कहा?
उपराष्ट्रपति और पीएम मोदी ने रानी वेलु नचियार की साहस और नेतृत्व की प्रशंसा की और उनके योगदान को याद किया।
रानी वेलु नचियार का जन्म कब हुआ?
रानी वेलु नचियार का जन्म 3 जनवरी 1730 को हुआ था।
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