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उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने आर. नल्लकन्नू की याद में शोक व्यक्त किया, उन्हें योद्धा बताया

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उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने आर. नल्लकन्नू की याद में शोक व्यक्त किया, उन्हें योद्धा बताया

सारांश

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने स्वतंत्रता सेनानी आर. नल्लकन्नू के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उनके जीवन को समर्पण और त्याग की मिसाल बताया। उनकी संघर्ष यात्रा ने उन्हें एक महान नेता बना दिया।

मुख्य बातें

नल्लकन्नू ने अपने जीवन को समाज की सेवा में समर्पित किया।
वे स्वतंत्रता सेनानी और कम्युनिस्ट नेता थे।
उनका निधन सार्वजनिक जीवन के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
उपराष्ट्रपति ने उनके योगदान की सराहना की।
उनकी सादगी और त्याग सभी के लिए प्रेरणा है।

नई दिल्ली, २५ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने बुधवार को कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) के वरिष्ठ नेता और स्वतंत्रता सेनानी आर. नल्लकन्नू के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया।

उपराष्ट्रपति ने अपने आधिकारिक 'एक्स' हैंडल पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि नल्लकन्नू के निधन की खबर सुनकर उन्हें अत्यधिक दुःख हुआ। वे एक अद्वितीय नेता थे, जिन्होंने अपनी सम्पूर्ण जिंदगी समाज की भलाई के लिए समर्पित की, बिना किसी स्वार्थ के। वे स्वतंत्रता सेनानी होने के साथ-साथ इंडियन पब्लिक प्रॉपर्टी मूवमेंट के एक अग्रदूत थे।

पोस्ट में आगे कहा गया कि नल्लकन्नू एक योद्धा थे, जिन्होंने श्रमिकों के अधिकारों, सामाजिक न्याय और दबे-कुचले लोगों की भलाई के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उनकी सादगी, ईमानदारी, त्याग और सिद्धांतों के प्रति उनकी निष्ठा के लिए सभी उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं। उनका जाना सार्वजनिक जीवन के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

उपराष्ट्रपति ने उनके परिवार, सीपीआई के साथियों और तमिलनाडु के लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि उनका त्यागपूर्ण जीवन हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेगा।

आर. नल्लकन्नू (जिन्हें आर.एन.के. के नाम से भी जाना जाता है) का निधन २५ फरवरी २०२६ को चेन्नई के राजीव गांधी गवर्नमेंट जनरल हॉस्पिटल में हुआ। उनकी उम्र १०१ वर्ष थी। उन्होंने १ फरवरी से लंबी बीमारी और उम्र से संबंधित समस्याओं के कारण अस्पताल में भर्ती थे। अस्पताल ने बताया कि उनकी मृत्यु मल्टी-ऑर्गन फेलियर के कारण हुई। वे १९९२-२००५ तक सीपीआई के तमिलनाडु राज्य सचिव रह चुके थे और नेल्लई षड्यंत्र मामले के अंतिम जीवित सदस्य थे।

नल्लकन्नू ने १९४३ में १८ वर्ष की आयु में सीपीआई जॉइन की और ८० वर्षों से अधिक समय तक कम्युनिस्ट आंदोलन, श्रमिक-किसान संघर्ष, सामाजिक न्याय, धर्मनिरपेक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए संघर्ष किया। उन्होंने भूमि अधिकार, मजदूरी और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर कई आंदोलनों का नेतृत्व किया। उनका जीवन सादगी का प्रतीक था, और उन्होंने अपनी जिंदगी किराए के मकान में बिताई, राजनीति को व्यवसाय नहीं बनने दिया।

उनके निधन पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन, सीपीआई महासचिव डी. राजा, अन्य नेता और संगठनों ने शोक व्यक्त किया। सीपीआई ने इसे कम्युनिस्ट आंदोलन के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आर. नल्लकन्नू कौन थे?
आर. नल्लकन्नू एक वरिष्ठ नेता और स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने कम्युनिस्ट आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उपराष्ट्रपति ने उनके लिए क्या कहा?
उपराष्ट्रपति ने उन्हें एक महान नेता और योद्धा बताया, जिन्होंने समाज की सेवा में अपना जीवन बिताया।
आर. नल्लकन्नू का निधन कब हुआ?
उनका निधन २५ फरवरी २०२६ को हुआ।
नल्लकन्नू का मुख्य योगदान क्या था?
उनका मुख्य योगदान श्रमिकों के अधिकारों और सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष करना था।
उनकी उम्र कितनी थी जब उनका निधन हुआ?
उनकी उम्र १०१ वर्ष थी।
राष्ट्र प्रेस
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