क्या उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने लाल बहादुर शास्त्री और तिरुप्पुर कुमारन को श्रद्धांजलि दी?
सारांश
Key Takeaways
- लाल बहादुर शास्त्री का जीवन सादगी और ईमानदारी का प्रतीक है।
- तिरुप्पुर कुमारन ने मातृभूमि के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।
- इनकी विरासत आज भी युवाओं को प्रेरित करती है।
- राष्ट्र के प्रति अडिग समर्पण की आवश्यकता है।
- एकता और राष्ट्रसेवा का महत्व समझना चाहिए।
नई दिल्ली, ११ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने रविवार को हमारे दो महान सपूतों को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी। उपराष्ट्रपति के आधिकारिक एक्स अकाउंट पर साझा किए गए दो अलग-अलग पोस्ट में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीद थियागी तिरुप्पुर कुमारन को याद किया गया।
पहले पोस्ट में उपराष्ट्रपति ने शास्त्री जी की पुण्यतिथि पर वाइस प्रेसिडेंट्स एनक्लेव में उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने शास्त्री जी को एक दूरदर्शी नेता बताते हुए कहा कि उनका संपूर्ण जीवन सादगी, ईमानदारी और राष्ट्र के प्रति अडिग समर्पण का प्रतीक रहा है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि शास्त्री जी का ऐतिहासिक नारा 'जय जवान, जय किसान' आज भी देश की पीढ़ियों को प्रेरित करता है, जो भारतीय सैनिकों और किसानों के प्रति उनके गहरे सम्मान को दर्शाता है।
उन्होंने आगे कहा कि निःस्वार्थ सेवा, विनम्रता और राष्ट्रीय एकता जैसे शास्त्री जी के आदर्श आज भी भारत के लिए मार्गदर्शक बने हुए हैं।
दूसरे पोस्ट में उपराष्ट्रपति ने स्वतंत्रता संग्राम के युवा शहीद तिरुप्पुर कुमारन को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने वाइस प्रेसिडेंट्स एनक्लेव में तिरुप्पुर कुमारन के चित्र पर पुष्प अर्पित करते हुए कहा कि तिरुप्पुर कुमारन एक ऐसे युवा बलिदानी थे, जिनका जीवन मातृभूमि के प्रति अटूट प्रेम और राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान का सशक्त उदाहरण है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि तिरुप्पुर कुमारन की विरासत आज भी युवाओं के भीतर देशभक्ति की भावना को प्रज्वलित करती है।
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने अपने संदेश में दोनों महान व्यक्तित्वों को नमन करते हुए कहा कि इन दोनों की जीवन गाथाएं देशवासियों को राष्ट्रसेवा और एकता के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रहेंगी।