केवल 25% भारतीय कंपनियाँ मानती हैं कर्मचारी एआई के लिए तैयार, 2025 से 12 अंक की गिरावट: काइंड्रिल रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को अपनाने की रफ्तार तेज़ हो रही है, लेकिन कर्मचारियों की तैयारी इस गति से काफी पीछे है। 7 जुलाई 2026 को जारी काइंड्रिल की रिपोर्ट के अनुसार, केवल 25 प्रतिशत भारतीय कंपनियाँ मानती हैं कि उनकी वर्कफोर्स एआई का प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए पर्याप्त रूप से तैयार है — यह आँकड़ा 2025 की तुलना में 12 प्रतिशत अंक कम है। यह रिपोर्ट आठ देशों के 1,100 वरिष्ठ बिजनेस और टेक्नोलॉजी लीडर्स के सर्वेक्षण पर आधारित है।
एआई अपनाने की स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की 56 प्रतिशत कंपनियों ने एआई को अपने प्रमुख बिजनेस प्रोसेस में व्यापक रूप से लागू कर दिया है। तुलनात्मक रूप से, 2025 में केवल 36 प्रतिशत कंपनियों ने कहा था कि एआई उनके संगठन में पूरी तरह एकीकृत हो चुका है। यह उछाल दर्शाता है कि एआई का प्रसार तेज़ी से हो रहा है, लेकिन मानव-पूँजी की तैयारी उसी अनुपात में नहीं बढ़ पाई है।
बिजनेस लीडर्स की चिंताएँ
रिपोर्ट में बताया गया कि 81 प्रतिशत भारतीय बिजनेस लीडर्स को चिंता है कि एआई का विकास कर्मचारियों की क्षमताओं, गवर्नेंस फ्रेमवर्क और ऑपरेटिंग मॉडल से कहीं अधिक तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। गौरतलब है कि यह वही समय है जब स्वायत्त एआई एजेंट कारोबारी निर्णयों में भूमिका निभाने लगे हैं।
84 प्रतिशत भारतीय कंपनियों का अनुमान है कि अगले 12 महीनों में स्वायत्त एआई एजेंट महत्वपूर्ण कारोबारी फैसले लेने लगेंगे। हालाँकि, केवल 28 प्रतिशत कंपनियाँ ही ऐसे एआई सिस्टम पर पूरी तरह भरोसा करती हैं जो बिना किसी मानवीय निगरानी के काम करें — यह विश्वास और तकनीकी क्षमता के बीच की गहरी खाई को उजागर करता है।
कंपनियाँ क्या कदम उठा रही हैं
रिपोर्ट के मुताबिक, एआई अपनाने की दिशा में भारतीय कंपनियाँ कुछ सकारात्मक पहल भी कर रही हैं। करीब 69 प्रतिशत कंपनियों ने एआई को ध्यान में रखते हुए कर्मचारियों की भूमिकाओं में बदलाव किया है। वहीं, 33 प्रतिशत संगठनों ने कर्मचारियों के कौशल विकास के लिए अलग बजट और औपचारिक योजनाएँ शुरू की हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
काइंड्रिल इंडिया के एशिया पैसिफिक प्रेसिडेंट लिंगराजू सावकर ने कहा कि भारत लगातार नई तकनीकों को अपनाने में अग्रणी रहा है और कंपनियाँ तेज़ी से एआई को अपने कारोबार का हिस्सा बना रही हैं। उन्होंने कहा कि 'एआई से वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब कंपनियाँ केवल नई तकनीक अपनाने तक सीमित न रहें, बल्कि काम करने के तरीके में बदलाव करें, कर्मचारियों की नई भूमिकाएँ तय करें, उनकी क्षमताओं का विकास करें और ऐसा गवर्नेंस फ्रेमवर्क तैयार करें जिससे एआई का जिम्मेदार और भरोसेमंद उपयोग सुनिश्चित हो सके।'
आगे की राह
रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि एआई की सफलता केवल नई रणनीतियों या तकनीकों पर निर्भर नहीं करती — यह इस बात पर भी टिकी है कि कंपनियाँ काम करने के तरीके को किस तरह बदलती हैं और कर्मचारियों को उस बदलाव के लिए कैसे तैयार करती हैं। एआई पर भरोसा मज़बूत करने के लिए ऑपरेटिंग मॉडल और गवर्नेंस सिस्टम में ठोस सुधार अपरिहार्य हैं — अन्यथा तकनीकी निवेश और वास्तविक उत्पादकता के बीच की खाई और चौड़ी होती जाएगी।